यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री के मंच से पीएम मोदी का दमदार संदेश………………..

पीएम मोदी ने गॉथेनबर्ग में आयोजित यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री (ERT) के मंच से यूरोप की सबसे बड़ी कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने का खुला न्योता दिया. गॉथेनबर्ग में हुई यह बैठक भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकती है. खासतौर पर ऐसे समय में जब दुनिया सप्लाई चेन, […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 18 मई 2026, 05:46 AM 10 मिनट read
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यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री के मंच से पीएम मोदी का दमदार संदेश………………..
Photo: UB India News Archive

पीएम मोदी ने गॉथेनबर्ग में आयोजित यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री (ERT) के मंच से यूरोप की सबसे बड़ी कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने का खुला न्योता दिया. गॉथेनबर्ग में हुई यह बैठक भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकती है. खासतौर पर ऐसे समय में जब दुनिया सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नए साझेदार तलाश रही है, भारत यूरोप के लिए एक भरोसेमंद और तेजी से उभरता हुआ साझेदार बनकर सामने आया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त पांच देशों की विदेश यात्रा के तहत यूरोपीय शहर स्वीडन में हैं, जहां उनके दौरे को लेकर खूब गहमागहमी देखी गई. पीएम मोदी का यह स्वीडन दौरा कई मायनों में बेहद खास रहा. उन्होंने यहां गॉथेनबर्ग में आयोजित यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री (ERT) के मंच से यूरोप की सबसे बड़ी कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने का खुला न्योता दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन सहित यूरोप के सभी बड़े उद्योगपतियों और वैश्विक कंपनियों के CEOs को मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, क्लीन एनर्जी और अन्य क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया. भारत को दुनिया का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बताते हुए पीएम मोदी कहा कि भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पूरी रफ्तार में चल रही है और यह भारत में निवेश का सबसे सही समय है.
गॉथेनबर्ग में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल बिजनेस राउंडटेबल में स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद रहीं. इस बैठक को भारत और यूरोप के बीच हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण बिजनेस-डिप्लोमेसी बैठकों में माना जा रहा है.

यूरोप की दिग्गज कंपनियां हुईं शामिल

इस कार्यक्रम में यूरोप की कई बड़ी कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए. इनमें वोडाफोन, एरिक्सन, नोकिया, ऑरेंज, एएसएमएल, SAP, कैपजेमिनी, शेल, टोटलएनर्जी, वोल्वो ग्रुप, एयरबस, साब, आर्सेलर मित्तल, एस्ट्राजेनेका, रोश, फिलिप्स, नेस्ले और यूनिलीवर जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल थीं.
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बड़ा समझौता हुआ है और दोनों पक्ष टेक्नोलॉजी, व्यापार, रक्षा और सप्लाई चेन सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं.

पीएम मोदी ने बताए 5 बड़े सेक्टर

उन्होंने कहा कि भारत 5G से 6G तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऊर्जा भंडारण और डिजिटल हेल्थ जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यूरोपीय कंपनियों के लिए यहां बड़े अवसर मौजूद हैं.

‘भारत में अगले 5 साल के लिए बड़ा कमिटमेंट करें’

प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोप की कंपनियों से अपील करते हुए कहा कि हर कंपनी भारत में अगले पांच वर्षों के लिए एक बड़ा और नया निवेश संकल्प ले. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ऐसे हर बड़े प्रोजेक्ट को पूरी मदद देगी.
पीएम मोदी ने सुझाव दिया कि भारत और यूरोप के बीच एक स्थायी CEO राउंडटेबल बनाया जाए, ताकि दोनों पक्षों के उद्योग जगत के बीच लगातार संवाद और साझेदारी बनी रहे. इसके अलावा सेक्टर-आधारित वर्किंग ग्रुप और ERT इंडिया डेस्क बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया, जिससे भारत में निवेश करने वाली कंपनियों को मदद मिल सके.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है. उन्होंने भारत के 1.4 अरब उपभोक्ताओं, तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम और पिछले 12 वर्षों में हुए बड़े आर्थिक सुधारों का भी उल्लेख किया. उन्होंने GST, IBC, कॉरपोरेट टैक्स में कटौती, PLI योजना, FDI सुधार और नियमों को आसान बनाने जैसे कदमों को भारत की नई आर्थिक ताकत बताया.

भारत-यूरोप संबंधों को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों का मानना है कि गॉथेनबर्ग में हुई यह बैठक भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकती है. खासतौर पर ऐसे समय में जब दुनिया सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नए साझेदार तलाश रही है, भारत यूरोप के लिए एक भरोसेमंद और तेजी से उभरता हुआ साझेदार बनकर सामने आया है.
ERT यानी यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री यूरोप की सबसे प्रभावशाली बिजनेस संस्थाओं में से एक है. इसमें यूरोप की करीब 55 बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के चेयरमैन और CEO शामिल हैं, जो यूरोप की आर्थिक और औद्योगिक नीतियों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

भारत और स्वीडन ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और स्वीडन के उनके समकक्ष उल्फ क्रिस्टर्सन के बीच रविवार को व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर वार्ता के बाद भारत और स्वीडन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई. दो दिवसीय यात्रा पर स्वीडन पहुंचे मोदी को भारत-स्वीडन संबंधों में उनके असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ सम्मान से भी सम्मानित किया गया.

