बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर 15 से ज्यादा सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल आ चुके हैं. कुछ सर्वे एजेंसियां बुधवार शाम तक एग्जिट पोल जारी करेंगे. इन तमाम सर्वे में केवल Journo Mirror Exit Poll का एक मात्र ऐसा एग्जिट पोल है जो महागठबंधन को जीत मिलने का अनुमान लगा रहा है. इसके अलावा […]
By UB India News • Patna, Bihar बुधवार, 12 नवंबर 2025, 06:05 AM • 8 मिनट read
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर 15 से ज्यादा सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल आ चुके हैं. कुछ सर्वे एजेंसियां बुधवार शाम तक एग्जिट पोल जारी करेंगे. इन तमाम सर्वे में केवल Journo Mirror Exit Poll का एक मात्र ऐसा एग्जिट पोल है जो महागठबंधन को जीत मिलने का अनुमान लगा रहा है. इसके अलावा तमाम एग्जिट पोल में बीजेपी, जेडीयू की अगुवाई वाले एनडीए को क्लियर बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया है.
एग्जिट पोल को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें चल रही हैं. कुछ लोग अनुमान लगा रहे हैं कि एग्जिट पोल के अनुरूप ही बिहार में वास्तविक रिजल्ट रह सकते हैं. वहीं कई ऐसे लोग हैं जो बिहार चुनाव को लेकर जारी एग्जिट पोल को पूरी तरह से कपोल कल्पना बताने में लगे हैं. लोकतंत्र है इसलिए सबको अपने अपने हिसाब से कॉमेंट करने और अनुमान लगाने का हक है. एग्जिट पोल को लेकर हो रही इन तमाम चर्चाओं को छोड़ भी दें और चुनाव आयोग की ओर से जारी एक आंकड़े पर नजर डालें तो इस चुनाव के ट्रिगर प्वाइंट को अच्छे से समझ पाएंगे.
चुनाव आयोग के आंकड़े में क्या है गौर करने लायक
बिहार में मंगलवार शाम छह बजे दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग संपन्न हो गई. इसके कुछ घंटे बाद ही चुनाव आयोग ने बताया कि इतिहास में पहली बार बिहार में 66.91 फीसदी वोटिंग हुई. पहले चरण में 65.08 फीसदी वोटिंग हुई. दूसरे चरण में यह रिकॉर्ड टूट गया और बिहार के 68.76 फीसदी वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
चुनाव आयोग ओवरऑल वोटिंग परसेंटेज के साथ पहली बार यह भी बताया कि महिला और पुरुष वोटरों की भागीदारी कितनी रही. महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव लगातार चुनाव आयोग से डिमांड कर रहे थे कि पुरुष और महिला वोटरों के वोटिंग प्रतिशत के अलग-अलग आंकड़े जारी किए जाएं.
चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार चुनाव 2025 में 71.6 फीसदी महिलाओं ने वोट डाला, जबकि 62.8 फीसदी पुरुषों ने वोट डाला. इस तरह 8.8 फिसदी ज्यादा महिलाओं ने वोटिंग की. आजाद भारत के इतिहास में पहली बार इतनी भारी संख्या में महिलाओं ने वोट डाला. 2015 में 60.5 फीसदी और 2020 में 63.9 फीसदी महिलाओं ने बिहार में वोटिंग की. 2025 में यह आंकड़ा 71.6 फीसदी तक पहुंच गया.
चुनाव आयोग के इसी आंकड़े में बिहार चुनाव का ट्रिगर प्वाइंट छुपा है. ये आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि बिहार में पुरुषों के मुकाबले करीब छह लाख ज्यादा महिलाओं ने वोट डाला. अगर इसे 243 सीटों से डिवाइड कर दें तो लगभग हर सीट पर 25 हजार ज्यादा महिलाओं ने वोट किया है. यही वह आंकड़ा है जो बताता है कि बिहार चुनाव 2025 में ट्रिगर प्वाइंट साबित होगा.
बिहार में महिलाओं का झुकाव किसकी तरफ?
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि नीतीश कुमार ने अपने 20 साल के शाषण में महिलाओं के वोट बैंक का एक अलग क्लास तैयार किया है. 2005 में सत्ता संभालने के बाद पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने से शुरू हुआ सफर, स्कूली छात्राओं को साइकिल, उच्च शिक्षा के लिए नकद से मदद, सरकारी नौकरियों में 33 फीसदी आरक्षण, जीविका दीदी योजना जैसी कई योजनाओं के जरिए आधी आबादी को सबल प्रदान किया है. अब 2025 के चुनाव के दौरान रोजगार शुरू करने के नाम पर बैंक खातों में डायरेक्ट 10-10 हजार रुपये की मदद की गई है. बिहार में महिलाओं की बड़ी आबादी ऐसी है जो नीतीश कुमार की मदद से ही स्कूली शिक्षा पूरी की, नौकरी पाईं और आज उनके पक्ष में वोट करके उन्हें रिटर्न गिफ्ट देती दिखीं.
महागठबंधन के सीएम प्रत्याशी तेजस्वी यादव भी महिला वोटरों की महिमा बखूबी समझ रहे थे. इसलिए उन्होंने महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने, सरकार बनने पर मकर संक्रांति तक एक मुश्त 30000 रुपये की आर्थिक मदद समेत जीविका दीदियों के लिए कई घोषणाएं की. इन सबके बावजूद नीतीश कुमार की रैलियों में महिलाओं की भारी भीड़ दिखीं. वहीं तेजस्वी यादव अपनी जनसभाओं में महिला को तलाशते दिखे.
