इस परंपरा से जुड़े लोगों के अनुसार, 14 अगस्त 1947 की आधी रात रेडियो पर देश की आजादी की घोषणा हुई थी. इसके बाद भट्ठा बाजार में रहने वाले स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह समेत कई लोगों ने झंडा चौक पर तिरंगा फहराया था. तब से लेकर आज तक यह परंपरा जारी है. हर साल 14 अगस्त की रात जैसे ही आधी रात होती है, यहां देशभक्ति के माहौल के बीच तिरंगा फहराया जाता है. रामेश्वर प्रसाद सिंह के पौत्र विप्लव सिंह का कहना है कि उनके दादा और स्थानीय लोगों ने आजादी मिलने के समय ही यहां झंडोतोलन किया था. इसके बाद इसे हर साल निभाया जाने लगा.
पूर्णिया के इस खास आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल होते हैं. आधी रात को झंडा चौक पर लोगों की भीड़ जुटती है और तिरंगा फहराने के साथ आजादी का जश्न मनाया जाता है. इस साल भी आयोजन में जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे. पूर्णिया सदर विधायक विजय खेमका और महापौर विभा कुमारी ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया. पूर्व आईएएस अधिकारी और जदयू के राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमार वर्मा ने इसे पूर्णिया का गौरवशाली इतिहास बताया. उन्होंने कहा कि यह परंपरा यहां के लोगों के देशप्रेम और आजादी के प्रति सम्मान को दिखाती है.
आजादी के साथ शुरू हुई यह परंपरा अब पूर्णिया की पहचान बन चुकी है. 14 अगस्त की रात होते ही झंडा चौक पर एक अलग माहौल बन जाता है. लोग आधी रात का इंतजार करते हैं और 12 बजकर 1 मिनट पर तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाते हैं. जहां देश के अधिकांश हिस्सों में 15 अगस्त की सुबह झंडोतोलन होता है, वहीं पूर्णिया में आधी रात को तिरंगा फहराने की यह परंपरा आज भी लोगों के बीच खास पहचान बनाए हुए है.








