अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग अपने 23वें दिन में पहुंच गई है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का सीधा अल्टीमेटम दे दिया है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने इजराइल पर अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक को अंजाम दिया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म […]
By UB India News • Patna, Bihar रविवार, 22 मार्च 2026, 04:11 AM • 5 मिनट read
अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग अपने 23वें दिन में पहुंच गई है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का सीधा अल्टीमेटम दे दिया है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने इजराइल पर अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक को अंजाम दिया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर साफ शब्दों में धमकी दी कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ‘पूरी तरह और बिना किसी खतरे के’ नहीं खोलता, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाएगा.
उन्होंने धमकी भरे पोस्ट में लिखा कि अमेरिका ‘सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू करते हुए उन्हें खत्म कर देगा.’ इस बयान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब सीधे ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े हमले की तैयारी में है. हीं इससे पहले ईरान ने भी आक्रामक जवाब दिया है. ईरानी मिसाइलों ने इजराइल के दक्षिणी शहर डिमोना और अराद को निशाना बनाया. डिमोना वही जगह है जहां इजराइल का प्रमुख परमाणु रिसर्च सेंटर स्थित है. इस हमले में करीब 100 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है और एक 10 साल का बच्चा भी जिंदगी के लिए जंग लड़ रहा है. इजराइल की एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हुई, लेकिन कई मिसाइलों को रोकने में नाकाम रही. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ‘मुश्किल शाम’ बताते हुए साफ कहा कि जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी और ईरान पर हमले रुकेंगे नहीं.
परमाणु केंद्र को क्या नुकसान हुआ?
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा है कि डिमोना के परमाणु केंद्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और वहां रेडिएशन का स्तर सामान्य है. हालांकि एजेंसी ने चेतावनी दी है कि परमाणु ठिकानों के आसपास सैन्य कार्रवाई बेहद खतरनाक हो सकती है और अधिकतम संयम बरतने की जरूरत है. जानकारी के मुताबिक, ईरान ने एक ही दिन में इजरायल पर कम से कम आठ बार मिसाइल हमले किए. अराद शहर के कई हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं. इजराइल की एंबुलेंस सेवा के अनुसार, कम से कम 10 लोग गंभीर हालत में हैं. दूसरी तरफ ईरान का दावा है कि यह हमला उसके नतांज परमाणु केंद्र पर हुए हमले का जवाब था. यानी अब यह जंग सीधे परमाणु ठिकानों तक पहुंच चुकी है, जिससे खतरा और बढ़ गया है.
‘सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू होगा हमला’
ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने समयसीमा के भीतर कदम नहीं उठाया, तो अमेरिका उसकी ऊर्जा संरचनाओं को निशाना बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू होगी और अन्य ठिकानों तक बढ़ेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध बने हुए हैं।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।
एक दिन पहले ही अमेरिका ने ईरानी तेल की खरीद पर लगी पाबंदी को हटाने का फैसला लिया था। इसे पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के बीच अमेरिका का बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी हमलों के डर की वजह से बड़ी संख्या में तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों को ले जा रहे जहाज फंसे हुए हैं।
यूएई समेत 22 देशों ने की होर्मुज में ईरानी हमलों की निंदा
संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व में 22 देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हालिया हमलों को लेकर संयुक्त बयान जारी करते हुए ईरान की कड़ी आलोचना की है। इन देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन और वैश्विक समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
संयुक्त बयान में कहा गयो हम ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में निहत्थे वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों, नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बदे करने की कोशिशों की कड़ी निंदा करते हैं। नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए ईरान से तुरंत हमले रोकने, समुद्री मार्गों में बाधा न डालने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने की मांग की है।
क्या बोले ये देश?
उन्होंने कहा कि समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का मूल सिद्धांत है और इसमें बाधा वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। इस संयुक्त बयान पर ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, फिनलैंड आदि से हस्ताक्षर किए हैं।