अफगानिस्तान में लंबे सूखे के बाद हुई इस सीजन की पहली भारी बारिश और बर्फबारी अब मुसीबत बन गई है। भारी बारिश के चलते देश के कई हिस्सों में आई अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचाई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 17 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 11 अन्य घायल हुए हैं। प्राधिकरण के प्रवक्ता मोहम्मद यूसुफ हम्माद ने बताया कि मध्य, उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ की चपेट में आने से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में मवेशी भी मारे गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 1,800 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जिससे पहले से ही संघर्ष कर रहे ग्रामीण और शहरी इलाकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दशकों के संघर्ष, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण अफगानिस्तान हमेशा ऐसी आपदाओं की जद में रहता है।
कितनी तबाही मचा गई बारिश
प्राधिकरण के प्रवक्ता हाफिज मोहम्मद यूसुफ हम्माद के अनुसार, कपिसा, परवान, दयकुंडी, उरुज़गान, कंधार, हेलमंद, बदघीस, फरयाब, बदख्शां, हेरात और फराह प्रांत इस आपदा से प्रभावित हुए हैं. बाढ़ से बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा है. लगभग 1,859 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि करीब 209 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बह गईं. इसके अलावा, लगभग 1,200 पशुओं की मौत हो गई और 13,941 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न या नष्ट हो गई.
जिन्होंने खोया घर उन्हें कितनी सहायता?
हम्माद ने बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दलों को भेज दिया गया है. पीड़ितों को आपात सहायता दी जा रही है और नुकसान का आकलन जारी है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओचा) ने मंगलवार को अफगानिस्तान के लिए वर्ष 2026 की 1.71 अरब अमेरिकी डॉलर की मानवीय जरूरतों और प्रतिक्रिया योजना शुरू की. ओचा के अनुसार, 2026 में करीब 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी, जो 2025 की तुलना में चार प्रतिशत कम है. हालांकि, 1.74 करोड़ लोगों के गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने का अनुमान है, जिनमें 47 लाख लोग आपात स्थिति (आईपीसी फेज-4) में होंगे.
ओचा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मानवीय साझेदार 2026 में जरूरतमंदों में से लगभग 80 प्रतिशत, यानी 1.75 करोड़ लोगों को सहायता प्रदान करने को प्राथमिकता देंगे. इस सहायता में भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण, स्वच्छ पानी, स्वच्छता और नकद सहायता शामिल होगी.
आने वाले समय में कितना खतरा?
ओचा के अनुसार, अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है. जलवायु परिवर्तन से जुड़ा सूखा, बार-बार आने वाली बाढ़ और भूकंप, बीमारियों का प्रकोप, महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षा जोखिम तथा बड़े पैमाने पर लौटने वाले शरणार्थियों के कारण हालात और चुनौतीपूर्ण हो गए हैं.
साल 2025 में ही ईरान और पाकिस्तान से 26.1 लाख से अधिक अफगान नागरिकों की वापसी हुई, जिससे स्थानीय समुदायों, बुनियादी सेवाओं और आजीविका पर भारी दबाव पड़ा है.
उन्होंने जानकारी दी कि बाढ़ प्रभावित जिलों में मदद पहुंचाई जा रही है. यहां पर काफी मवेशी भी मारे गए हैं. उन्होंने बताया कि करीब 1,800 परिवार इससे प्रभावित हुए हैं. इससे पहले कमजोर शहरी और ग्रामीण समुदायों की हालत खराब है. एजेंसी ने सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों के हालात को जाना है. इस दौरान लोगों की जरूरतों का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण जारी है.
स्वच्छता और नकद सहायता शामिल
हम्माद के अनुसार, प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दलों को भेजा है. पीड़ितों को आपात सहायता दी जा रही है. नुकसान आकलन हो रहा है. इस बीच संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओचा) ने मंगलवार को अफगानिस्तान के लिए वर्ष 2026 की 1.71 अरब अमेरिकी डॉलर की मानवीय सहायता योजना को शुरू की है. ओचा के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के मानवीय साझेदार 2026 में जरूरतमंदों से करीब 80 प्रतिशत, यानी 1.75 करोड़ लोगों को सहायता प्रदान करने को लेकर प्राथमिकता देंगे. इस मदद में भोजन,आश्रय, स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण, स्वच्छ पानी, स्वच्छता और नकद सहायता को शामिल किया है.








