लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जितना झटका
बुधवार सुबह 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था। लेकिन बाद में पता चला कि पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरा था। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। बाद में USGS ने भी स्पष्ट किया कि 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा यह झटका लैंडस्लाइड के कारण पैदा हुआ था।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने गुरुवार को बताया कि नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ का कारण भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर का अचानक टूटना था. एजेंसी के अनुसार, शुरुआत में जिस भूकंपीय गतिविधि को भूकंप बताया गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर के टूटने और मलबे के तेज बहाव के कारण हुई थी. ग्लेशियर टूटने के बाद पानी और मलबा तेजी से नीचे की ओर बहा, जिससे निचले इलाकों में भारी तबाही हुई. USGS ने कहा कि इस घटना के कारण नेपाल और तिब्बत में नदी के निचले हिस्सों में विनाशकारी प्रभाव देखने को मिले. इससे अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हुई, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ.
नेपाल में राहत-बचाव कार्य तेज, मरने वालों की संख्या 175 पहुंची
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने गुरुवार को जानकारी कि रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने सुबह से ही तटीय और प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत अभियान तेज कर दिए हैं.नेपाल में मची इस तबाही में अब तक 175 लोगों की मौत हो चुकी है. नेपाल पुलिस के अनुसार, रसुवा में 2, नुवाकोट में 12, धादिंग में 27, चितवन में 64, गोरखा में 20, तनहुं में 9, एनपी पूर्व में 26 और एनपी पश्चिम में 2 लोगों के शव मिले हैं. अभी सैकड़ों पर्यटक, मजदूर और अन्य लोग लापता हैं. रसुवा जिले के तिमुरे और पास के स्याफ्रुबेसी इलाके में सबसे अधिक तबाही हुई. बाढ़ ने कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ इलाकों में आवाजाही ठप हो गई। बताया गया कि यह पानी तिब्बत की तरफ से आया था.







