नेपाल में आई भीषण बाढ़ से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 903 हो गया है। नेपाली अधिकारियों ने यह ताजा आंकड़ा जारी किया हैऔर ये आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. लेकिन इस बाढ़ के विनाशकारी पंजों में अब भी कई जिंदगियां फंसी हैं, जिसे बचाने की कोशिश जारी है. अब क्या है नेपाल की स्थिति और कैसे चल रहा है जिंदगी बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन?
नेपाल में कुदरत ने ऐसा कहर परपाया कि हिमालय की वादियों को मलबे और मौत के एक अंतहीन कब्रिस्तान में बदल दिया. बाढ़ की विनाशलीला को 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन तबाही का सबसे डरावना मंजर अब भी जमीन के नीचे दफन है. रेस्क्यू की टीमें दिन-रात त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की दीवार को चीरकर जिंदगी बचाने की मशक्कत कर रही है. और अब तक सफलता के नाम पर सिर्फ सुरंग के अंदर एक पाइप डाला जा सका है.
100 घंटों से ज्यादा वक्त बीतने के बाद इस सुरंग में कैद जिंदगियों को सिर्फ सांसें मिल सकी हैं. लेकिन ये सांसें सिर्फ उधार की हैं. उफनती नदी और मूसलाधार बारिश हर पल खतरा बढ़ने का संकेत दे रही है. जिसके सच होने से पहले बचाव की कोशिश जारी है.
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट टनल में अब भी लोग जिंदा
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी का मानना है कि, कीचड़ से भरी त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट टनल में अब भी लोग जिंदा हो सकते हैं. और इस उम्मीद को मजबूत किया है, ज़िंदा लौटने वाले मजदूरों ने. इसलिए त्रिशूली सुरंग के ऊपरी हिस्से में 4 सुराख किए जा चुके हैं. इन्हीं सुराखों से अंदर पाइप डालकर ऑक्सीजन पहुंचाई गई है. हालात का जायजा लेने के लिए हाई-टेक कैमरे भेजे गए हैं. और अब अगला कदम खुदाई का है, ताकि रेस्क्यू टीम के कमांडोज सीधे सुरंग में दाखिल हो सकें.
लेकिन ये ऑपरेशन इतना आसान भी नहीं है. क्योंकि रातभर हुई बारिश ने नदी के जलस्तर को अचानक बढ़ा दिया. जिससे ड्रिलिंग वाली जगह पर पानी भर गया और अब पल-पल बदलता मौसम रेस्क्यू टीमों के लिए भी संकट बढ़ा रहा है.
मलबे से निकल रहे शवों की पहचान मुश्किल
ये नेपाल की भयावह और दर्दनाक कहानी है. तबाही इतनी भयंकर हो चुकी है कि, अब इसे और सह पाना आसान नहीं होगा. वहीं एक दर्द ये भी है कि, मलबे से निकल रहे शवों की पहचान मुश्किल हो चुकी है. शव इतने खराब हो चुके हैं कि, उनका DNA सैंपल लेकर तुरंत दफन किया जा रहा है. यानी नेपाल में विनाश नहीं, कुदरत ने महाविनाश की झलक दिखाई है. जिसे प्रमाणित करती हैं सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें, जिसमें हर तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा फैला है और इस मलबे के नीचे कई जिंदगियां दफन हैं.
त्रासदी के बीच दिखे कई चमत्कार
इस त्रासदी क बीच कुछ ऐसे चमत्कार भी हुए हैं, जिस पर विश्वास करना मुश्किल है. जिसमें एक 4 साल की बच्ची दो दिन बाद मौत के मुंह से बाहर आई है. उफानती लहरों के बीच अपने ही घर में फंसा परिवार सुरक्षित बच जाता है. विनाशकारी बाढ़ एक घर की बुनियाद भी नहीं हिला पाती है और एक बेजुबान एक इंसान को लहरों में फंसने से बचा लेता है.
टनल में फंसी 100 जिंदगियों को बचाने की आस
इन्हीं चमत्कारों की उम्मीद ने टनल में फंसी 100 जिंदगियों के लिए भी आस जगाई है. और इस आस को सच साबित करने में जुटे हैं, रेस्क्यू फाइटर. जो जिंदगी के रक्षक बनकर नेपाल में उतरे हैं.
