नक्सलियों का काम तमाम करने के बाद कौन से अगले मिशन में जुटे अमित शाह ……….

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ वो काम किया है जो अब तक की कई सरकारें नहीं कर पाई थीं. उन्होंने नक्सलवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च, 2026 तक की डेडलाइन तय की थी. सुरक्षाबल और अमित शाह ने इसमें कामयाबी भी हासिल कर ली है. इस बड़ी समस्या का इलाज […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 25 दिसंबर 2025, 07:42 AM 5 मिनट read
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नक्सलियों का काम तमाम करने के बाद कौन से अगले मिशन में जुटे अमित शाह ……….
Photo: UB India News Archive

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ वो काम किया है जो अब तक की कई सरकारें नहीं कर पाई थीं. उन्होंने नक्सलवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च, 2026 तक की डेडलाइन तय की थी. सुरक्षाबल और अमित शाह ने इसमें कामयाबी भी हासिल कर ली है. इस बड़ी समस्या का इलाज करने के बाद शाह अगले मिशन में जुट गए हैं. गृह मंत्री का अगला टारगेट देश को ड्रग्स से निजात दिलाना है.

हरियाणा के पंचकूला में बुधवार को एक कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में राज्यों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है. शाह ऐसा कह रहे हैं तो इसकी वजह भी है. हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों के एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के प्रमुखों से सिंथेटिक ड्रग लैब की पहचान करके उन्हें नष्ट करने के लिए कहा गया. साथ ही उन्हें हर तीन महीने में ज़ब्त किए गए नशीले पदार्थों को ठिकाने लगाने के लिए एक साइंटिफिक सिस्टम बनाने का निर्देश दिया गया.

क्या है डेडलाइन?

शाह कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक एक महान और विकसित भारत की कल्पना की है और इस विज़न को पूरा करने के लिए युवाओं को ड्रग्स से बचाना बहुत ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि युवा किसी भी देश की नींव होते हैं और अगर आने वाली पीढ़ियां खोखली हो गईं, तो देश अपना रास्ता भटक जाएगा.

अमित शाह ने 2029 तक ड्रग कार्टेल को खत्म करने का संकल्प लिया है. उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि ड्रग्स के खिलाफ उनकी लड़ाई पिछले चार सालों से बहुत अच्छी प्लानिंग के साथ चल रही है. यह जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर और देश के स्तर तक चल रहा है. यह योजना बहुत सफल रही है.

अधिकारी तैयार करेंगे रोडमैप

टॉप सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस अधिकारियों के साथ एक मीटिंग में अमित शाह ने ड्रग सप्लाई चेन के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने की बात कही थी, जिसके बाद पता चला है कि सरकार एक प्लान पर काम कर रही है. शाह ने उनसे इस खतरे से निपटने के लिए एक रोडमैप बनाने को कहा. इस साल की शुरुआत में नारको-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 7वीं टॉप-लेवल मीटिंग में अमित शाह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में एक ग्राम भी ड्रग्स नहीं आने दी जाएगी.

क्या-क्या एक्शन हुआ?

मोदी सरकार न सिर्फ छोटे ड्रग डीलरों बल्कि बड़े ड्रग कार्टेल के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई कर रही है. सरकार ड्रग्स सप्लाई चेन के खिलाफ कड़ा रुख अपना रही है. डिमांड कम करने के लिए वो रणनीतिक और नुकसान कम करने के लिए मानवीय तरीका अपना रही है.

केंद्र सरकार ने पिछले 10 सालों में 22,000 करोड़ रुपये की 5.43 लाख किलोग्राम ड्रग्स ज़ब्त की है. अमित शाह ने कहा कि पिछले पांच सालों में हमने स्ट्रक्चरल, इंस्टीट्यूशनल और इन्फॉर्मेशनल सुधारों के जरिए यह लड़ाई लड़ी. इसका नतीजा बहुत उत्साहजनक है. 2004 और 2013 के बीच ज़ब्त की गई ड्रग्स की मात्रा 1.52 लाख किलोग्राम थी, जो 2014 से 2024 के बीच बढ़कर 5.43 लाख किलोग्राम हो गई.

ड्रग्स की कीमत 2004 और 2013 के बीच 5,933 करोड़ रुपये से बढ़कर 2014 और 2024 के बीच 22,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गई है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल देश भर में एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों ने 1,483 किलोग्राम कोकीन ज़ब्त की, जो 2020 में ज़ब्त की गई मात्रा से लगभग 78 गुना ज़्यादा और 2023 की तुलना में लगभग पांच गुना ज़्यादा थी.

2004 से 2014 के बीच असल में नष्ट की गई ड्रग्स की कीमत 8,150 करोड़ रुपये थी, जबकि 2014 से 2025 के दौरान यह बढ़कर 71,600 करोड़ हो गई. 2020 में ड्रग्स की खेती के लिए इस्तेमाल की जाने वाली 10,700 एकड़ ज़मीन नष्ट की गई. 2021 में 11,000 एकड़; 2022 में 13,000 एकड़ और 2023 में 31,761 एकड़.

हर तीन महीने में रिव्यू

ANTF के प्रमुखों से एक एंटी-नारकोटिक्स एक्शन चेकलिस्ट तैयार करने को भी कहा गया, जिसमें जांच की डिटेल्स और मामलों की पहचान के लिए ज़िला पुलिस द्वारा उठाए गए कदम शामिल होने चाहिए. इस चेकलिस्ट का रिव्यू हर तीन महीने में किया जाना ज़रूरी है, जिससे यह पक्का होगा कि इसका असर ज़मीनी स्तर तक पहुंचे. नारकोटिक्स पर फोकस करने वाली फोरेंसिक लैब बनाई जा रही हैं.

राज्य स्तर पर फाइनेंशियल लेन-देन का पता लगाने, हवाला ट्रांजैक्शन पर नजर रखने, क्रिप्टोकरेंसी डीलिंग को ट्रैक करने और साइबर सर्विलांस करने के लिए स्पेशल स्क्वॉड बनाए जा रहे हैं. गृह मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पूरा ड्रग्स का धंधा अब नार्को-टेरर से जुड़ा हुआ है और ड्रग्स के व्यापार से कमाया गया पैसा देश की सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरा बन गया है. इस बात को ध्यान में रखते हुए सभी एजेंसियों का मकसद सिर्फ ड्रग्स इस्तेमाल करने वालों को पकड़ना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करना होना चाहिए.

देशभर में चल रहा अभियान

नशा मुक्त भारत अभियान अभी देश भर के 372 जिलों में चल रहा है, जिसमें 10 करोड़ लोग और 3 लाख शिक्षण संस्थान शामिल हैं. इसके अलावा पूरे देश की यूनिवर्सिटी और संस्थानों में ‘मिशन ड्रग-फ्री कैंपस’ अभियान चल रहा है, साथ ही डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी पर ट्रेनिंग को बेहतर बनाने और हेल्पलाइन के इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिशें भी की जा रही हैं.

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