पाकिस्तान में कानून संशोधन के बाद ‘तानाशाह’ बना आसिम मुनीर!

पाकिस्तान में हाल ही में किए गए संवैधानिक संशोधनों ने सत्ता संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है. नए बदलावों के बाद सेना, खासकर मौजूदा आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर, बेहद प्रभावशाली हो गए हैं. इसके उलट न्यायपालिका की शक्तियों में स्पष्ट रूप से कटौती दिखाई देती है. इस फैसले ने कई संस्थाओं के साथ-साथ […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 29 नवंबर 2025, 10:59 AM 3 मिनट read
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पाकिस्तान में कानून संशोधन के बाद ‘तानाशाह’ बना आसिम मुनीर!
Photo: UB India News Archive

पाकिस्तान में हाल ही में किए गए संवैधानिक संशोधनों ने सत्ता संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है. नए बदलावों के बाद सेना, खासकर मौजूदा आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर, बेहद प्रभावशाली हो गए हैं. इसके उलट न्यायपालिका की शक्तियों में स्पष्ट रूप से कटौती दिखाई देती है. इस फैसले ने कई संस्थाओं के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र को भी चिंतित कर दिया है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रमुख वोल्कर टर्क ने शुक्रवार को जारी बयान में चेतावनी दी कि पाकिस्तान में जल्दबाजी में किए गए ये संशोधन न्यायपालिका की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं. उनके अनुसार, इस कदम से सेना का दखल बढ़ने और नागरिक सरकार की भूमिका कमजोर होने की आशंका मजबूत होती है, जो कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

UN ने कही ये बड़ी बात

टर्क ने कहा कि यह संशोधन बिना किसी सार्वजनिक चर्चा, कानूनी समुदाय से सलाह या व्यापक बहस के लागू कर दिया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है. उनके मुताबिक, यह बदलाव उन संस्थाओं के खिलाफ जाते हैं जो पाकिस्तान में मानवाधिकारों और कानून के शासन की रक्षा करती हैं. विशेष रूप से, न्यायाधीशों की स्वतंत्रता पर इन संशोधनों के असर को लेकर गहरी चिंता जताई गई है.

जजों की नियुक्ति और तबादले से जुड़े प्रावधानों में बदलाव

बयान में कहा गया है कि जजों की नियुक्ति और तबादले से जुड़े नए प्रावधान न्यायपालिका की संरचनात्मक स्वतंत्रता को कमजोर कर सकते हैं. इससे राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ने और कार्यपालिका के नियंत्रण में न्यायपालिका आने का खतरा है. वोल्कर टर्क ने जोर देकर कहा कि अदालतों को अपने फैसलों में किसी भी राजनीतिक दबाव से पूरी तरह मुक्त रहना चाहिए.

उन्होंने 27वें संशोधन पर विशेष आपत्ति जताते हुए कहा कि यह राष्ट्रपति और फील्ड मार्शल को आजीवन आपराधिक मुकदमों और गिरफ्तारी से सुरक्षा देता है. उनके अनुसार, यह कदम मानवाधिकार सिद्धांतों और लोकतांत्रिक नियंत्रण के ढांचे के खिलाफ है और पाकिस्तान के लोकतांत्रिक भविष्य पर दूरगामी असर डाल सकता है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने लिया बड़ा फैसला

गौरतलब है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने आसिफ अली जरदारी ने 13 नवंबर को 27वें संवैधानिक संशोधन पर हस्ताक्षर कर उसे कानून का रूप दे दिया. इस संशोधन के बाद आर्मी चीफ आसिम मुनीर की शक्ति अभूतपूर्व रूप से बढ़ गई है, जिससे वह देश के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति बनकर उभरे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पास अब प्रधानमंत्री से भी अधिक अधिकार हैं.

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