क्या बीते करीब ढाई साल से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के अब थमने के आसार दिखने लगे हैं? क्या पीएम नरेंद्र मोदी के एक बार फिर रूस जाने से स्थिति में काफी बदलाव होगा? क्या अब रूस यह युद्ध बंद करने की योजना पर काम करने लगा है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिसके बारे में सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा जा सकता है. लेकिन, बीते कुछ दिनों में रूस के रुख को देखते हए कहा जा सकता है कि इसकी संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी यूक्रेन युद्ध को लेकर फिक्रमंद रहते हैं। रूस में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन विवाद पर सवाल हुआ था। इस पर जवाब देते हुए रूसी प्रेसीडेंट ने कहा कि जब भी बातचीत होती है तो पीएम मोदी हर बार इस मुद्दे (यूक्रेन-रूस युद्ध) को उठाते हैं और अपने विचार व्यक्त करते हैं। इसके लिए हम पीएम मोदी आभार भी व्यक्त करते हैं।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस दौरान कहा कि यूक्रेन में युद्ध की समाप्ति के लिए समयसीमा तय करना आसान नहीं है। इसकी कोई समय सीमा तय करना मुश्किल और प्रतिकूल होगा। हालांकि उन्होंने रूस की जीत का दावा जरूर किया। दरअसल भारत के रूस से दशकों पुराने संबंध हैं और यूक्रेन से भी अच्छे रिश्ते हैं। इस साल पीएम मोदी रूस और यूक्रेन दोनों देशों का दौरा कर चुके हैं। ऐसे में उनकी किसी शांति समझौते में भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती रही है। रूस और यूक्रेन फरवरी, 2022 से युद्ध में उलझे हुए हैं।
दरअसल, 26 फरवरी 2022 से जारी इस जंग में अब तक बड़ी तबाही देखी है. इस जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है. यूरोप सहित दुनिया के तमाम देशों में ऊर्जा की किल्लत देखी गई. भारत पर भी इस जंग का व्यापक असर हुआ है. लेकिन, बीते कुछ महीनों से भारत खासकर पीएम नरेंद्र मोदी इस जंग को खत्म कराने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात करने उनके-उनके देश गए. फिर पीएम मोदी के बतौर दूत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी पुतिन से मुलाकात की. उधर, विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका, फ्रांस और अन्य देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं.
इन तमाम कोशिशों का अब असर दिखने लगा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर रूस जाने वाले हैं. वह ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में भाग लेने मास्को जा रहे हैं. इससे पहले वह जुलाई में मास्को गए थे. उसके कुछ दिनों बाद अगस्त में वह यूक्रेन गए. रूस अगले सप्ताह तातारस्तान के कजान शहर में 16वें वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 22 से 23 अक्टूबर तक होने वाले इस शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे. मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शामिल होने के बाद यह समूह का पहला शिखर सम्मेलन होगा. ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के मूल सदस्य देश हैं.
युद्धबंदियों की रिहाई
रूस और यूक्रेन ने युद्धबंदियों की रिहाई का एक समझौता किया है. बीते दिनों दोनों ने 90-90 युद्धबंदियों को रिहा किया. इस मौके पर लोगों के चेहरे की मुस्कान देखने लायक थी. उनके भीतर इस बुरे वक्त के खत्म होने की उम्मीद थी. वे अपने जीवन साथियों और परिवार वालों से मिलकर बेहद खुश नजर आ रहे थे.
उधर, रूस ने इस जंग को एक और अहम बयान दिया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर ने कहा कि यूक्रेन के साथ जंग खत्म करने पर बातचीत के लिए सऊदी अरब एक सही जगह है. जंग खत्म करने को लेकर रूस और यूक्रेन के राजनयिकों के बीच बैक डोर से बातचीत शुरू हो गई है. इस बैक डोर वार्ता की शुरुआत तुर्की की मदद से हुई है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि पीएम मोदी के रूस जाने के बाद इस जंग को खत्म कराने की दिशा में कुछ और प्रगति होगी. क्योंकि अब मुद्दा बातचीत पर केंद्रित होता दिखा रहा है. इससे पहले अगस्त 2024 में भी दोनों देशों ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की पहल पर 115-115 युद्ध बंदियों को रिहा किया था.
रूस में अगले हफ्ते होगा ब्रिक्स सम्मेलन
रूस के कजान में अगले हफ्ते ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। ब्रिक्स के बारे में शुक्रवार को विदेशी पत्रकारों के साथ बातचीत में व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि यह गुट ‘पश्चिम विरोधी’ नहीं है। यह सिर्फ एक ‘गैर-पश्चिम’ समूह है और यह ब्रिक्स मेंबर भारत का रुख है। पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स के दरवाजे नए सदस्यों के लिए बंद नहीं हैं। आने वाले समय में जैसे-जैसे समूह बढ़ेगा तो गैरसदस्य देशों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा।
व्लादिमीर पुतिन ने इस दौरान अमेरिका पर चीन में विकास को रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया। पुतिन ने कि यह सूरज से यह कहने जैसा है कि वह उगना बंद कर दे लेकिन ऐसा हो नहीं पाएगा। उन्होंने ये भी बताया कि फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को भी ब्रिक्स के कार्यक्रमों के लिए आमंत्रित किया गया है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की 16वीं बैठक रूस के कजान में आयोजित की जाएगी। ब्रिक्स के इस साल के शिखर सम्मेलन का विषय ‘वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ है। ग्रुप के नौ सदस्यों तक विस्तार होने के बाद यह पहला शिखर सम्मेलन है। मिस्र, ईरान, इथियोपिया और यूएई इस साल दक्षिण अफ्रीका में 2023-समिट में सदस्यता की पेशकश के बाद ग्रुप में शामिल हुए थे।








