ईरान की जमीन पर गिराए गए F-15E फाइटर जेट के दूसरे क्रू मेंबर को भी अमेरिका ने खोज निकाला है. अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने खतरनाक हालात में रेसक्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि दूसरे क्रू मेंबर को भारी गोलीबारी के बीच ढूंढकर रेस्क्यू किया […]
By UB India News • Patna, Bihar रविवार, 5 अप्रैल 2026, 06:57 AM • 5 मिनट read
ईरान की जमीन पर गिराए गए F-15E फाइटर जेट के दूसरे क्रू मेंबर को भी अमेरिका ने खोज निकाला है. अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने खतरनाक हालात में रेसक्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि दूसरे क्रू मेंबर को भारी गोलीबारी के बीच ढूंढकर रेस्क्यू किया गया. रेस्क्यू के बाद भी ऑपरेशन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. हालांकि ये खबरें आई हैं कि अमेरिकी पायलट को ईरान से बाहर निकाल लिया गया है.
अमेरिकी सेना के सूत्रों के हवाले से बताया गया कि F-15 के दूसरे लापता पायलट को शनिवार रात खोज लिया गया था. इस ऑपरेशन में अमेरिका ने अपनी बड़ी ताकत झोंक दी थी. इस दौरान कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें ईरानी पुलिस अमेरिकी हेलीकॉप्टर्स पर ताबड़तोड़ गोलीबारी कर रही है और वे इससे बचते हुए अपने साथी को ढूंढकर वापस लाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. हालांकि इन सभी परिस्थितियों को पार करते हुए अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने अपना शौर्य दिखाया और पायलट को वापस लाने में कामयाब हुए.
ट्रंप ने रेस्क्यू की पुष्टि की
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा ‘हमने उन्हें सुरक्षित निकाल लिया! पिछले कुछ घंटों में अमेरिकी सेना ने इतिहास के सबसे साहसी खोज और बचाव अभियानों में से एक सफलतापूर्वक अंजाम दिया। हमारे अद्भुत क्रू मेम्बर अधिकारी, जो एक सम्मानित कर्नल हैं, अब पूरी तरह सुरक्षित हैं।’
ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी सेना ने अधिकारी के स्थान को 24 घंटे निगरानी में रखा और उनकी सुरक्षित वापसी की योजना बनाई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने उन्हें बचाने के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली हथियारों से लैस दर्जनों विमान भेजे। ट्रंप ने कहा अधिकारी घायल हुए हैं, लेकिन वे पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। यह साबित करता है कि हमने ईरानी आसमान पर पूर्ण वायु श्रेष्ठता और प्रभुत्व हासिल कर लिया है। एक भी अमेरिकी जवान घायल नहीं हुआ।
दो अमेरिकी विमानों को बनाया था निशाना
गौरतलब है कि ईरान ने भी अमेरिकी विमानों और नागरिक लक्ष्यों पर हमला किया। यह F-15E पहला अमेरिकी विमान था जो ईरानी क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। ट्रंप ने पहले कहा था कि अमेरिका ने ईरान को ध्वस्त कर दिया है और युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा। अमेरिकी-ईरानी संघर्ष में A-10 हमले वाला दूसरा अमेरिकी विमान भी गिरा। दुर्घटना के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कोहगिलुए और बायर अहमद प्रांत में पहाड़ी क्षेत्र में खोज और बचाव अभियान चलाया।
ईरान ने इसके लिए नागरिकों को इनाम की पेशकश की थी और दावा किया कि उसने दो अमेरिकी ब्लैकहॉक हेलिकॉप्टरों पर भी हमला किया। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एफ-15ई एयरक्राफ्ट को सेंट्रल ईरान के ऊपर टारगेट किया गया था और माना जा रहा है कि यह कोगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत में गिरा। हालांकि, ईरानी अधिकारियों की तरफ से फिलहाल कोई पुष्टि नहीं की गई है।
100 कमांडर, 12 हेलीकॉप्टर …अमेरिका ने झोंकी ताकत
अमेरिका के अब तक कई फाइटर जेट गिराने का दावा ईरान कर चुका है, हालांकि खुद अमेरिकी सेनाएं इस आंकड़े को भ्रमित करने वाला बता रही हैं. फिर भी जब F-15E को डाउन करने के बाद उसके पायलट गायब हुए, तो अमेरिका ने उनकी वापसी में अपनी पूरी ताकत झोंक दी. अमेरिका नहीं चाहता था कि किसी भी हालत में उसके जिंदा पायलट को ईरान की सेना पकड़े. यही वजह है कि इस ऑपरेशन में अमेरिका के 100 कमांडर लगाए गए, जो 12 हेलीकॉप्टर के जरिये उस इलाके पर नजरें गड़ाए थे, जहां लड़ाकू विमान गिरा था. घंटों की मेहनत के बाद आखिरकार अमेरिका ने दूसरे पायलट को भी रिकवर कर लिया, जबकि पहले पायलट को उसी वक्त ढूंढ लिया गया था, जब प्लेन डाउन हुआ था.
अमेरिकी के लिए क्यों ‘नाक का सवाल’ था ये ऑपरेशन
- दरअसल 44 साल पहले 1979-80 में ईरान में अमेरिकी दूतावास में 52 अमेरिकी बंधक बनाए गए थे. तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने ऑपरेशन ईगल क्लॉ नाम का रेस्क्यू मिशन चलाया, लेकिन वहां पहुंचे हेलीकॉप्टर क्रैश हो गए.
- अप्रैल 1980 में अमेरिकी कमांडो ईरान के रेगिस्तान में उतरे. खराब मौसम और तकनीकी खराबी के कारण कई हेलीकॉप्टर काम नहीं कर पाए.मिशन के दौरान एक हेलीकॉप्टर और विमान टकरा गए, जिसमें 8 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई.
- मिशन बीच में ही रद्द करना पड़ा और बंधकों को नहीं छुड़ाया जा सका. यह अमेरिका के लिए बड़ी सैन्य और राजनीतिक असफलता मानी गई. ऑपरेशन बुरी तरह से फेल हो गया और पूरी दुनिया में अमेरिका की छवि खराब हुई थी. इसके बाद अमेरिका ने अपनी स्पेशल फोर्सेज और रेस्क्यू ऑपरेशन की रणनीति में बड़े बदलाव किए.
- ईरान के IRGC प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फकारी ने कहा था कि 2 अप्रैल, 2026 अमेरिका के लिए ‘बेइज्जती का ब्लैक फ्राइडे’ था. उन्होंने दावा किया कि उनका नया सिस्टम इतना शक्तिशाली है कि दुश्मन के जेट, ड्रोन और हेलीकॉप्टर आसानी से मार गिराए जा रहे हैं. ऐसे में अमेरिका के लिए येऑपरेशन नाक का सवाल बन गया था.