AI Impact Summit 2026 :भारत के विजन पर 88 देशों-संगठनों की मुहर, ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ पर वैश्विक सहमति

AI Impact Summit 2026 के समापन पर जारी हुआ ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन‘ मानवता के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है. भारत ने एक बार फिर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को दुनिया के सामने रखते हुए यह साफ कर दिया कि टेक्नोलॉजी तभी सफल है, जब उसका लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे. इस समिट में […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 21 फरवरी 2026, 12:07 PM 11 मिनट read
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AI Impact Summit 2026 :भारत के विजन पर 88 देशों-संगठनों की मुहर, ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ पर वैश्विक सहमति
Photo: UB India News Archive
AI Impact Summit 2026 के समापन पर जारी हुआ ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन‘ मानवता के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है. भारत ने एक बार फिर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को दुनिया के सामने रखते हुए यह साफ कर दिया कि टेक्नोलॉजी तभी सफल है, जब उसका लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे. इस समिट में दुनिया के ताकतवर देशों ने एक सुर में माना कि AI का विकास किसी एक देश की जागीर नहीं होना चाहिए. इसे लोकतांत्रिक तरीके से सभी के लिए सुलभ बनाना होगा. इस ऐतिहासिक घोषणापत्र में सात चक्रों (Pillars) पर फोकस किया गया है, जो एजुकेशन से लेकर इकोनॉमी तक हर सेक्टर में क्रांति लाने का दम रखते हैं. समिट में हिस्सा लेने वाले देशों ने यह स्वीकार किया कि हम आज तकनीकी विकास के उस मोड़ पर खड़े हैं, जहां हमारे फैसले अगली पीढ़ी का भविष्य तय करेंगे. भारत ने इस मंच से दुनिया को सिखाया कि AI का इस्तेमाल केवल बिजनेस के लिए नहीं, बल्कि सोशल गुड और आर्थिक समानता के लिए होना चाहिए. यह समिट इसलिए भी खास रही क्योंकि इसमें न केवल अमीर देशों, बल्कि विकासशील देशों की जरूरतों को भी केंद्र में रखा गया.
AI के सात चक्र क्या हैं और ये कैसे बदलेंगे हमारी जिंदगी?
समिट के दौरान सात प्रमुख स्तंभों या ‘सात चक्रों’ पर विस्तृत चर्चा हुई.
  1. पहला चक्र है ह्यूमन कैपिटल का विकास, जिसका मतलब है कि लोगों को AI के दौर के लिए तैयार करना.
  2. दूसरा चक्र सोशल एम्पावरमेंट के लिए एक्सेस को बढ़ाना है, ताकि गरीब से गरीब व्यक्ति भी इस तकनीक का लाभ ले सके.
  3. तीसरा चक्र AI सिस्टम की विश्वसनीयता (Trustworthiness) पर जोर देता है.
  4. चौथा चक्र एनर्जी एफिशिएंसी से जुड़ा है, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे.
  5. पांचवां चक्र साइंस में AI के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है.
  6. छठा चक्र संसाधनों का लोकतंत्रीकरण (Democratizing Resources) है.
  7. सातवां चक्र आर्थिक कास और सामाजिक भलाई के लिए AI का उपयोग करना है.
ये सातों चक्र मिलकर एक ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण करेंगे, जहां मशीनें इंसानों की मददगार बनेंगी, न कि उनके लिए खतरा.

