दाने-दाने को तरस रहे ईरानी, महंगाई ने तोड़े दूसरे विश्व युद्ध के रिकॉर्ड…………….

पश्चिम एशिया में फरवरी महीने से शुरू हुआ जंग अब ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ता दिख रहा है। अमेरिका और इस्राइल की ओर से किए गए हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर जहां अमेरिका को खूब छकाया है, वहीं उसके इस कदम से वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई भी लगभग […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 9 जून 2026, 09:28 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
दाने-दाने को तरस रहे ईरानी, महंगाई ने तोड़े दूसरे विश्व युद्ध के रिकॉर्ड…………….
Photo: UB India News Archive

पश्चिम एशिया में फरवरी महीने से शुरू हुआ जंग अब ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ता दिख रहा है। अमेरिका और इस्राइल की ओर से किए गए हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर जहां अमेरिका को खूब छकाया है, वहीं उसके इस कदम से वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई भी लगभग ठप पड़ गई और इसका असर बड़े पैमाने पर भारत समेत दुनियाभर के देशों को झेलना पड़ा। हालांकि, जंग का नुकसान ईरान को भी कम नहीं झेलना पड़ा। पहले अपने राष्ट्रप्रमुख और फिर बड़ी संख्या में अपने शीर्षस्थ नेताओं को गंवाने के बाद अब ईरान की रही-बची इकोनॉमी भी खस्ताहाल हो गई है।

ईरान के बाजार इन दिनों खरीदारों की भीड़ से नहीं, बल्कि मायूस चेहरों से भरे हैं। आम आदमी के लिए ‘रेड मीट (लाल मांस) जुटाना अब एक सपना बन गया है और चिकन का इस्तेमाल अब सिर्फ मेहमानों के लिए होने लगा है। जंग से आहत ईरान में यह दर्द किसी एक परिवार का नहीं, बल्कि ईरान के लाखों घरों की कहानी है। सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान के ताजा आंकड़ों ने तो पूरी दुनिया को चौंका दिया है। देश में महंगाई 80 साल के शिखर पर पहुंच गई है।

आखिर तेल के कुओं पर बैठा देश ईरान एक भयावह आर्थिक दलदल में कैसे फंस गया? क्या यह सिर्फ युद्ध का नतीजा है या दशकों की खराब नीतियां इसका कारण हैं? आइए, आसान बोलचाल की भाषा में आठ सवालों के जरिए इस पूरे संकट को समझते हैं।

ईरान की अमेरिका को चेतावनी
ईरान की अमेरिका को चेतावनी

ईरान में मौजूदा महंगाई के आंकड़े कितने डरावने हैं?

सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 21 अप्रैल से 20 मई के बीच वार्षिक महंगाई दर 77.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। सामानों की प्वाइंट-टू-प्वाइंट महंगाई दर 113 प्रतिशत दर्ज की गई है। सबसे खौफनाक बात यह है कि 1942 (दूसरे विश्व युद्ध) के बाद ईरान में महंगाई का यह सबसे ऊंचा स्तर है। उस समय युद्ध के कारण खाद्य आपूर्ति शृंखलाएं (फूड सप्लाई चेन) टूट गई थीं और आज भी कुछ ऐसे ही हालात बन रहे हैं।

क्या सच में आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गया है खाना-पीना?

बिल्कुल। एक साल पहले एक किलो चावल की कीमत 18 लाख रियाल ($1.31) थी, जो अब 50 लाख रियाल ($3.63) के पार जा चुकी है। कुकिंग ऑयल (खाना पकाने का तेल प्रति लीटर) सात लाख रियाल से बढ़कर 30 लाख रियाल के ऊपर पहुंच गया है। आम गृहिणियां अब अंडे तक गिन-गिन कर इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।  महंगाई की यह रफ्तार इतनी तेज है कि मध्यम वर्ग और पेंशन पर निर्भर लोग पहली बार गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हो गए हैं।

सवाल: क्या यह भयानक महंगाई सिर्फ अमेरिका-इस्राइल युद्ध का नतीजा है?

सिर्फ युद्ध इसका इकलौता कारण नहीं है। यह सच है कि युद्ध शुरू होने के बाद जनता में घबराहट फैल गई और उन्होंने जरूरी सामानों की जमाखोरी शुरू कर दी, इसके कारण बिना किसी भारी कमी के ही कीमतें आसमान छूने लगीं। लेकिन ईरान चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख अरमान खालेघी इसे ‘परफेक्ट इकॉनोमिक स्टॉर्म’ (पांच कारकों का मिला-जुला तूफान) मानते हैं।

ईरान को तेल बिक्री पर नहीं मिलेगी छूट
ईरान को तेल बिक्री पर नहीं मिलेगी छूट

यह ‘परफेक्ट इकॉनोमिक स्टॉर्म’ क्या है जिसने अर्थव्यवस्था को तोड़ दिया?

