क्या दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की दहलीज पर खड़ा कर देगी मिडिल ईस्ट की युद्ध ……………….

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच चुका है। तुर्की में चल रहे NATO समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान और उसके ठीक पहले अमेरिकी सेना की तरफ से ईरान पर किए गए ताबड़तोड़ हमलों ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। अब सवाल […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 9 जुलाई 2026, 02:44 AM 7 मिनट read
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क्या दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की दहलीज पर खड़ा कर देगी मिडिल ईस्ट की युद्ध ……………….
Photo: UB India News Archive

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच चुका है। तुर्की में चल रहे NATO समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान और उसके ठीक पहले अमेरिकी सेना की तरफ से ईरान पर किए गए ताबड़तोड़ हमलों ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। अब सवाल ये है कि क्या मिडिल ईस्ट एक बार फिर भयंकर युद्ध की आग में झुलसने वाला है? क्या अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता हमेशा के लिए खत्म हो चुका है?

ट्रंप ने कही अब ईरान से डील नहीं करने की बात
दरअसल, NATO समिट से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के शेयर बाजार और ऑयल मार्केट में हड़कंप मचा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ-साफ लफ्जों में कह दिया है कि ईरान के साथ हुआ सीजफायर अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। और अब वह ईरान से कोई डील नहीं करना चाहते। ट्रंप ने कहा हमने पिछली रात ईरान पर जोरदार हमला किया। खतरनाक लोगों को निशाना बनाया। हर बार वे हमला करेंगे, तो हम जवाब देंगे। अमेरिकी सेना CENTCOM यानी अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसा दी हैं।

अचानक कैसे टूट गया सीजफायर?
आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि चंद दिनों पहले हुआ समझौता टूट गया? चलिए समझते हैं। मामले को समझने के लिए हमें कुछ दिन पीछे जाना होगा। इसी साल, 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता (MoU) हुआ था, जिसके तहत दोनों देशों के बीच 60 दिनों का एक कूलिंग-ऑफ पीरियड तय हुआ था ताकि एक बड़ा न्यूक्लियर समझौता किया जा सके। अमेरिका ने इसके बदले ईरान को तेल बेचने के लिए प्रतिबंधों में थोड़ी छूट भी दी थी। लेकिन ईरान ने इस समझौते की शर्तों का उल्लंघन करना शुरू कर दिया।

Hormuz में जहाजों पर ईरानी हमलों ने बिगाड़े हालात
विवाद की असली जड़ है Strait of Hormuz, जहां से दुनिया का करीब 20 फीसदी कच्चा तेल और गैस गुजरती है। ईरान ने इस रूट पर अपना दबदबा दिखाने के लिए 3 अंतरराष्ट्रीय जहाजों को ये कहते हुए निशाना बनाया कि जो जहाज तय रूट से नहीं जाएंगे उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी। होर्मुज से गुजर रहे इन 3 बड़े कमर्शियल जहाजों में कतर का एक LNG टैंकर ‘Al Rekayyat’, सऊदी अरब का जहाज ‘Wedyan’ और लाइबेरिया का जहाज शामिल था। अमेरिका ने इसे सीजफायर का सीधा और बड़ा उल्लंघन माना। इसके बाद ट्रंप का सब्र टूट गया।

ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर अमेरिका का पलटवार
जिस वक्त ईरान की तरफ से ये हमला हुआ उस डोनाल्ड ट्रंप, तुर्की में NATO समिट में भाग ले रहे थे। उन्होंने वहीं से अमेरिकी सेंट्रल कमांड को ईरान पर सीधे और आक्रामक पलटवार के आदेश दे दिए। साथ ही ईरान को तेल निर्यात पर मिली छूट तुरंत रद्द कर दी। इसके बाद अमेरिकी लड़ाकू विमानों और प्रिसिजन मिसाइलों ने ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर बमबारी की।

ट्रंप ने खुद शेयर किया ईरान पर हमले का वीडियो
ट्रंप ने खुद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस तबाही का एक छोटा वीडियो शेयर किया, जिसमें लगातार भीषण धमाके होते दिख रहे हैं। अमेरिका की तरफ से ईरान पर किए गए हमले को ट्रंप ने इन जहाजों पर हुए हमले का बदला बताया। CENTCOM के आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह हमला बेहद सटीक और विनाशकारी था। अमेरिका का मुख्य मकसद ईरान की उस क्षमता को कुचलना था जिससे वह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को डराता है। इस अमेरिकी सैन्य हमले में ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम टारगेट किया गया ताकि अमेरिकी विमानों को कोई खतरा न रहे।

