क्या फिर गहराएगा ऊर्जा संकट? फिर भिड़ गए ईरान-अमेरिका, IRGC ने गिराया MQ-9 ड्रोन

अमेरिका ने बुधवार को ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए. अमेरिकी सेना ने इन हमलों को शक्तिशाली बताया है. अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई. इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 8 जुलाई 2026, 06:01 AM 9 मिनट read
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क्या फिर गहराएगा ऊर्जा संकट? फिर भिड़ गए ईरान-अमेरिका, IRGC ने गिराया MQ-9 ड्रोन
Photo: UB India News Archive
अमेरिका ने बुधवार को ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए. अमेरिकी सेना ने इन हमलों को शक्तिशाली बताया है. अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई. इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया था. इसी के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ ठिकानों पर हमले किए. इन सैन्य हमलों से कुछ ही समय पहले अमेरिका ने ईरान को दी गई एक अस्थायी प्रतिबंध छूट भी वापस ले ली. इस छूट के तहत ईरान को जून में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के आधार पर कच्चे तेल का उत्पादन, बिक्री और आपूर्ति करने की अनुमति मिली हुई थी. यह छूट 21 अगस्त तक लागू रहने वाली थी, लेकिन अमेरिका ने इसे समय से पहले ही समाप्त कर दिया.

अब तक क्या-क्या हुआ?

  • होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन जहाजों, जिनमें कतर और सऊदी अरब के तेल टैंकर भी शामिल हैं, पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान पर शक्तिशाली सैन्य हमले शुरू कर दिए.
  • ईरानी मीडिया के मुताबिक ईरान के सीरिक बंदरगाह शहर, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप में कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गई हैं.
  • अमेरिका ने 17 जून को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते के तहत ईरान को तेल बेचने की दी गई विशेष छूट (वेवर) भी रद्द कर दी है.

IRGC ने किया दावा- बहरीन के शेख ईसा एयर बेस को बनाया निशाना

ईरान की सेना ने दावा किया है कि उसने बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया है. ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई दक्षिणी ईरान पर अमेरिका के ताजा हवाई हमलों के जवाब में की गई. ईरानी सेना ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका ने बार-बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है. सेना ने चेतावनी दी कि अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब ईरान के सैन्य ड्रोन के वैध लक्ष्य होंगे. यह बयान ऐसे समय आया है, जब बहरीन में आज सुबह दूसरी बार एयर रेड सायरन बजाए गए. गृह मंत्रालय ने लोगों से शांत रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है. इससे पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया था कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सेना के 85 सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों में निशाना बनाया है.

बहरीन में फिर बजे एयर रेड सायरन

बहरीन में आज सुबह दूसरी बार एयर रेड सायरन बजाए गए हैं. इसके बाद गृह मंत्रालय ने लोगों से शांत रहने और तुरंत अपने सबसे नजदीकी सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की है. गृह मंत्रालय ने कहा कि सायरन एहतियात के तौर पर बजाए गए हैं और लोगों को सुरक्षा संबंधी सभी सरकारी निर्देशों का पालन करना चाहिए. यह आज सुबह दूसरी बार है, जब पूरे देश में एयर रेड सायरन बजाए गए हैं. अधिकारियों की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आगे की जानकारी मिलने पर नए अपडेट जारी किए जाएंगे.

ईरान का दावा- बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर किया हमला

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अपनी नौसेना और एयरोस्पेस बलों के साथ मिलकर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया है. ईरान के अनुसार, इस अभियान में बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सेना के 85 अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया. IRGC का कहना है कि हमले में बहरीन स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े (US Fifth Fleet) के मुख्यालय और कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस को भी निशाना बनाया गया. ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से संघर्ष विराम और इस्लामाबाद समझौते के कथित उल्लंघन के जवाब में की गई है. IRGC के मुताबिक, अमेरिका ने इससे पहले होर्मोज़गान और माहशहर में तटीय ठिकानों और गैर-सैन्य स्थानों पर हवाई हमले किए थे.