यहां बता दें कि 2020 के बिहार चुनाव में 70 सीटें ऐसी रहीं जहां हार जीत का अंतर 5000 या इससे कम वोटों से हार जीत का फैसला हुआ. इस हिसाब से देखें तो अगर सभी 243 सीटों पर 25 हजार ज्यादा महिलाओं ने वोट किया है तो समझा जा सकता है कि इसका फायदा किसे मिलना तय है. याद करा दें कि 14 नवंबर को बिहार चुनाव में वोटों की गिनती होंगे और उसी शाम रिजल्ट जारी होंगे.
दिनभर चला अफवाह और आरोप-प्रत्यारोप का दौर
वोटिंग के दौरान मंगलवार को भी हार-जीत की खूब तिकड़म हुई। पार्टियों के बीच अफवाह, लंगड़ीमारी, दावा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। राजद ने यह बात फैलाई कि भाजपा-लोजपा वाले जदयू को और जदयू वाले भाजपा-लोजपा को वोट नहीं दे रहे हैं। इसपर भाजपा ने जवाब दिया और कहा कि वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी, तेजस्वी यादव से अलग हुए। सब उनको मनाने में जुटे। राजद ने बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम को निपटाया। सांसद पप्पू यादव ने कोसी-सीमांचल में महागठबंधन को निपटाया।
हालांकि, राजद ने इसे नकारा। दिलचस्प कि सभी पार्टियां लोगों को अफवाहों से सावधान भी करती रहीं। सबने अपनी-अपनी जीत के दावे भी किए। यह सब सोशल मीडिया पर हुआ। पार्टियों ने कार्टून, वीडियो क्लिप, गाना, डिजिटल पोस्टर के जरिए एक-दूसरे पर हमला बोला। खुद को दूसरे से बेहतरीन बताया। राजद ने जदयू के कथित समर्थकों का वीडियो जारी किया। इसमें सब कह रहे हैं कि चूंकि भाजपा नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी, उनका हाल एकनाथ शिंदे जैसा करेगी, सो हमलोग राजद को वोट दे रहे हैं। तेजस्वी यादव ने जहां-तहां पोलिंग के स्लो होने की शिकायत की। लोगों ने अपील की- वोट देने में देरी से घबराए नहीं। बूथों पर डटे रहें। वोट देकर ही जाएं।
भाजपा : मोदी जईसन ना मिलतौ सरकार…
भाजपा की तरफ से भी एक वीडियो जारी हुआ। इसमें वोट देकर लौट रहे व वोट देने जा रहे लोग कह रहे कि उन्होंने क्यों एनडीए को वोट दिया? यह भी कि बिहार के विकास के लिए एनडीए सरकार कितनी जरूरी है? एक अन्य वीडियो में महिलाएं गीत गाकर एनडीए को वोट देने की अपील करती दिखीं। गीत के बोल थे- दीह मोदी जी के वोट मोर बहिनिया रे, मोदी जईसन ना मिलतौ सरकार …।
राजद : जुमलेबाजी नहीं, तेजस्वी सरकार चाहिए
राजद का जवाब- अब जुमलेबाजी नहीं, बिहार को तेजस्वी सरकार चाहिए। उसके एक पोस्टर में लिखा था- अब शराब नहीं, बल्कि बिहार में सरकारी नौकरी की होम डिलिवरी होगी। राजद ने एक और पोस्टर जारी किया- 20 साल से बिहार देश का सबसे पिछड़ा राज्य लगातार बना रहा। सरकार नहीं बदलेगी तो बिहार के दयनीय हालात भी नहीं बदलेंगे। बदलिए सरकार। बदलेगा बिहार।
जदयू : महागठबंधन हार रहा
राजद के वीडियो के बाद जदयू ने राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद का वीडियो जारी किया। राजद के आरोपों को खारिज किया। कहा- चूंकि महागठबंधन हार रहा, सो अफवाह फैला रहा। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि अपनी हार की बौखलाहट में राजद सफेद झूठ पर उतर आया।
कांग्रेस: क्या भूल पाएगा बिहार?
कांग्रेस ने पोस्टरों का सीरिज जारी किया। शीर्षक दिया- ‘क्या भूल पाएगा बिहार?’ तीन सवाल उछाले- रोजगार के बदले लाठी मार। गुंडाराज-भ्रष्टाचार। बेटों पर टूटती पुलिस की लाठियां। राजद का पोस्टर- भाजपा वही पार्टी है, जिसने ओबीसी आरक्षण लागू करने पर वीपी सिंह की सरकार गिरा दी। वोट देने से पहले याद रखें।
भाजपा : बेटा दस नंबरी
भाजपा ने लालू प्रसाद और तेजस्वी के लिए कहा- बाप एक नंबरी, बेटा दस नंबरी। बाप-बेटा के कारनामे गिनाए। भाजपा ने एक और वीडियो क्लिप जारी किया। कहा कि याद करो बहू-बेटियों की इज्जत का होता था जब खेल यहां; नेता, मंत्री और गुंडों में नहीं रहा था भेद यहां। खाकी पहने शेर यहां सियार थे, ये था बिहार लालू राज में।
सबने किए सरकार बनाने के दावे … जदयू ने अपने पोस्टर में कहा कि सिर्फ तीन दिन इंतजार, फिर आ रही नीतीश सरकार। भाजपा के पोस्टर में लिखा था- फिर आ रही एनडीए सरकार। राजद के पोस्टर में दावा- आ रही तेजस्वी सरकार।