अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 26वां दिन है। ईरान ने मंगलवार रात कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट ड्रोन अटैक किया, जिससे वहां मौजूद फ्यूल टैंक में आग लग गई।
कुवैत की सेना ने जवाबी कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अगर कहीं धमाके की आवाज सुनाई दे रही है, तो वह दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की वजह से है।
सेना ने लोगों से अपील की है कि वे सरकार के सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। इससे पहले कुवैत के नेशनल गार्ड ने बताया कि उसने अपने इलाके में 5 ड्रोन मार गिराए हैं।
वहीं, इराक के एक उग्रवादी समूह इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ने कहा है कि उसने पिछले 24 घंटे में अमेरिका से जुड़े 23 ठिकानों पर हमले किए हैं। ग्रुप के मुताबिक, इन हमलों में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन हमलों से कितना नुकसान हुआ, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
दक्षिणी लेबनान में इजराइल की एयरस्ट्राइक, 9 लोगों की मौत
लेबनान के दक्षिणी हिस्से में इजराइल के हमलों में 9 लोगों की मौत हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सिदोन इलाके के पास कई जगहों पर हमले हुए। अदलौन इलाके में एक हमले में 4 लोगों की जान चली गई।
वहीं, मियेह मियेह शरणार्थी कैंप में एक इमारत पर हमला हुआ, जिसमें 2 लोगों की मौत हुई और 4 लोग घायल हो गए। इसके अलावा, हब्बूश इलाके में हुए एक और हमले में 3 लोगों की मौत हो गई और 18 लोग हो गए।
ईरान जंग को लेकर पाकिस्तानी PM ने सऊदी क्राउन प्रिंस से बात की
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की।
इस दौरान शहबाज शरीफ ने हाल के हमलों की निंदा की और कहा कि हालात को देखते हुए युद्ध जल्द से जल्द खत्म होना चाहिए। उन्होंने सऊदी अरब के रुख की भी तारीफ की।
शरीफ ने यह भी बताया कि पाकिस्तान इस समय क्षेत्र में शांति लाने के लिए कोशिश कर रहा है और इसी बारे में उन्होंने सऊदी प्रिंस को जानकारी दी।
बातचीत के दौरान मोहम्मद बिन सलमान ने पाकिस्तान की कोशिशों की सराहना की। दोनों नेताओं ने कहा कि वे आगे भी मिलकर काम करेंगे और संपर्क में रहेंगे।
हिजबुल्लाह ने इजराइल पर 30 रॉकेट दागे
लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने आज इजराइल पर करीब 30 रॉकेट दागे गए। हमलों के बाद उत्तरी इजराइल के कई इलाकों में सायरन बजने लगे। फिलहाल यह साफ नहीं है कि इन हमलों से कितना नुकसान हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया के हालात पर राज्यसभा में मंगलवार को 21 मिनट बोले। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग जारी रही तो इसके दुष्परिणाम होंगे। आने वाला समय देश की सबसे बड़ी परीक्षा लेने वाला है। इसमें राज्यों का सहयोग जरूरी है। टीम इंडिया की तरह काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में हमारे जहाज और भारतीय क्रू फंसे हुए हैं। ये चिंताजनक है। हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। गैस-तेल, फर्टिलाइजर्स जैसे जरूरी सामान की सप्लाई पर असर पड़ा है।
एक दिन पहले पीएम ने लोकसभा में 25 मिनट की स्पीच दी थी। उन्होंने कहा था कि इस युद्ध के कारण दुनिया में जो कठिन हालात बने हैं, उनका प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका है। इसलिए हमें तैयार रहना होगा। हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं।
सेंट्रल गाजा में इजराइल के हवाई हमले में 4 लोगों की मौत हो गई है। न्यूज एजेंसी वफा के मुताबिक, यह हमला अज-जवायदा इलाके में हुआ, जहां अचानक एयर स्ट्राइक की गई।
अमेरिका के डिफेंस एक्सपर्ट और व्हाइट हाउस के पूर्व सलाहकार रॉबर्ट पेप ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प के चारों ओर जाल कसता जा रहा है। ट्रम्प ईरान के साथ बढ़ते तनाव में ऐसे हालात में फंस सकते हैं, जहां युद्ध धीरे-धीरे और बड़ा होता चला जाता है।
रॉबर्ट पेप ने भारतीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि शुरुआत में छोटे-छोटे हमले किए जाते हैं, लेकिन जब उनसे बड़ा टागरेट हासिल नहीं होता, तो हमले और बढ़ा दिए जाते हैं। इसी को ‘एस्केलेशन ट्रैप’ कहा जाता है, यानी ऐसा जाल जिसमें फंसकर युद्ध लगातार बढ़ता जाता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युद्ध बढ़ा, होर्मुज स्ट्रेट पर असर पड़ सकता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। इससे तेल महंगा हो सकता है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।
पेप के मुताबिक, इस स्थिति में ईरान मजबूत हो सकता है और तेल पर ज्यादा कंट्रोल हासिल कर सकता है। हालात संभालने के लिए इजराइल की सैन्य कार्रवाई को कंट्रोल करना जरूरी है और यह फैसला ट्रम्प ही ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका के मरीन सैनिक ईरान पहुंच जाते हैं, तो हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं। अभी ट्रम्प ने हमले कुछ दिनों के लिए कम किए हैं, लेकिन यह सिर्फ समय लेने का तरीका हो सकता है।
पेप ने यह भी कहा कि जब तक अमेरिका अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता, तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि तनाव कम हो रहा है।

ट्रम्प की सरकार ने मिडिल ईस्ट में करीब 2,000 पैराट्रूपर्स (पैराशूट से उतरने वाले सैनिक) भेजने का फैसला किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी सैनिक 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से हैं, जो बहुत जल्दी किसी भी जगह पर कार्रवाई करने के लिए जानी जाती है।
कहा जा रहा है कि इन सैनिकों को भेजने का मकसद ट्रम्प के पास और ज्यादा सैन्य विकल्प रखना है। यानी अगर जरूरत पड़ी, तो ईरान या उसके आसपास के इलाकों में जमीनी हमला भी किया जा सकता है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब एक तरफ अमेरिका ईरान से बातचीत की कोशिश कर रहा है, और दूसरी तरफ अपनी सैन्य ताकत भी बढ़ा रहा है।








