दिल्ली में नारी शक्ति वंदन अभियान कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि दशकों से लंबित इंतजार को खत्म करने का समय अब आ गया है। उन्होंने कहा कि 16, 17 और 18 अप्रैल की तारीखें इस दिशा में बेहद अहम साबित होंगी। […]
By UB India News • Patna, Bihar सोमवार, 13 अप्रैल 2026, 07:09 AM • 7 मिनट read
दिल्ली में नारी शक्ति वंदन अभियान कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि दशकों से लंबित इंतजार को खत्म करने का समय अब आ गया है। उन्होंने कहा कि 16, 17 और 18 अप्रैल की तारीखें इस दिशा में बेहद अहम साबित होंगी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में नए संसद भवन में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में पहला कदम उठाया गया था। इसका उद्देश्य देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को और सशक्त बनाना है।
उन्होंने आगे कहा कि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए संसद के बजट सत्र के दौरान 16 अप्रैल से एक विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। इस सत्र के जरिए महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन’ कार्यक्रम के माध्यम से देशभर की करोड़ों माताओं और बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है, जो इस पहल को और मजबूती प्रदान करेगा।
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि देश की विकास यात्रा के इन अहम पड़ावों के बीच भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक निर्णय लेने जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि 21वीं सदी के महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक महत्वपूर्ण निर्णय ये है. ये निर्णय नारी शक्ति को समर्पित है. नारी शक्ति वंदन को समर्पित है.’
यह सम्मेलन देश में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने और विकास की मुख्यधारा में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है. इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां और महिला उपलब्धि हासिल करने वाली शख्सियतों हिस्सा लिया.
लाइव अपडेट्स…
- पीएम मोदी ने कहा, ‘इस समय भी हमारे देश में राष्ट्रपति जी से लेकर वित्त मंत्री जैसे अहम पद महिलाएं ही संभाल रही हैं. उन्होंने देश की गरिमा और गौरव, दोनों को बढ़ाया है.’
- 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया था, तब भी सभी दलों ने सर्वसम्मति से इसे पास कराया था. तब एक सुर में ये बात भी उठी थी कि इसे हर हाल में 2029 तक लागू हो जाना चाहिए. खासकर, हमारे विपक्ष के सभी साथियों ने मुखर होकर इस बात पर जोर डाला था कि 2029 में ये लागू हो जाना चाहिए- पीएम मोदी
- पीएम मोदी ने कहा, ‘लोकतांत्रिक संरचना में महिलाओं को आरक्षण देने की जरूरत दशकों से हर कोई महसूस कर रहा था. इस विमर्श को करीब 4 दशक बीत गए. इसमें सभी पार्टियों के और कितनी ही पीढ़ियों के प्रयास शामिल हैं. हर दल ने इस विचार को अपने-अपने ढंग से आगे बढ़ाया है.’
- पीएम मोदी ने कहा, ‘राज्यों की विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय 16, 17, 18 अप्रैल है. 2023 में नई संसद में हमने नारीशक्ति वंदन अधिनियम के रूप प्रथम कदम उठाया था. वह समय से लागू हो सके, महिलाओं की भागीदारी हमारे लोकतंत्र को मजबूती दे, इसके लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक का आयोजन होने जा रहा है और उससे पहले आज नारीशक्ति वंदन का ये कार्यक्रम, इसके जरिए हमें देश की कोटि-कोटि माताओं बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है.’
- हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है. एक ऐसा नया इतिहास, जो अतीत की संकल्पनाओं को साकार करेगा, जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा. एक ऐसे भारत का संकल्प जो समतामूलक हो, जहां सामाजिक न्याय केवल एक नारा न हो, बल्कि हमारी कार्य संस्कृति का, हमारी निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा हो- पीएम मोदी
- पीएम मोदी ने कहा, ‘इस समय देश में बैसाखी के पर्व की उमंग है. कल देश के अलग अलग हिस्सों में नववर्ष भी मनाया जाएगा. मैं आज जलियांवाला बाग नरसंहार के वीर बलिदानियों को भी श्रद्धांजलि देता हूं.’
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘आज सुबह 11 बजे, मैं दिल्ली में ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में हिस्सा लूंगा. यह कार्यक्रम जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं को एक मंच पर लाता है. यह ‘विकसित भारत’ के निर्माण के प्रयासों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर होने वाली चर्चाओं को और आगे बढ़ाएगा. इसमें संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना भी शामिल है.’
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है, जब देश में महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में नई हलचल तेज हो गई है. केंद्र सरकार इस आयोजन के जरिये यह संदेश देना चाहती है कि भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भूमिका सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि निर्णायक होनी चाहिए. कार्यक्रम में सरकार, शिक्षा जगत, विज्ञान, खेल, उद्यमिता, मीडिया, सामाजिक कार्य और संस्कृति जैसे विविध क्षेत्रों से प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है. इसका उद्देश्य एक ऐसा साझा मंच तैयार करना है, जहां महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सके.
इस सम्मेलन की पृष्ठभूमि में सितंबर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ है, जिसे भारत के राजनीतिक इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम माना गया था. इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है. यह प्रावधान लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
अब सरकार का फोकस इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर है. इसी सिलसिले में 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े पहलुओं पर चर्चा और आगे की रणनीति तय की जाएगी. माना जा रहा है कि ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ इस संसदीय चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा.
सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया जाएगा कि निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना क्यों जरूरी है. सरकार का मानना है कि जब तक महिलाएं नीति-निर्माण और नेतृत्व की भूमिकाओं में पर्याप्त संख्या में शामिल नहीं होंगी, तब तक समावेशी और संतुलित विकास संभव नहीं है.
प्रधानमंत्री अपने संबोधन में महिलाओं की बदलती भूमिका और उनकी बढ़ती उपलब्धियों का जिक्र कर सकते हैं. हाल के वर्षों में महिलाओं ने अंतरिक्ष, खेल, सेना, स्टार्टअप और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जिसने समाज में उनकी भूमिका को और मजबूत किया है.
यह सम्मेलन ‘विकसित भारत 2047’ के विजन से भी जुड़ा हुआ है. सरकार बार-बार यह दोहराती रही है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महिला सशक्तिकरण एक केंद्रीय स्तंभ है. ऐसे में यह आयोजन न सिर्फ वर्तमान नीतियों की समीक्षा करेगा, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करने का प्रयास करेगा.
आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस कार्यक्रम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि महिला नेतृत्व केवल सामाजिक न्याय का मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और राष्ट्रीय विकास की भी अनिवार्य शर्त है. महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से न सिर्फ शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बढ़ेगी, बल्कि विकास के लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकेंगे.
सम्मेलन में पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया जाएगा. स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी पहले ही बढ़ चुकी है, और अब लक्ष्य इसे राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करना है.
कुल मिलाकर, ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ एक ऐसा मंच बनकर उभर रहा है, जो भारत में महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराने के साथ-साथ आने वाले समय की नीतियों और रणनीतियों को भी आकार देगा.