खालेघी के अनुसार, ये पांच प्रमुख कारण एक साथ ईरान पर बरसे हैं:

  1. बुनियादी चीजों के आयात के लिए दी जाने वाली सब्सिडी वाली मुद्रा दर को खत्म करना।
  2. साल की शुरुआत में हुए भारी विरोध प्रदर्शन, जिन्होंने सुरक्षा और बाजार दोनों को हिला दिया।
  3. अमेरिका-इस्राइल युद्ध से पैदा हुई अफरा-तफरी।
  4. नए फारसी वर्ष की शुरुआत में वेतन और ऊर्जा (ईंधन) की कीमतों में बढ़ोतरी।
  5. नौसैनिक नाकेबंदी (होर्मुज की नाकेबंदी), इसने आयात-निर्यात को लगभग रोक दिया।

नौसैनिक नाकेबंदी ने महंगाई को कैसे भड़काया?

समुद्री रास्तों से मालवाहक जहाजों का ईरान आना अब एक जानलेवा और जोखिम भरा काम बन गया है। किसी जहाज पर हमले की महज एक खबर से ही बाजार में कीमतें बढ़ जाती हैं। मजबूरन आयातकों को सड़क के रास्ते माल मंगाना पड़ रहा है, जो बहुत महंगा है। इससे बाजार में सामान की कमी का डर फैल गया है, जो कीमतों को बेतहाशा बढ़ा रहा है।

2019 के बाद पहली बार भारत आ रहा ईरान से तेल का जहाज
2019 के बाद पहली बार भारत आ रहा ईरान से तेल का जहाज

सरकार ने तो मजदूरी (वेतन) बढ़ाई थी, फिर भी लोगों को राहत क्यों नहीं मिली?

कागजों पर सैलरी जरूर बढ़ी, लेकिन असलियत में वह महंगाई के आगे बौनी साबित हुई। इसका नतीजा यह हुआ कि लोगों की ‘असल क्रय शक्ति’ बुरी तरह गिर गई है। महंगाई आम लोगों की ओर से पहले से जुटाई गई जमा-पूंजी को निगल रही है, फिर स्वास्थ्य और शिक्षा का बजट खा रही है, और अब सीधा असर दो वक्त की रोटी पर पड़ रहा है।

आम ग्राहकों की छोड़िए, ईरान के बाजारों और व्यापारियों का क्या हाल है?

दुकानदारों का कहना है कि बाजार दिखने में जिंदा लगता है, लेकिन असल में यह ‘क्लिनिकली डेड’ (कोमा में) है। ग्राहक अब बाजार में सिर्फ टहलने आते हैं क्योंकि कीमतें देखकर वे खाली हाथ लौट जाते हैं। थोक व्यापारियों के मुताबिक, 40 साल के इतिहास में, यहां तक कि भारी प्रतिबंधों के दौर में भी, उन्होंने इतनी भयानक मंदी नहीं देखी। व्यापारी अब मुनाफा नहीं कमा रहे हैं, बल्कि सिर्फ अपने पुश्तैनी कारोबार को दिवालिया होने से बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

क्या इस संकट की जड़ें पुरानी हैं, या यह सिर्फ आज की बीमारी है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आज का नहीं, बल्कि दशकों पुरानी गलत नीतियों का परिणाम है। ईरान दशकों तक अपनी अर्थव्यवस्था की कमजोरियों को ‘पेट्रो-डॉलर’ (तेल से होने वाली भारी कमाई) के मलहम से छिपाता रहा। अब जब उस ‘एनेस्थीसिया’ (बेहोशी की दवा) का असर खत्म हो गया है, तो सारी बीमारियां एक साथ उभर आई हैं।

आगे क्या?

अर्थशास्त्रियों की चेतावनी है कि ईरान मौजदा समय में जिस स्थिति में है, वह महज ‘टिप ऑफ आइसबर्ग’ है। अर्थव्यवस्था ‘ना युद्ध-ना शांति’ वाले एक बेहद खतरनाक और अस्थिर दौर में फंसी हुई है, जो किसी भी चरमराती अर्थव्यवस्था के लिए सबसे खतरनाक साबित हो सकता है।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
नेपाल में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 734 हुआ, 2500 से ज्यादा अभी भी लापता
समाचार

नेपाल में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 734 हुआ, 2500 से ज्यादा अभी भी लापता

नेपाल में बाढ़ के कारण आई आपदा में 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अभी भी अलग-अलग जगहों पर राहत और बचाव टीमें अभियान चला रही हैं। हजारों लोग लापता हैं। इस बीच यहां दूसरी बार भयंकर बाढ़ की चेतावनी दी गई है। तिब्बत के पहाड़ों में बर्फ का टुकड़ा टूटने से तबाही आई थी। पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा और बड़ी चट्टानें बहकर आई थीं, जिससे जमकर तबाही हुई। अब दोबारा तिब्बत में ऐसे हालात बने हैं, जिसके कारण फिर से भारी मात्रा में पानी और मलबा निचले इलाकों में आ सकता है और इसके रास्ते में आने वाली हर चीज तबाह हो जाती है।

