कर्नाटक कांग्रेस के अंदर क्यों मचा हुआ जबर्दस्त घमासान ………….

कर्नाटक में सत्तारुढ़ कांग्रेस के अंदर जबर्दस्त घमासान मचा हुआ है. सरकार के ढाई साल पूरे हो चुके हैं और अब यहां पर मुख्यमंत्री बदलने को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है. दोनों पक्षों की ओर से लगातार अपने-अपने दावे भी किए जा रहे हैं. हलचल दिल्ली में भी बढ़ गई है. विधायक दबाव […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 26 नवंबर 2025, 07:40 AM 7 मिनट read
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कर्नाटक कांग्रेस के अंदर क्यों मचा हुआ जबर्दस्त घमासान ………….
Photo: UB India News Archive

कर्नाटक में सत्तारुढ़ कांग्रेस के अंदर जबर्दस्त घमासान मचा हुआ है. सरकार के ढाई साल पूरे हो चुके हैं और अब यहां पर मुख्यमंत्री बदलने को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है. दोनों पक्षों की ओर से लगातार अपने-अपने दावे भी किए जा रहे हैं. हलचल दिल्ली में भी बढ़ गई है. विधायक दबाव बनाने में जुटे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी इस मसले पर अपने पत्ते तक नहीं खोल रहे हैं. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी चाहते हैं कि कयासों का दौर खत्म कर दिया जाए.

बहुप्रतिक्षित सत्ता परिवर्तन को लेकर दिल्ली में कांग्रेस के विधायकों के आने-जाने का सिलसिला बना हुआ है. उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाने को लेकर दबाव बनाने के लिए पार्टी नेताओं से मिलने दिल्ली आए कांग्रेस के कुछ विधायकों ने कहा कि नेतृत्व इस मामले पर फैसला लेगा.

CM को लेकर भ्रम जल्द खत्म हो

साथ ही कुछ विधायकों का कहना है कि उन्होंने पार्टी आलाकमान से मुख्यमंत्री के मुद्दे पर जल्द से जल्द भ्रम खत्म करने का अनुरोध किया है, जबकि कुछ विधायकों का कहना है कि उनकी मांग है कि प्रस्तावित मंत्रिमंडल फेरबदल में युवाओं या नए चेहरों को मौका दिया जाए.

कर्नाटक में पिछले कई महीनों से मुख्यमंत्री के बदलाव को लेकर कयासबाजी चल रही है, लेकिन पिछले कुछ समय से यह हलचल तेज हो गई है और इसका असर दिल्ली में भी दिखने लगा है. पिछले हफ्ते 20 नवंबर को कांग्रेस सरकार के 5 साल के कार्यकाल के पहले ढाई साल पूरा होने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है. चर्चा इसलिए भी है क्योंकि साल 2023 में कांग्रेस जब राज्य की सत्ता में लौटी थी तब मुख्यमंत्री को लेकर खासा संघर्ष दिखा था.

सिद्धारमैया का आलाकमान से अनुरोध

लंबी बातचीत के बाद सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर रजामंदी हुई. हालांकि मुख्यमंत्री परिवर्तन को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच 2.5-2.5 साल के लिए सत्ता साझेदारी को लेकर एक समझौता होने का दावा किया जाता रहा है.

सिद्धारमैया की ओर से यह भी कहा जाता रहा था कि राज्य में सीएम पोस्ट की जगह खाली नहीं है. वह पूरे 5 साल के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहेंगे और भविष्य में राज्य का बजट पेश करना जारी रखेंगे.

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कल मंगलवार को पार्टी आलाकमान से अनुरोध किया कि इस भ्रम को खत्म किया जाना चाहिए. उन्होंने दोहराया कि वह मुख्यमंत्री पद पर बदलाव संबंधी मुद्दे पर पार्टी आलाकमान के फैसले को स्वीकार करेंगे. विधायकों के पार्टी नेतृत्व से मुलाकात पर उन्होंने कहा कि विधायक पार्टी नेतृत्व से मिलने और अपनी राय साझा कर सकते हैं.

यहां चर्चा करने का विषय नहींः खरगे

कयासबाजी के दौर में मल्लिकार्जुन खरगे ने कल बेंगलुरु में कहा था कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन ऐसा कोई मुद्दा नहीं है कि जिस पर सार्वजनिक तौर से चर्चा की जाए. संविधान दिवस समारोह में भाग लेने के लिए दिल्ली लौटे खरगे ने कहा, “यह यहां चर्चा करने का विषय नहीं है और वह भी सार्वजनिक रूप से. मैं 26 नवंबर को संविधान दिवस से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए यहां आया हूं. मेरे पास कार्यक्रम के लिए निमंत्रण है.”

