पाकिस्तान ने सोमवार रात एक बार फिर अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की है। पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया, जिनमें एक हॉस्पिटल भी है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इसमें 400 लोगों की मौत हो गई, वहीं 250 से ज्यादा घायल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक दारुलअमान, अरजान कीमत, खैरखाना […]
By UB India News • Patna, Bihar मंगलवार, 17 मार्च 2026, 07:33 AM • 5 मिनट read
पाकिस्तान ने सोमवार रात एक बार फिर अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की है। पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया, जिनमें एक हॉस्पिटल भी है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इसमें 400 लोगों की मौत हो गई, वहीं 250 से ज्यादा घायल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक दारुलअमान, अरजान कीमत, खैरखाना और काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास कई जगहों पर धमाकों और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर बम गिराए। तालिबान ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है और कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के एयरस्पेस का उल्लंघन किया है।
अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हवाई हमले की भारत ने कड़ी निंदा की है। भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कोई भी धर्म या कानून, अस्पताल पर हमले को सही नहीं ठहरा सकता। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस आपराधिक कृत्य के दोषियों को जवाबदेह ठहराना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अफगानिस्तान में आम नागरिकों को मनमाने ढंग से निशाना बनाने का सिलसिला तुरंत बंद होना चाहिए। भारत शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है, और इस दुखद घड़ी में अफगानिस्तान की जनता के साथ एकजुटता से खड़ा है। हम अफ़गानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने अटूट समर्थन को भी दोहराते हैं।’
अफगानिस्तान पर क्यों टूट पड़ा पाकिस्तान?
ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की ओर से काबुल पर की गई एयरस्ट्राइक ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह महज आतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई है या फिर एक सोची-समझी डायवर्जन स्ट्रैटेजी? मौजूदा हालात को देखें तो यह कदम सिर्फ सुरक्षा नहीं बल्कि राजनीति और रणनीति से भी जुड़ा दिखाई देता है. दरअसल पाकिस्तान इस समय दोहरे दबाव में फंसा हुआ है. एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का दबाव है, जो चाहते हैं कि पाकिस्तान खुलकर उनके पक्ष में खड़ा हो.
दूसरी तरफ ईरान के साथ उसके रिश्ते और देश के अंदर की भावनाएं हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग ईरान के समर्थन में नजर आ रहे हैं. हाल के दिनों में कराची समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए यहां तक कि अमेरिकी दूतावास के आसपास हिंसा और झड़पों की खबरें भी सामने आईं. ऐसे माहौल में पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने नागरिकों को कैसे संतुलित रखे और अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना भी करे. यही वजह है कि उसने अपने लिए एक रास्ता ये निकाल लिया कि वो खुद युद्ध में चला गया.
क्या है पाकिस्तान की नई चाल ‘डायवर्जन थ्योरी’?
इस वक्त पाकिस्तान जो चाल चल रहा है, उसे ही डायवर्जन थ्योरी सामने आती है. अक्सर देखा गया है कि जब किसी देश में घरेलू दबाव बढ़ता है, तो सरकार बाहरी मुद्दों को उछालकर जनता का ध्यान दूसरी ओर मोड़ने की कोशिश करती है. काबुल पर एयरस्ट्राइक को इसी नजरिए से देखा जा रहा है. इससे पाकिस्तान के अंदर चल रही बहस को ईरान बनाम अमेरिका से ध्यान हटाकर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की तरफ मोड़ा जा सकता है. वहां की सरकार अंदरूनी पॉलिटिक्स का नैरेटिव बदलने की कोशिश कर रही है, ताकि उसे इस युद्ध में एक साइड न लेना पड़े.
ये सच है कि पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान सीमा पर सक्रिय आतंकी समूहों को लेकर चिंतित रहा है और समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है लेकिन इस वक्त महंगाई से परेशान पाकिस्तान का युद्ध में खुद को झोंक देना अटपटा है. इसी वजह से टाइमिंग और मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात इस कार्रवाई को संदेह के घेरे में जरूर लाते हैं. जब एक तरफ ईरान युद्ध का दबाव है, दूसरी तरफ घरेलू असंतोष बढ़ रहा है, ऐसे में काबुल एयरस्ट्राइक एक रणनीतिक संदेश भी हो सकती है. इसके दो मैसेज हो सकते हैं –
- पहला ये कि पाकिस्तान अपने देश की अवाम को आतंकवाद और अफगानिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के झुनझुने से बहला रहा है. चूंकि पाकिस्तान में भी शिया आबादी काफी ज्यादा है और ईरान में हुए अमेरिकी हमले के बाद वहां परिस्थितियां बहुत बिगड़ी थीं. अमेरिका के दूतावास तक पर हमला किया गया था, ऐसे में पाकिस्तान इस तरफ से अवाम का ध्यान हटाना चाहता है.
- वहीं पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी दुविधा सऊदी के साथ उसका डिफेंस पैक्ट है. दोनों देशों ने युद्ध जैसे हालात में एक-दूसरे की मदद करने का लिखित वादा किया था, लेकिन जब सऊदी में ईरानी मिसाइलें गिर रही हैं तो पाकिस्तान खुद उलझा हुआ है. दरअसल वो जान-बूझकर उलझा है, ताकि उसे इस लड़ाई का हिस्सा नहीं बनना पड़े और सऊदी की मदद के लिए जाना ही न पड़े. उसके कुछ ऐसा ही धोखा अमेरिका को गाजा स्टैबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने के नाम पर दिया था.