ईरान की सेना के कम्युनिकेशन सिस्टम को किया टारगेट
इसके अलावा कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क्स पर भी अटैक करके ईरान की सेना के कम्युनिकेशन सिस्टम को ठप कर दिया गया। साथ ही, तटीय रडार साइट्स पर निशाना लगाया जिससे ईरान समुद्र में जहाजों की मूवमेंट ट्रैक करता था। इसके अलावा, एंटी-शिप मिसाइल कैपेबिलिटी जो जहाजों को उड़ाने के लिए तैनात थीं उन्हें भी तबाह कर दिया गया।

ट्रंप ने ईरान को बताया धोखेबाज और बीमार
वहीं, अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दर्जनों मिसाइलें दागकर जवाबी कार्रवाई की। वहीं नाटो समिट के दौरान जब पत्रकारों ने राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा कि क्या ईरान के साथ सीजफायर अभी भी बरकरार है? तो ट्रंप ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि ईरान के साथ बातचीत करना सिर्फ और सिर्फ समय की बर्बादी है। वे झूठे हैं, धोखेबाज हैं और बीमार लोग हैं। उनके नेता बीमार मानसिकता के हैं। वे बेहद क्रूर और हिंसक लोग हैं, अगर उनके हाथ में न्यूक्लियर हथियार आ गया, तो वे उसका इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकेंगे। मेरे हिसाब से अब डील का कोई मतलब नहीं है।

किसी भी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं ट्रंप
ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अब अमेरिका ईरान को किसी भी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है। इस एक घटना ने दुनिया को भी पूरी तरह से हिला दिया है। अमेरिका के हमले के तुरंत बाद इसके कई बड़े असर तुरंत देखने को मिले हैं। ट्रंप के बयान के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 6 प्रतिशत तक बढ़ गईं। अगर यह तनाव लंबा चला, तो भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है।

NATO सचिव ने किया अमेरिकी एक्शन का समर्थन
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने इस पर चिंता जताई है और कहा है कि इस जवाबी कार्रवाई से खाड़ी देशों में शांति बहाल करने की कोशिशों को गहरा झटका लगा है। हालांकि, NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रुटे ने पूरी तरह से अमेरिका के इस एक्शन का समर्थन किया है। वहीं, अगर ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज किए, तो यह सीधे तौर पर एक फुल-स्केल वॉर में बदल सकता है।

अमेरिका-ईरान में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं
ट्रंप की पॉलिसी ने एक बार फिर ईरान को बैकफुट पर धकेल दिया है, लेकिन ईरान का पलटवार इस बात का संकेत है कि वो भी आसानी से झुकने वाला नहीं है। क्या ट्रंप का यह आक्रामक रुख ईरान को सीधे बातचीत की मेज पर लाएगा, या फिर मिडिल ईस्ट में एक और विनाशकारी युद्ध की शुरुआत हो चुकी है ये बड़ा सवाल दुनिया के सामने बना हुआ है।

दांव पर अमेरिका और ईरान की साख
एक तरफ, दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका है, जो अपनी ‘सुपरपावर’ की साख और ग्लोबल ट्रेड रूट्स को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। तो वहीं दूसरी तरफ ईरान है, जो तमाम आर्थिक प्रतिबंधों और हमलों के बावजूद झुकने को तैयार नहीं है और अपने ‘प्रॉक्सी नेटवर्क’ के दम पर अमेरिका को लगातार आंखें दिखा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का यह हमला और सीजफायर को खत्म करने का ऐलान ये साफ करता है कि अब पानी सिर के ऊपर जा चुका है। लेकिन सवाल ये है कि इस जंग की कीमत कौन चुकाएगा?

युद्ध बढ़ा तो पूरी दुनिया की इकोनॉमी पर पड़ेगा असर
इस टकराव का असर सिर्फ इन दोनों देशों पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। तेल की बढ़ती कीमतें, महंगाई और एक और युद्ध का डर पूरी दुनिया को पीछे धकेल देगा या ट्रंप की यह ‘आर-पार’ की नीति ईरान को घुटनों पर ले आएगी, या फिर ईरान का ये पलटवार दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की दहलीज पर खड़ा कर देगा? ये देखने वाली बात होगी।

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