AI Impact Summit 2026: डिक्लेरेशन का समर्थन करने वाले देश और संगठन

क्र.सं. देश / संगठन क्र.सं. देश / संगठन
1 अल्बानिया 24 फिनलैंड
2 आर्मेनिया 25 फ्रांस
3 ऑस्ट्रेलिया 26 गाम्बिया
4 ऑस्ट्रिया 27 जर्मनी
5 बेल्जियम 28 ग्रीस
6 भूटान 29 गुयाना
7 बोलिविया 30 हंगरी
8 बोत्सवाना 31 आइसलैंड
9 ब्राजील 32 भारत
10 बुल्गारिया 33 इंडोनेशिया
11 कंबोडिया 34 ईरान
12 कनाडा 35 आयरलैंड
13 चिली 36 इजरायल
14 चीन 37 इटली
15 क्रोएशिया 38 जापान
16 क्यूबा 39 कजाकिस्तान
17 साइप्रस 40 केन्या
18 चेक रिपब्लिक 41 किर्गिस्तान
19 डेनमार्क 42 लातविया
20 मिस्र 43 लिकटेंस्टीन
21 एस्टोनिया 44 लिथुआनिया
22 इथियोपिया 45 लक्जमबर्ग
23 फिजी 46 मालदीव
47 माल्टा 70 सिंगापुर
48 मॉरीशस 71 स्लोवाकिया
49 मेक्सिको 72 स्लोवेनिया
50 मोरक्को 73 दक्षिण कोरिया
51 मोजाम्बिक 74 स्पेन
52 म्यांमार 75 श्रीलंका
53 नेपाल 76 सूरीनाम
54 नीदरलैंड 77 स्वीडन
55 न्यूजीलैंड 78 स्विट्जरलैंड
56 नॉर्वे 79 ताजिकिस्तान
57 ओमान 80 तंजानिया
58 परागुए 81 त्रिनिदाद और टोबैगो
59 पेरू 82 यूएई (UAE)
60 फिलीपींस 83 यूक्रेन
61 पोलैंड 84 यूके (UK)
62 पुर्तगाल 85 यूएसए (USA)
63 रोमानिया 86 उज्बेकिस्तान
64 रूस 87 यूरोपीय संघ (EU)
65 रवांडा 88 IFAD
66 सऊदी अरब
67 सेनेगल
68 सर्बिया
69 सेशेल्स
डिक्लेरेशन में ‘डेमोक्रेटाइजिंग AI रिसोर्सेस’ पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है. आज के दौर में जिसके पास डेटा और कंप्यूटिंग पावर है, वही दुनिया पर राज कर रहा है. लेकिन नई दिल्ली समिट ने इस धारणा को चुनौती दी है. घोषणापत्र में कहा गया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और किफायती कनेक्टिविटी हर देश का हक है. ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की प्रेरणा से, सभी देशों ने एक ऐसे ढांचे पर काम करने की सहमति जताई है, जिससे AI के बुनियादी संसाधन सस्ते और सुलभ हो सकें. इसके लिए ‘चार्टर फॉर द डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन ऑफ AI’ का जिक्र किया गया है, जो एक स्वैच्छिक फ्रेमवर्क है. यह फ्रेमवर्क स्थानीय नवाचार को मजबूती देगा और देशों को अपनी जरूरतों के हिसाब से AI विकसित करने की आजादी देगा.
ग्लोबल AI इम्पैक्ट कॉमन्स कैसे लाएगा आर्थिक क्रांति?
आर्थिक विकास के लिए AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल अनिवार्य हो गया है. समिट में ‘ग्लोबल AI इम्पैक्ट कॉमन्स’ नाम की एक पहल की चर्चा की गई. यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म होगा जहां सफल AI मॉडल्स और केस स्टडीज को साझा किया जाएगा. मान लीजिए भारत ने खेती में AI का कोई शानदार इस्तेमाल किया, तो उस मॉडल को इस प्लेटफॉर्म के जरिए अफ्रीका या लैटिन अमेरिका का कोई देश भी अपना सकेगा. इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि बार-बार रिसर्च पर होने वाला खर्च भी कम होगा. ओपन-सोर्स AI को बढ़ावा देकर इसे दुनिया भर में कॉपी और अडॉप्ट करने लायक बनाया जाएगा, जिससे ग्लोबल इकोनॉमी को नई रफ्तार मिलेगी.
क्या सुरक्षित और भरोसेमंद AI सिर्फ एक सपना है?
जैसे-जैसे AI बढ़ रहा है, सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए ‘सिक्योर एंड ट्रस्टेड AI’ पर लंबी चर्चा हुई. समिट में ‘ट्रस्टेड AI कॉमन्स’ बनाने की बात कही गई है. यह एक ऐसा कोलैबोरेटिव प्लेटफॉर्म होगा जहां सुरक्षा से जुड़े टूल्स, बेंचमार्क और बेस्ट प्रैक्टिसेज का भंडार होगा. इसे कोई भी देश अपनी जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल कर सकेगा. मकसद यह है कि AI के विकास के दौरान पब्लिक इंटरेस्ट यानी जनहित का ध्यान रखा जाए. बिना भरोसे के कोई भी तकनीक समाज में जगह नहीं बना सकती, इसलिए टेक्निकल सॉल्यूशंस और पॉलिसी फ्रेमवर्क को एक साथ लाने पर सहमति बनी है.
साइंस और रिसर्च में AI कैसे मचाएगा तहलका?
विज्ञान के क्षेत्र में AI एक वरदान साबित हो सकता है, लेकिन रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी इसमें बड़ी बाधा है. नई दिल्ली डिक्लेरेशन ने इस बाधा को हटाने का रास्ता दिखाया है. ‘इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ AI फॉर साइंस इंस्टीट्यूशंस’ नाम का एक नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव है. इसके जरिए अलग-अलग देशों की वैज्ञानिक संस्थाएं अपनी रिसर्च और क्षमताओं को एक साथ जोड़ सकेंगी. चाहे वो जानलेवा बीमारियों का इलाज खोजना हो या क्लाइमेट चेंज से निपटना, यह नेटवर्क दुनिया भर के वैज्ञानिकों को AI की ताकत मुहैया कराएगा. यह आपसी सहयोग विज्ञान की दुनिया में नई खोजों की रफ्तार को कई गुना बढ़ा देगा.
सोशल एम्पावरमेंट के लिए AI का उपयोग कैसे होगा?
समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए AI एक बड़ा जरिया बन सकता है. डिक्लेरेशन में कहा गया है कि ज्ञान, सूचना और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए AI का इस्तेमाल किया जाएगा. एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है जहां सोशल एम्पावरमेंट से जुड़े सफल प्रयोगों और जानकारी का आदान-प्रदान होगा. शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं में AI को इस तरह फिट किया जाएगा कि एक आम नागरिक को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें. यह तकनीक लोगों को सशक्त बनाएगी और उन्हें आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने के नए अवसर प्रदान करेगी.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में नौकरियों का क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल हमेशा स्किल और नौकरियों का रहता है. समिट ने इसे ‘ह्यूमन कैपिटल’ चक्र के तहत संबोधित किया है. घोषणापत्र में स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग पर जोर दिया गया है. इसके लिए ‘गाइडिंग प्रिंसिपल्स फॉर री-स्किलिंग’ और एक विशेष ‘प्लेबुक’ तैयार की गई है. इसमें सरकारी अधिकारियों की ट्रेनिंग से लेकर युवाओं की AI लिटरेसी बढ़ाने तक का पूरा प्लान है. मकसद यह है कि भविष्य की AI ड्रिवन इकोनॉमी के लिए वर्कफोर्स को आज से ही तैयार किया जाए. भारत ने इस मामले में अपनी डिजिटल साक्षरता मुहिम का उदाहरण भी दुनिया के सामने रखा.
पर्यावरण और ऊर्जा की चुनौती से कैसे निपटेगा AI?
AI चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और प्राकृतिक संसाधनों की जरूरत होती है. समिट में ‘रेजिस्टेंस, इनोवेशन और एफिशिएंसी’ पर फोकस करते हुए एनर्जी एफिशिएंट AI सिस्टम बनाने की वकालत की गई है. इसके लिए ‘रेजिलेंट AI इंफ्रास्ट्रक्चर’ की प्लेबुक भी जारी की गई है. यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तकनीकी प्रगति की कीमत पर्यावरण को न चुकानी पड़े. सस्ते और ऊर्जा बचाने वाले AI सिस्टम ही असल में टिकाऊ होंगे और दुनिया के विकास लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेंगे.
दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मानव-केंद्रित एआई दृष्टिकोण’ को खुले तौर पर स्वीकार कर लिया 