राहुल गांधी से उनकी संभावित मुलाकात पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे ने कहा, “आप सभी जानते हैं कि पार्टी अध्यक्ष कहीं और चर्चा नहीं करते हैं. अगर मुलाकात होगी तो हम चर्चा करेंगे.” बेंगलुरु से दिल्ली रवाना होने से पहले, खरगे के साथ उपमुख्यमंत्री शिवकुमार उनकी कार में बेंगलुरु एयरपोर्ट तक गए थे.

4-5 लोगों के बीच गुप्त समझौताः शिवकुमार

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर रहे शिवकुमार ने कल मंगलवार को कहा था कि वह मुख्यमंत्री बदलने के मसले पर सार्वजनिक तौर पर कुछ भी नहीं कहना चाहते, क्योंकि यह पार्टी के अंदर चार से पांच लोगों के बीच का गुप्त समझौता है, और उन्हें अपनी अंतरात्मा पर भरोसा है.

इस बीच पार्टी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि शिवकुमार गुट के 6 विधायकों का एक ग्रुप रविवार रात पार्टी आलाकमान से मिलने दिल्ली पहुंचा था. अगले कुछ दिनों में कुछ और विधायकों के भी मिलने की उम्मीद है.

खरगे से पार्टी विधायकों की मुलाकात

पिछले हफ्ते ही करीब 10 विधायकों ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की थी. कर्नाटक से दिल्ली आए मगदी से विधायक एचसी बालकृष्ण ने बताया कि अगले मुख्यमंत्री का फैसला पार्टी आलाकमान पर निर्भर करता है, हालांकि उन्होंने भ्रम को दूर करने का भी अनुरोध किया.

उन्होंने कहा, “हम लंबे समय से बने भ्रम को दूर करने के लिए पार्टी आलाकमान से बात करने गए थे क्योंकि अंतिम फैसला जरूरी है. कर्नाटक का अगला कौन मुख्यमंत्री बनेगा, यह अहम नहीं है. मौजूदा हालात पार्टी के लिए नुकसानदेह है. आलाकमान को इसे जल्द से जल्द सुलझाना चाहिए.” उन्होंने हालांकि यह नहीं बताया कि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा या नहीं, इस मसले पर पार्टी नेतृत्व से चर्चा हुई भी या नहीं.

‘मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है’

जब शिवकुमार से पूछा गया कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दिल्ली गए हैं और राहुल गांधी से सत्ता हस्तांतरण पर बात करने वाले हैं, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। यह 5-6 लोगों के बीच का गुप्त मामला है। मैं इसे खोलकर नहीं बताऊंगा। सीएम सिद्धारमैया एक सीनियर नेता हैं और हमारी पार्टी की बड़ी संपत्ति हैं। वह 7.5 साल से सीएम हैं। उन्होंने खुद कहा है कि अगला बजट वह पेश करेंगे। मुझे बहुत खुशी है। उन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर कड़ी मेहनत की है। उन्होंने पार्टी को मजबूत बनाया है। हम सबको मिलकर 2028 और 2029 के चुनावों के लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए।’

‘अब मेरे सत्ता में आने की प्रार्थना करने से बेहतर है कि…’

शिवकुमार से जब पूछा गया कि क्या लोग उनके सीएम बनने की प्रार्थना कर रहे हैं, तो उन्होंने भावुक होकर जवाब दिया, ‘अब मेरे सत्ता में आने की प्रार्थना करने से बेहतर है कि मैं उन प्रार्थनाओं को न भूलूं, जो मेरी माताओं, युवाओं और बुजुर्गों ने कीं, जब मैं जेल गया था। उन्होंने मंदिरों में पुजारियों से मेरे लिए दुआएं मांगीं। भाजपा के दौर में जब मैं जेल से रिहा हुआ, तो लोगों ने पुलिस की धमकी के बावजूद बिना डरे मेरा स्वागत किया। कई लोगों ने मेरी रिहाई तक चप्पल नहीं पहनी। आज मैं डिप्टी सीएम और पार्टी अध्यक्ष हूं। मुश्किल वक्त में दी गईं वो दुआएं मुझे खुद पर यकीन दिलाती हैं, जो मेरे लिए बहुत खास हैं।’

‘मुझे सीएम बनाने की कोशिश के बारे में नहीं पता’

कुछ विधायकों के दिल्ली जाने और उन्हें सीएम बनाने की कोशिश पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, ‘जो लोग मंत्री बनने की इच्छा रखते हैं, वे गए हैं। मुझे सीएम बनाने की कोशिश के बारे में नहीं पता। मैंने उन्हें नहीं बुलाया, न भेजा। मैं यह नहीं पूछूंगा कि तुम क्यों गए।’ बता दें कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच पिछले लंबे समय से सबकुछ ठीक नहीं होने की खबरें आ रही हैं। शिवकुमार के कई समर्थकों का कहना है कि दोनों नेताओं को 2.5-2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री बनाने की बात कही गई थी, हालांकि सिद्धारमैया इससे इनकार करते हैं।

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