भारत की आजादी बहुत बड़ी कीमत चुकाकर हासिल हुई है………………

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने कहा कि भारत की आजादी बहुत बड़ी कीमत चुकाकर हासिल हुई है. उन्होंने कहा कि पीढ़ियों तक भारतीयों ने अपमान, विनाश और भारी नुकसान सहा तब जाकर देश स्वतंत्र हुआ. डोभाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास से ताकत लें, उससे सीखें और अपने मूल्यों, अधिकारों […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 10 जनवरी 2026, 08:42 AM 7 मिनट read
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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने कहा कि भारत की आजादी बहुत बड़ी कीमत चुकाकर हासिल हुई है. उन्होंने कहा कि पीढ़ियों तक भारतीयों ने अपमान, विनाश और भारी नुकसान सहा तब जाकर देश स्वतंत्र हुआ. डोभाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास से ताकत लें, उससे सीखें और अपने मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक मज़बूत और महान भारत के निर्माण में जुट जाएं. एनएसए ने आगे कहा कि आज के युवाओं में वो आग होनी चाहिए. अजित डोवाल भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आजाद भारत जितना आजाद आज दिखता है, वह हमेशा ऐसा नहीं था. इसके पीछे हमारे पूर्वजों के असाधारण बलिदान हैं. उन्होंने कहा कि हमारे पुरखों ने भयंकर अपमान झेला, असहायता के दौर देखे और कई लोगों ने फांसी तक का सामना किया. अजित डोभाल ने कहा कि हमारे मंदिरों को लूटा गया और हम मूकदर्शक बन देखते रहे.
अजित डोभाल ने कहा, ‘हमारे गांव जलाए गए, हमारी सभ्यता को नष्ट किया गया. हमारे मंदिर लूटे गए और हम मूकदर्शक बनकर देखते रहे. यह इतिहास आज के हर युवा के सामने एक चुनौती रखता है. हर युवा के भीतर इस चुनौती से निपटने की आग होनी चाहिए.’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘बदला’ शब्द भले ही आदर्श न लगे, लेकिन बदला अपने आप में एक शक्तिशाली भावना है. हमें उनका बदला लेना होगा. उनके अनुसार, इतिहास से मिला यह दर्द हमें आगे बढ़ने और देश को फिर से उसके गौरवशाली स्थान पर ले जाने की प्रेरणा दे सकता है. NSA ने स्पष्ट किया कि बदले का अर्थ हिंसा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय शक्ति के निर्माण से है. उन्होंने कहा, ‘हमें अपने इतिहास का बदला लेना है, यानी इस देश को फिर से वहां ले जाना है, जहां हम अपने अधिकारों, अपने विचारों और अपने विश्वासों के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें.’

उन्होंने कहा, ‘हम साइकोपैथ (मनोरोगी) नहीं हैं, जिन्हें दुश्मन के शव या कटे हुए अंग देखकर संतोष या सुकून मिले। लड़ाइयां इसके लिए नहीं लड़ी जाती। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी देश का मनोबल तोड़ने के लिए लड़े जाते हैं, ताकि वह हमारी शर्तों पर आत्मसमर्पण करें और हम अपने लक्ष्य हासिल कर सकें। अजीत डोभाल ने शनिवार को नई दिल्ली में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के उद्घाटन समारोह के दौरान ये बाते कहीं। उन्होंने युवाओं से कहा कि आप अपनी इच्छाशक्ति बढ़ा सकते हैं। वही इच्छाशक्ति राष्ट्रीय शक्ति बन जाती है।

अजित डोभाल ने क्‍या चेतावनी दी?

अज‍ित डोभाल ने भारत की प्राचीन सभ्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत विकसित और शांतिप्रिय सभ्यता थी. उन्होंने कहा कि भारत ने कभी दूसरों के मंदिर नहीं तोड़े, न ही किसी देश को लूटा और न ही अन्य देशों पर आक्रमण किया, जबकि उस समय दुनिया के कई हिस्से बहुत पिछड़े हुए थे. इसके बावजूद भारत को भारी नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि हमने समय रहते अपनी सुरक्षा से जुड़े खतरों को नहीं समझा. उन्होंने कहा कि इतिहास ने हमें कड़ा सबक सिखाया है कि सुरक्षा के प्रति उदासीनता कितनी घातक हो सकती है. डोभाल ने सवाल उठाया कि क्या हमने उस सबक से कुछ सीखा है और क्या आने वाली पीढ़ियां उसे याद रखेंगी. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर भविष्य की पीढ़ियां उस सबक को भूल गईं, तो यह इस देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी.’