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए साफ किया कि दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मानव-केंद्रित एआई दृष्टिकोण’ को खुले तौर पर स्वीकार कर लिया है। यह कदम वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के सुरक्षित, समान और जवाबदेह विकास की दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।

वैश्विक सहयोग और ‘सर्वजन हिताय’ का सिद्धांत
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि कुल 88 हस्ताक्षरकर्ताओं में से 86 देशों और दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ (सभी का कल्याण, सभी की खुशी) के सिद्धांत को औपचारिक रूप से स्वीकार किया है। इस विजन का मुख्य लक्ष्य एआई संसाधनों का इस तरह से लोकतंत्रीकरण करना है कि इस उन्नत तकनीक और इसके आर्थिक फायदों की पहुंच दुनिया भर में समाज के हर वर्ग तक सुनिश्चित हो सके।

शिखर सम्मेलन से जुड़ी प्रमुख नीतिगत बातें
यह शिखर सम्मेलन 16 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित किया गया। इस आयोजन ने कई अहम मोर्चों पर वैश्विक नीतियां तय करने का मजबूत आधार रखा है:

  • ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: यह ‘ग्लोबल साउथ’ में आयोजित होने वाला दुनिया का पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन था।
  • हितधारकों का महामंच: इस आयोजन में दुनिया भर के सरकारी नीति-निर्माताओं, एआई क्षेत्र के उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
  • मानवता के लिए एआई: इस समिट का फोकस एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर विचार करने के साथ-साथ, ‘मानवता के लिए एआई’ के वैश्विक सिद्धांत को आगे बढ़ाना था।
  • प्रशासन और सुरक्षा: यह शिखर सम्मेलन एआई के प्रशासन, सुरक्षा मानकों और समाज पर इसके प्रभाव को लेकर वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की एक विकसित होती अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया का हिस्सा है।

आयोजन के दौरान राजनीतिक विवाद
तकनीक और नीति-निर्माण से जुड़े इस अहम वैश्विक सम्मेलन के दौरान कुछ राजनीतिक विवाद भी सुर्खियों में रहे। भारतीय युवा कांग्रेस के नेताओं द्वारा आयोजन स्थल पर किए गए ‘शर्टलेस/टॉपलेस’ विरोध प्रदर्शन की कड़ी आलोचना हुई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, राज्य मंत्री जयंत चौधरी और भाजपा नेता शहजाद पूनावाला के साथ-साथ बीआरएस नेता केटीआर ने इसे सस्ती ‘राजनीतिक नौटंकी’ करार दिया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने युवा कांग्रेस नेताओं की पांच दिन की रिमांड मांगी है।

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का यह ऐतिहासिक घोषणापत्र बताता है कि एआई जैसी क्रांतिकारी तकनीक पर अब किसी एक देश या चंद टेक कंपनियों का एकाधिकार नहीं रहेगा। 88 देशों और संगठनों की यह एकजुटता एआई के सुरक्षित विकास और इसके आर्थिक लाभों को विकासशील देशों तक पहुंचाने का रास्ता साफ करेगी। आगे चलकर इन सहमतियों को व्यावहारिक अंतरराष्ट्रीय नीतियों में कैसे बदला जाता है, इस पर उद्योग जगत और निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।

 

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