अमेरिका ने फिर किए ईरान पर हमले, ट्रंप के वादे पर उठे सवाल

अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर नए सैन्य हमले किए हैं। ये हमले ऐसे समय हुए हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के सात दिन के शोक और अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका कोई हमला नहीं करेगा. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है. वॉशिंगटन के अनुसार, इन जहाजों की सुरक्षा के लिए जवाबी सैन्य कार्रवाई जरूरी थी. इन ताजा हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है.

 IRGC का दावा- बुशेहर के ऊपर अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बुशेहर प्रांत के खोरमुज क्षेत्र के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है.  ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, IRGC के प्रवक्ता हुसैन मोहबी ने कहा कि अमेरिकी सेना की ओर से कथित हवाई कार्रवाई के बाद ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ड्रोन को निशाना बनाया और उसे गिरा दिया. हालांकि, इस दावे की अभी तक अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में अमेरिका पर समझौता ज्ञापन (MoU) के कई बड़े उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.  गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका ने कई ऐसे कदम उठाए हैं, जो दोनों देशों के बीच हुए समझौते के खिलाफ हैं. गालिबाफ का कहना है कि इन कदमों से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है तथा अमेरिका ने समझौते की भावना का सम्मान नहीं किया.

अमेरिका-ईरान समझौते पर क्यों मंडराया खतरा?

अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति देने वाला लाइसेंस रद्द कर दिया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। वित्त विभाग ने पिछले महीने 60 दिनों के लिए यह लाइसेंस जारी किया था। दोनों देशों के बीच संघर्ष खत्म करने के लिए हुए अंतरिम समझौते के तहत ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में यह छूट दी गई थी।

हालांकि, वित्त विभाग के अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि लाइसेंस किस वजह से रद्द किया गया। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ब्रिटिश सेना ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर ड्रोन हमला किया गया। यह हाल के दिनों में इस अहम समुद्री मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर हुआ ताजा हमला है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।

पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए बातचीत भी जारी है। हालांकि, अमेरिका के इस फैसले के बाद ईरान के साथ हुए उसके हालिया समझौते पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। यह समझौता कितने दिन तक कायम रहेगा, इसे लेकर असमंजस बरकरार है।

इसकी एक अहम वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच जारी तीखी बयानबाजी है। सोमवार को ट्रंप ने ऐसा ही कुछ कहा, जिसका जवाब ईरान की ओर से आया। ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि धमकियों से काम नहीं चलेगा।

‘अगर धमकियों का सिलसिला जारी रहा, तो अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू नहीं होगी’
अब्बास अराघची ने कहा कि अगर धमकियों का सिलसिला जारी रहा, तो अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू नहीं होगी। उन्होंने इस संबंध में अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के पैराग्राफ 13 का हवाला दिया। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा,”लाखों गौरवान्वित ईरानी” सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए एकत्र हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “न तो ईरानी जनता और न ही हमारी बहादुर सशस्त्र सेनाएं किसी भी तरह की धमकियों से प्रभावित होंगी। अपने हस्ताक्षर का सम्मान करें।” अराघची की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका या तो ईरान के साथ समझौता करेगा या फिर “काम तमाम करेगा”।

डील होगी या होगा काम तमाम :ट्रंप
ट्रंप के मुताबिक या तो डील होगी या ईरान का काम तमाम होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक उन्हें ईरान के साथ फिर जंग नहीं चाहिए; वे सैन्य कार्रवाई नहीं चाहते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “मैं तो ईरान के साथ डील करना चाहूंगा; मैं नहीं चाहता कि 91 मिलियन लोगों की जिंदगी प्रभावित हो। हम अगर चाहें तो एक घंटे में इनके ब्रिज उड़ा सकते हैं। हम इनकी एनर्जी सप्लाई ध्वस्त कर देंगे। इनके पास कभी बहुत पैसा होता था, लेकिन अब कुछ नहीं है। हमने इन्हें एक पैसा नहीं दिया है।”

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