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-स्वीडन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक उपलब्धि माना जा रहा है. क्रिस्टर्सन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हर क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को देखते हुए हमने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है. इस साझेदारी में हम स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को अपनाने, सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और लोगों के बीच संबंधों पर विशेष ध्यान देंगे.”

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और हरित परिवहन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं. मोदी ने क्रिस्टर्सन और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन की उपस्थिति में कहा, “भारत में आयोजित एआई-इंपैक्ट शिखर सम्मेलन में स्वीडन के प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था. हम स्वीडन-भारत प्रौद्योगिकी और एआई कॉरिडोर पर काम करेंगे.” प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत और स्वीडन के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है.

मोदी ने कहा, “भारत में स्वीडिश कंपनियों द्वारा उत्पादन इकाइयों की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि हम केवल खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे निकलकर दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं.” उन्होंने कहा कि मौजूदा तनावपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों में भारत और स्वीडन जैसे लोकतांत्रिक देशों के बीच करीबी सहयोग का विशेष महत्व है. मोदी ने कहा कि विभिन्न संघर्षों और समस्याओं के समाधान के लिए भारत हमेशा संवाद और कूटनीति पर जोर देता रहा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और स्वीडन इस बात पर सहमत हुए हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती है.

उन्होंने कहा, “पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद स्वीडन से मिले समर्थन के लिए मैं प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन का आभार व्यक्त करता हूं. हम आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे.” मोदी ने कहा कि भारत और स्वीडन के संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और मानव-केंद्रित विकास की मजबूत नींव पर आधारित हैं. उन्होंने कहा, “दोनों देश नवाचार को विकास का माध्यम मानते हैं, स्थिरता को साझा जिम्मेदारी समझते हैं और लोकतंत्र को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं.”

दोनों देशों के स्टार्टअप और शोध पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए भारत-स्वीडन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है. मोदी ने कहा, “लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन हमारी साझा वैश्विक पहल है, जिसके तहत औद्योगिक क्षेत्र में कम कार्बन उत्सर्जन पर जोर दिया जा रहा है. आज हमने इसके तीसरे चरण की शुरुआत करने का फैसला किया है.” उन्होंने कहा, “भारत में ग्रीन हाइड्रोजन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम हो रहा है. स्वीडन की प्रौद्योगिकी और भारत की क्षमता की मदद से हम पूरी दुनिया के लिए जलवायु समाधान विकसित कर सकते हैं.”

मोदी ने कहा कि जनवरी में उर्सुला फॉन डेर लेयेन की भारत यात्रा के दौरान भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को नयी ऊंचाई तक ले जाने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए थे और उन पर तेजी से प्रगति हो रही है. उन्होंने कहा, “भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता उद्योगों, निवेशकों और नवप्रवर्तकों के लिए नये अवसर खोलेगा। उर्सुला के शब्दों में यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ है.” प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन ने भारत में डिजिटल और एआई के क्षेत्र में हुई प्रगति की सराहना की. उन्होंने स्वीडन की अर्थव्यवस्था और नवाचार पारिस्थितिकी में भारतीय समुदाय के योगदान की भी प्रशंसा की.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने व्यापार एवं निवेश, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों, अंतरिक्ष, उभरती प्रौद्योगिकी, रक्षा एवं सुरक्षा, एमएसएमई, शोध और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. साल 2025 में भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था. दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग आगे बढ़ाने पर सहमति जताई.

बैठक में स्वीडन की क्राउन प्रिंसेज विक्टोरिया भी शामिल हुईं. प्रधानमंत्री मोदी ने गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए मेजबानों का आभार जताया और स्वीडन के सम्राट गुस्ताफ को उनके 80वें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने मैर्स्क के चेयरमैन रॉबर्ट मैर्स्क उग्गला से भी मुलाकात की और भारत में बंदरगाह अवसंरचना, आपूर्ति शृंखला तथा अन्य क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की. मोदी ने भारत में मैर्स्क को समुद्री आपूर्ति शृंखला एवं बंदरगाह अवसंरचना में नये निवेश अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया.

मोदी ने स्वीडिश कंपनियों से विनिर्माण, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की अपील की. मोदी ने क्रिस्टर्सन के साथ चुनिंदा स्वीडिश उद्योगपतियों और कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत में तेजी से हो रहे आर्थिक बदलावों और निवेश के बढ़ते अवसरों को भी रेखांकित किया.

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