अज्ञात शवों का सामूहिक दफन शुरू
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद अज्ञात शवों का सामूहिक दफन शुरू कर दिया गया है। चितवन के देवघाट जंगल में प्रशासन ने सैकड़ों कब्रें खोदी हैं। यहां उन शवों को दफनाया जा रहा है, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है और जो ज्यादा समय बीतने के कारण खराब होने लगे हैं। पिछले दो दिनों में 196 शव दफनाए गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, कई शव इतनी खराब हालत में मिले हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल है। इसलिए हर शव के साथ पहचान नंबर और जरूरी रिकॉर्ड रखा जा रहा है, ताकि आगे DNA जांच के जरिए उनकी पहचान की जा सके। इस बीच 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं और उनके परिवार अपनों की तलाश में जुटे हैं।
26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है। 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
वहीं, इस त्रासदी से पहले चीन से ग्लेशियरों के खतरे की जानकारी साझा करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 27 मई को नेपाल और चीन के अधिकारियों की बैठक हुई थी। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने ग्लेशियरों में शुरुआती हलचल और जलस्तर की जानकारी पहले से देने की मांग की थी, लेकिन उन्हें चीन से उतनी जानकारी नहीं मिली, जितनी वे चाहते थे।
नेपाल-चीन का अहम व्यापारिक रास्ता बाढ़ में तबाह
बाढ़ ने नेपाल-चीन के अहम व्यापारिक रास्ते रासुवागढ़ी-केरुंग बॉर्डर को भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ में सीमा चौकी, नेपाल-चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज और तिमुरे का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।
यह रास्ता नेपाल के लिए इसलिए अहम है क्योंकि चीन से आने वाला बड़ी मात्रा में सामान इसी रूट से देश में पहुंचता है। रास्ता बंद होने से सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है और कारोबारियों की मुश्किल बढ़ गई है।
बाढ़ से बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के बाद मंत्रालय ने बिजली बहाल करने के साथ वैकल्पिक ऊर्जा की व्यवस्था पर भी काम शुरू किया है। मंत्रालय के मुताबिक, नुवाकोट के करीब 90% प्रभावित इलाकों में बिजली बहाल हो चुकी है। रसुवा में भी बिजली बहाली का काम तेजी से चल रहा है।
बिजली और रोशनी की समस्या से निपटने के लिए मंत्रालय ने 2 किलोवाट के संस्थागत सोलर सिस्टम और 20 वाट के 500 सोलर सेट की व्यवस्था शुरू की थी। इन्हें दूसरे दिन ही वन-डोर सिस्टम के जरिए प्रभावित इलाकों में भेज दिया गया था।
तिब्बत बॉर्डर पर बनी झील का पानी निकला, बाढ़ का खतरा टला नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बनी बैरियर झील का पानी प्राकृतिक बहाव से निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, झील में जमा पानी लगभग पूरी तरह बाहर निकल चुका है। इससे डाउनस्ट्रीम इलाकों में झील के फटने से अचानक बाढ़ आने का खतरा फिलहाल टल गया है। यह झील पिछले हफ्ते ग्लेशियर टूटने के बाद चोचेन खोला और चीन की पुरेपु त्सांगपो नदी के संगम के पास बनी थी। इसके पीछे करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था। दला लामा ने बाढ़ पीड़ितों के लिए की प्रार्थना तिब्बती आध्यात्मिक गुरु 14वें दलाई लामा ने नेपाल और तिब्बत में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के पीड़ितों के लिए विशेष प्रार्थना की। लेह के शेवात्सेल टीचिंग ग्राउंड में उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वालों, लापता लोगों और प्रभावित परिवारों के लिए प्रार्थना की। दलाई लामा की मौजूदगी में लोगों ने पीड़ितों की स्मृति और प्रभावित परिवारों के कल्याण के लिए अवलोकितेश्वर मंत्र का जाप किया। इसे छह अक्षरों वाला मंत्र भी कहा जाता है।दलाई लामा ने इससे पहले 27 अगस्त को भी आपदा पर दुख जताया था। उन्होंने मृतकों के परिजनों और बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की थी। दूसरी बाढ़ के खतरे ने बढ़ाई बचाव अभियान के लिए चुनौती नेपाली अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भोटेकोशी नदी में मलबे के जमाव के कारण एक झील बन गई है। इस प्राकृतिक अवरोध के टूटने पर दूसरी बार बाढ़ आने का खतरा पैदा हो सकता है। चीन ने भी तिब्बत में बनी एक ऐसी ही प्राकृतिक झील को लेकर खतरे की चेतावनी दी है। अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में अतिरिक्त पानी इस पहले से बाधित नदी तंत्र में पहुंच सकता है। दोबारा बाढ़ की आशंका के चलते बचाव अभियान के सामने भी बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।









