अफगानिस्तान में बाढ़ ने मचाया कोहरा……..

अफगानिस्तान में लंबे सूखे के बाद हुई इस सीजन की पहली भारी बारिश और बर्फबारी अब मुसीबत बन गई है। भारी बारिश के चलते देश के कई हिस्सों में आई अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचाई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 17 […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 2 जनवरी 2026, 08:19 AM 4 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
अफगानिस्तान में बाढ़ ने मचाया कोहरा……..
Photo: UB India News Archive

अफगानिस्तान में लंबे सूखे के बाद हुई इस सीजन की पहली भारी बारिश और बर्फबारी अब मुसीबत बन गई है। भारी बारिश के चलते देश के कई हिस्सों में आई अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचाई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 17 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 11 अन्य घायल हुए हैं। प्राधिकरण के प्रवक्ता मोहम्मद यूसुफ हम्माद ने बताया कि मध्य, उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ की चपेट में आने से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में मवेशी भी मारे गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 1,800 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जिससे पहले से ही संघर्ष कर रहे ग्रामीण और शहरी इलाकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दशकों के संघर्ष, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण अफगानिस्तान हमेशा ऐसी आपदाओं की जद में रहता है।

कितनी तबाही मचा गई बारिश

प्राधिकरण के प्रवक्ता हाफिज मोहम्मद यूसुफ हम्माद के अनुसार, कपिसा, परवान, दयकुंडी, उरुज़गान, कंधार, हेलमंद, बदघीस, फरयाब, बदख्शां, हेरात और फराह प्रांत इस आपदा से प्रभावित हुए हैं. बाढ़ से बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा है. लगभग 1,859 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि करीब 209 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बह गईं. इसके अलावा, लगभग 1,200 पशुओं की मौत हो गई और 13,941 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न या नष्ट हो गई.

जिन्होंने खोया घर उन्हें कितनी सहायता?

हम्माद ने बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दलों को भेज दिया गया है. पीड़ितों को आपात सहायता दी जा रही है और नुकसान का आकलन जारी है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओचा) ने मंगलवार को अफगानिस्तान के लिए वर्ष 2026 की 1.71 अरब अमेरिकी डॉलर की मानवीय जरूरतों और प्रतिक्रिया योजना शुरू की. ओचा के अनुसार, 2026 में करीब 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी, जो 2025 की तुलना में चार प्रतिशत कम है. हालांकि, 1.74 करोड़ लोगों के गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने का अनुमान है, जिनमें 47 लाख लोग आपात स्थिति (आईपीसी फेज-4) में होंगे.

ओचा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मानवीय साझेदार 2026 में जरूरतमंदों में से लगभग 80 प्रतिशत, यानी 1.75 करोड़ लोगों को सहायता प्रदान करने को प्राथमिकता देंगे. इस सहायता में भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण, स्वच्छ पानी, स्वच्छता और नकद सहायता शामिल होगी.

आने वाले समय में कितना खतरा?

ओचा के अनुसार, अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है. जलवायु परिवर्तन से जुड़ा सूखा, बार-बार आने वाली बाढ़ और भूकंप, बीमारियों का प्रकोप, महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षा जोखिम तथा बड़े पैमाने पर लौटने वाले शरणार्थियों के कारण हालात और चुनौतीपूर्ण हो गए हैं.

साल 2025 में ही ईरान और पाकिस्तान से 26.1 लाख से अधिक अफगान नागरिकों की वापसी हुई, जिससे स्थानीय समुदायों, बुनियादी सेवाओं और आजीविका पर भारी दबाव पड़ा है.

उन्होंने जानकारी दी कि बाढ़ प्रभावित जिलों में मदद पहुंचाई जा रही है. यहां पर काफी मवेशी भी मारे गए हैं. उन्होंने बताया कि करीब 1,800 परिवार इससे प्रभावित हुए हैं. इससे पहले कमजोर शहरी और ग्रामीण समुदायों की हालत खराब है. एजेंसी ने सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों के हालात को जाना है. इस दौरान लोगों की जरूरतों का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण जारी है.

स्वच्छता और नकद सहायता शामिल

हम्माद के अनुसार, प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दलों को भेजा है. पीड़ितों को आपात सहायता दी जा रही है. नुकसान आकलन हो रहा है. इस बीच संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओचा) ने मंगलवार को अफगानिस्तान के लिए वर्ष 2026 की 1.71 अरब अमेरिकी डॉलर की मानवीय सहायता योजना को शुरू की है. ओचा के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के मानवीय साझेदार 2026 में जरूरतमंदों से करीब 80 प्रतिशत, यानी 1.75 करोड़ लोगों को सहायता प्रदान करने को लेकर प्राथमिकता देंगे. इस मदद में भोजन,आश्रय, स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण, स्वच्छ पानी, स्वच्छता और नकद सहायता को शामिल  किया है.

 

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