इंडियन एम्बेसी ने भारतीय नागरिकों को दी चेतावनी, हालात गंभीर ,जल्द से जल्द छोड़ दें ईरान…….

ईरान में बढ़ते तनाव और हालिया विरोध प्रदर्शनों के बीच तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सख्त सलाह दी है. दूतावास ने X पर जारी एडवाइजरी में कहा कि छात्र, तीर्थयात्री, व्यापारी और पर्यटक सहित सभी भारतीय उपलब्ध साधनों से, जिसमें कमर्शियल फ्लाइट्स शामिल हैं, ईरान छोड़ […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 23 फरवरी 2026, 09:16 AM 6 मिनट read
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इंडियन एम्बेसी ने भारतीय नागरिकों को दी चेतावनी, हालात गंभीर ,जल्द से जल्द छोड़ दें ईरान…….
Photo: UB India News Archive
ईरान में बढ़ते तनाव और हालिया विरोध प्रदर्शनों के बीच तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सख्त सलाह दी है. दूतावास ने X पर जारी एडवाइजरी में कहा कि छात्र, तीर्थयात्री, व्यापारी और पर्यटक सहित सभी भारतीय उपलब्ध साधनों से, जिसमें कमर्शियल फ्लाइट्स शामिल हैं, ईरान छोड़ दें. यह सलाह 5 जनवरी 2026 और 14 जनवरी 2026 की पिछली एडवाइजरी का पुनरावलोकन है, लेकिन अब स्थिति और गंभीर बताई गई है.

एडवाइजरी में क्या कहा गया?

दूतावास ने लिखा, ‘ईरान में वर्तमान स्थिति के मद्देनजर, भारतीय नागरिकों (छात्र, तीर्थयात्री, व्यापारी और पर्यटक) को कमर्शियल फ्लाइट्स समेत सभी उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने की सलाह दी जाती है. 14 जनवरी 2026 की एडवाइजरी दोहराई जाती है कि सभी भारतीय नागरिक और PIO सतर्क रहें, विरोध प्रदर्शन या डेमॉन्स्ट्रेशन वाले इलाकों से दूर रहें, भारतीय दूतावास से संपर्क में रहें और स्थानीय मीडिया पर नजर रखें.’ दूतावास ने आगे कहा कि सभी भारतीयों को अपना पासपोर्ट, ID और अन्य ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स हमेशा तैयार रखने चाहिए. किसी भी मदद के लिए दूतावास से संपर्क करें.

भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जिनसे दूतावास में संपर्क किया जा सकता है.

  •  +98 912 810 9115
  • +98 912 810 9109
  •  +98 912 810 9102
  •  +98 993 217 9359

इसके अलावा ईमेल cons.tehran@mea.gov.in के जरिए भी कॉन्टैक्ट कर सकते हैं.

क्यों जारी हुई यह एडवाइजरी?

  • ईरान में स्थिति: जनवरी 2026 में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोग मारे गए थे, जिसके बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई की. फरवरी 2026 में विश्वविद्यालयों के फिर से खुलने के साथ छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध शुरू किया. तेहरान, मशहद और अन्य शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुई हैं.
  • अमेरिका-ईरान तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है. अमेरिकी सैन्य ताकतें क्षेत्र में इकट्ठा हो रही हैं और ट्रंप प्रशासन की ओर से संभावित हमलों की आशंका है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह एडवाइजरी अमेरिकी हमलों की आशंका के बीच आई है.
  • पिछली एडवाइजरी: 5 जनवरी को MEA ने गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी थी. 14 जनवरी को दूतावास ने सतर्क रहने को कहा था. अब फरवरी में स्थिति और बिगड़ने पर ‘तुरंत निकलने’ की अपील की गई है.

मिडिल ईस्ट में तेजी से बदल रहे हालात……………..

मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं. एक तरफ अमेरिका ने अपने सैनिक और मिसाइल डिफेंस सिस्टम क्षेत्र में बढ़ा दिए हैं, तो दूसरी तरफ ईरान ने भी साफ संकेत दे दिया है कि अगर हमला हुआ तो जवाब और बड़ा होगा. अमेरिका के पास भले ही हथियार हों, लेकिन ईरान के पास वह लोग हैं जो उसके लिए लड़ेंगे. दोनों तरफ की तैयारियों ने पूरे इलाके में बेचैनी बढ़ा दी है. न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला करने का आदेश देते हैं, तो ईरान अपने सहयोगी संगठनों के जरिए जवाबी कार्रवाई कर सकता है. ईरान का जवाब सिर्फ मिडिल ईस्ट तक नहीं बल्कि यूरोप तक दिख सकता है.

अमेरिका क्या तैयारी कर रहा है?

ईरान की तरफ से इसी खतरे के डर से पेंटागन ने मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस तैनात किए हैं. मिडिल ईस्ट में पहले से ही 30 से 40 हजार अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, जिन पर ईरान जवाबी कार्रवाई के दौरान हमला कर सकता है. 2025 में 12 दिनों के युद्ध में भी ईरान ने अपनी मिसाइलों से तगड़ा नुकसान पहुंचाया था. खुफिया एजेंसियां कह रही हैं कि अभी तक कोई ठोस हमला प्लान सामने नहीं आया है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक इंटरसेप्ट में ‘हलचल’ बढ़ी है. इसका मतलब है कि कुछ तो खिचड़ी पक रही है.

ईरान ने क्या किया?

ईरान ने अमेरिकी खतरे को देखते हुए अपने सैन्य ढांचे को हाई अलर्ट पर रख दिया है. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने भरोसेमंद नेता अली लारिजानी को सौंप दी है. लारिजानी न सिर्फ घरेलू विरोध को संभालने में लगे हैं, बल्कि रूस, कतर और ओमान जैसे देशों से संपर्क भी मजबूत कर रहे हैं. अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता भी उनके ही जिम्मे है. ईरान बार-बार कहता रहा है कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर थोपा गया तो जवाब जरूर देगा.’

ईरान के जवाब से अमेरिका को क्यों डरना चाहिए?

अमेरिका और पश्चिमी देशों को सबसे ज्यादा चिंता ईरान के ‘प्रॉक्सी नेटवर्क’ से है. यानी ईरान सीधे नहीं, बल्कि अपने सहयोगी संगठनों के जरिए हमला कर सकता है. इनके संभावित सहयोगी कुछ इस प्रकार हैं.
  1. यमन के हूती विद्रोही : फिर से लाल सागर में पश्चिमी देशों के जहाजों पर हमला शुरू कर सकते हैं. इससे पश्चिमी देशों के जहाजों को लंबा रास्ता लेना पड़ेगा.
  2. हिजबुल्लाह (लेबनान): यूरोप या मिडिल ईस्ट में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बना सकते हैं.
  3. इराकी मिलिशिया समूह: अमेरिकी बेस पर रॉकेट या ड्रोन हमले कर सकते हैं.
  4. खुफिया एजेंसियां यह भी मान रही हैं कि अल-कायदा जैसे आतंकी संगठन भी मौके का फायदा उठा सकते हैं.
  5. हालांकि हमास पहले से कमजोर है. वहीं सीरिया में बशर अल-असद की सरकार गिर चुकी है, जिसने ईरान का प्रभाव कम किया है. हालांकि इराक और यमन जैसे इलाकों में ईरान का असर अभी भी काफी है.

अमेरिका के अंदर भी उठ रहे सवाल

अमेरिकी सीनेट के वरिष्ठ डेमोक्रेट नेता जैक रीड ने चेतावनी दी है कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र में बड़ी जंग छेड़ सकता है. उनका कहना है कि इससे अमेरिकी सैनिक खतरे में पड़ेंगे और वैश्विक बाजार भी हिल सकते हैं.

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