अजीत डोभाल की स्पीच की 5 बड़ी बातें…

  • दुनिया में हो रहे सभी युद्ध और संघर्षों को देखें तो साफ है कि कुछ देश दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना चाहते हैं। इसके लिए अपनी ताकत का प्रयोग कर रहे हैं। अगर कोई देश इतना शक्तिशाली है कि कोई उसका विरोध न कर सके तो वह हमेशा स्वतंत्र रहेगा। लेकिन अगर संसाधन और हथियार हों, पर मनोबल न हो तो सब कुछ बेकार हो जाता है।
  • मनोबल बनाए रखने के लिए लीडरशिप जरूरी होती है। आज हम बहुत भाग्यशाली हैं कि हमारे देश में ऐसा नेतृत्व है। एक ऐसा लीडर जिसने 10 सालों में देश को कहां से कहां पहुंचा दिया।
  • आज का स्वतंत्र भारत हमेशा से उतना स्वतंत्र नहीं था। इसके लिए हमारे पूर्वजों ने बड़े बलिदान दिए। अपमान झेला और बेबसी के दौर से गुजरे। कई लोगों को फांसी हुई। हमारे गांव जलाए गए। हमारी सभ्यता को नुकसान पहुंचाया गया।
  • यह इतिहास हमें एक चुनौती देता है कि आज भारत के हर युवा के अंदर एक आग होनी चाहिए। ‘बदला’ शब्द शायद बहुत अच्छा न लगे, लेकिन बदला खुद एक ताकतवर एहसास है। हमें अपने इतिहास का बदला लेना है। हमें इस देश को उस मुकाम पर वापस ले जाना है, जहां हम अपने अधिकारों, अपने विचारों और अपने विश्वास के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें।
  • हमारी सभ्यता बहुत विकसित थी। हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े। हम कहीं लूटने नहीं गए। हमने किसी दूसरे देश या लोगों पर हमला नहीं किया, लेकिन हम अपनी सुरक्षा और खुद को लेकर आने वाले खतरों को समझने में नाकाम रहे।

डोभाल ने युवाओं से अपील की कि वे इतिहास को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उससे प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं. उन्होंने कहा कि एक विकसित और सुरक्षित भारत के लिए जागरूक, जिम्मेदार और आत्मविश्वासी युवाओं की भूमिका सबसे अहम है. उनके अनुसार, आज का युवा अगर अपने अतीत को समझेगा, तभी वह भविष्य को बेहतर ढंग से गढ़ सकेगा. गौरतलब है कि ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2.0’ की शुरुआत शनिवार से हो गई है और यह कार्यक्रम 12 जनवरी तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में चलेगा. इस मंच का उद्देश्य देशभर के युवाओं को एक साझा मंच पर लाकर उन्हें राष्ट्र निर्माण, नेतृत्व और विकास से जुड़े मुद्दों पर संवाद का अवसर देना है. इससे पहले ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ का पहला संस्करण जनवरी 2025 में भी भारत मंडपम में आयोजित किया गया था. आयोजकों के अनुसार, यह पहल युवाओं को नीतिगत सोच, नवाचार और राष्ट्रीय विकास की प्रक्रिया से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

12 जनवरी को 3 हजार युवाओं से संवाद करेंगे PM मोदी

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के मुताबिक, पीएम नरेंद्र मोदी 12 जनवरी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में देश और विदेश से आए 3,000 से अधिक युवाओं से संवाद करेंगे। स्वामी विवेकानंद की जयंती पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री भारत मंडपम में आयोजित डायलॉग 2026 के समापन सत्र में हिस्सा लेंगे। डायलॉग में चुने हुए प्रतिभागी प्रधानमंत्री के सामने 10 अलग-अलग विषयों पर अपनी अंतिम प्रस्तुतियां देंगे। वे युवा नजरिए और देश के लिए काम आने वाले विचार साझा करेंगे।

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