UB India News Desk30 अग॰
नेपाल बाढ़ : अब तक 626 लोगों की मौत; 2400 से ज्यादा लापता
अन्तर्राष्ट्रीय

नेपाल बाढ़ : अब तक 626 लोगों की मौत; 2400 से ज्यादा लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण 626 लोगों की मौत हुई है। 2400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इनमें करीब 30 देशों के नागरिक शामिल हैं। भारत के कई पर्यटकों ने सुरक्षित स्वदेश वापसी के बाद राहत की सांस ली। हालांकि, उन्होंने जलप्रलय और बाढ़ की विभीषिका पर रोंगटे खड़े करने वाले […]

UB India News29 अग॰
नेपाल में आई भयानक बाढ़ में हजारों की तादाद में लोग लापता ,180 लोगों की मौत, 300 भारतीय की तलाश जारी…………
अन्तर्राष्ट्रीय

नेपाल में आई भयानक बाढ़ में हजारों की तादाद में लोग लापता ,180 लोगों की मौत, 300 भारतीय की तलाश जारी…………

नेपाल ने एक बार फिर से बुधवार को ऐतिहासिक विनाश देखा है. यहां बड़ी संख्या में लोग चीन के तिब्बत क्षेत्र से भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ में बह गए. बाढ़ में कम से कम 180 लोगों की मौत की खबर है. इस प्राकृतिक आपदा में कई देशों के लोग लापता है. करीब 1500 […]

UB India News27 अग॰
प्रकृति की शक्ति के सामने मनुष्य की तैयारियां अब भी अपर्याप्त हैं……………………….
अन्तर्राष्ट्रीय

प्रकृति की शक्ति के सामने मनुष्य की तैयारियां अब भी अपर्याप्त हैं……………………….

नेपाल के पहाड़ी जिले रसुवा में तिब्बत सीमा के निकट भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी और आपदा-प्रबंधन की सीमाओं को एक बार फिर सामने ला दिया है। अचानक आई इस बाढ़ से भारी मानवीय क्षति के साथ मकानों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को हुए नुकसान ने […]

UB India News27 अग॰
ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर में अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में वीज़ा अपॉइंटमेंट को क्यों रोका………….
खास खबर

ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर में अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में वीज़ा अपॉइंटमेंट को क्यों रोका………….

अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर में अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में वीज़ा अपॉइंटमेंट को रोक दिया है या उनका समय बदल दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, सभी विदेशी राजनयिक केंद्रों पर एक ग्लोबल ट्रेनिंग प्रोग्राम को लागू करने के लिए वीज़ा सेवाओं के अपॉइंटमेंट को रोका गया है। अमेरिकी […]

UB India News26 अग॰
इस्लामाबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में भीषण आग, 15 नवजातों की जलकर मौत
खास खबर

इस्लामाबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में भीषण आग, 15 नवजातों की जलकर मौत

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के एक अस्पताल में आग लगने से 15 नवजात बच्चों की मौत हो गई। यह हादसा पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) के गायनेकोलॉजी वार्ड में हुआ। पाकिस्तान के जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त वार्ड की नर्सरी में 16 नवजात शिशु थे जिनमें […]

UB India News26 अग॰
नेतन्याहू ने ब्रिटेन को ‘इस्लामी गणतंत्र’ क्यों  कहा
खास खबर

नेतन्याहू ने ब्रिटेन को ‘इस्लामी गणतंत्र’ क्यों कहा

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बीते दिनों ब्रिटेन को ‘इस्लामी गणतंत्र’ की संज्ञा दे डाली। दो साल पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चुनाव प्रचार के दौरान मजाक में कहा था कि ब्रिटेन पहला परमाणु शक्ति संपन्न इस्लामी गणतंत्र बनने वाला है। उस पर ब्रिटेन की पूर्व गृहमंत्री सुवेला ब्रावरमैन ने कहा था, ‘वेंस साहब […]

UB India News24 अग॰
इमरान खान से बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल में की मुलाकात …………
खास खबर

इमरान खान से बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल में की मुलाकात …………

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से उनकी बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल में मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुलाकात हुई। नोरीन 9 महीने बाद इमरान से मिलीं। करीब 15 मिनट की मुलाकात में परिवार ने इमरान की सेहत के बारे में पूछा। उन्होंने उन्हें सुप्रीम […]

UB India News19 अग॰
अमेरिका-ईरान की 60 दिन की डील आज खत्म, अब क्या होगा?
खास खबर

अमेरिका-ईरान की 60 दिन की डील आज खत्म, अब क्या होगा?

मिडिल ईस्ट में जारी जंग को खत्म करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच जो अंतरिम समझौता (MoU) हुआ था, वह सोमवार, 17 अगस्त को खत्म होने वाला है. दोनों देशों की तरफ से अभी तक इस समझौते को आगे बढ़ाने को लेकर कोई साफ संकेत नहीं मिला है. इस अंतरिम समझौते के तहत […]

UB India News17 अग॰