मणिपुर में फिर क्यों शुरू हुई हिंसा!

मणिपुर में मैतेई समुदाय और कुकी जनजाति के बीच 19 महीने पहले शुरू हुआ हिंसा का सिलसिला अब भी थमा नहीं है. राज्य में पिछले 12 दिनों में 19 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं एक साल में अब तक कम से कम 250 लोगों की मौत हुई है और 50 हज़ार से ज़्यादा […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 20 नवंबर 2024, 08:38 AM 7 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
मणिपुर में फिर क्यों शुरू हुई हिंसा!
Photo: UB India News Archive

मणिपुर में मैतेई समुदाय और कुकी जनजाति के बीच 19 महीने पहले शुरू हुआ हिंसा का सिलसिला अब भी थमा नहीं है. राज्य में पिछले 12 दिनों में 19 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं एक साल में अब तक कम से कम 250 लोगों की मौत हुई है और 50 हज़ार से ज़्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं.

वर्तमान में इंफाल घाटी में हालात काफी तनावपूर्ण हैं, और जिरीबाम जिले में भी तोड़फोड़ और हिंसा की खबरें आ रही है. राज्य में बिगड़ते कानून-व्यवस्था को देखते हुए कई जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है और इंटरनेट भी बंद कर दिया गया है.

मणिपुर में बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं. ऐसे में इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि आखिर बीजेपी की सरकार होने के बाद भी मणिपुर में हो रही हिंसा पर अब तक क्यों नहीं काबू किया जा सका, अब केंद्र के पास क्या विकल्प है?

हिंसा को रोकने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से क्या किया गया

1. इंटरनेट सेवा का निलंबन

18 नवंबर को मणिपुर प्रशासन ने इंफाल घाटी, कांगपोकपी औऱ चुराचंदपुर जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं के निलंबन को बढ़ा दिया. यह निलंबन गलत जानकारी फैलाने और अशांति के प्रसार को रोकने के लिए लागू किया गया था और यह 20 नवंबर तक जारी रहेगा.

2. नई हिंसा के चलते केंद्र ने सुरक्षा बलों को बढ़ाया

पिछले सप्ताह मणिपुर में फिर से हिंसा का दौर शुरू हुआ, जिसके कारण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चुनावी राज्य महाराष्ट्र में निर्धारित रैलियां रद्द करनी पड़ीं. बढ़ती हिंसा के चलते केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक को उत्तर-पूर्वी राज्य में भेजा गया है ताकि स्थिति का मूल्यांकन किया जा सके और प्रतिक्रिया की योजना बनाई जा सके.

न्यूज-18 की एक रिपोर्ट के अनुसार बढ़ते तनाव के कारण सुरक्षा बलों को आदेश दिया गया है कि जो लोग नुकसान या हिंसा फैला रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाया जाए. उनकी जिम्मेदारी है कि वे हिंसा वाले इलाकों में ऑपरेशन करते हुए शिविरों, घरों और अन्य महत्वपूर्ण जगहों की सुरक्षा करें.

3.  7,000 से ज्यादा सैनिकों को तैनात 

केंद्र सरकार ने मणिपुर में सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 7,000 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात करने का फैसला किया है.  गृह मंत्रालय ने बताया कि विरोधी समुदायों के कुछ सशस्त्र लोग हिंसा फैला रहे हैं, जिससे जानमाल का नुकसान हो रहा है. मंत्रालय ने इन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला लिया है और इन मामलों की गहरी जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है. इसके अलावा, मणिपुर के कुछ इलाकों में सेना को ‘आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट’ (AFSPA) के तहत और अधिकार दिए गए हैं.

क्या है आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) 

आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट’ एक ऐसा कानून है जो भारतीय सेना को विशेष अधिकार देता है. यह कानून उन क्षेत्रों में लागू होता है, जहां पर सुरक्षा की स्थिति बहुत खराब हो और उग्रवाद या आतंकवाद की समस्या हो. इसके तहत, सेना को बिना वारंट के लोगों को गिरफ्तार करने, उनकी तलाशी लेने और उनकी संपत्ति को जब्त करने का अधिकार होता है. इसके अलावा, अगर सेना को लगता है कि कोई व्यक्ति या समूह खतरनाक है, तो वह आत्मरक्षा के लिए हथियारों का उपयोग भी कर सकती है. AFSPA का उद्देश्य उन क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और हिंसा को रोकना है, लेकिन इसके लागू होने पर अक्सर मानवाधिकारों का उल्लंघन होने की शिकायतें भी उठती हैं.

7 नवंबर को फिर से क्यों भड़की मणिपुर में हिंसा

हालिया हिंसा 7 नवंबर को शुरू हुई, जब जिरिबाम जिले में हथियारबंद चरमपंथियों ने कुकी कबीले की एक महिला को गोली मारने के बाद उनको कथित तौर पर मकान समेत जला दिया था. इस घटना के बाद से जिरीबाम में लगातार हिंसा हो रही है.

हिंसा का सिलसिला 11 नवंबर को भी जारी रहा, 11 नवंबर को जिरीबाम जिले में चरमपंथियों के साथ सीआरपीएफ की एक कथित मुठभेड़ भी हुई थी. मणिपुर पुलिस के अनुसार “हथियारबंद चरमपंथियों ने जिरीबाम ज़िले के जकुराडोर इलाक़े में स्थित सीआरपीएफ के एक पोस्ट पर हमला कर दिया. जिसके बाद बचाव में सुरक्षाबलों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की. मणिपुर पुलिस के मुताबिक यह मुठभेड़ लगभग 40 मिनट तक चली और इसके तुरंत बाद पुलिस ने 10 हथियारबंद चरमपंथियों के शव बरामद करने की पुष्टि की थी. मुठभेड़ में मारे गए सभी लोग आदिवासी युवक थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई की मानें तो इस घटना के बाद जिरीबाम जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया. हालांकि मुठभेड़ के कुछ देर बाद ही बोराबेकरा थाने के पास मौजूद एक राहत शिविर से मैतेई समुदाय के एक ही परिवार के छह सदस्य लापता हो गए थे. जिनमें तीन बच्चे भी थे. मैतेई लोगों ने इस अपहरण का आरोप हथियारबंद चरमपंथियों पर लगाया.

इस अपहरण के बाद वहां से मैतई समुदाय के लोगों में काफी भारी आक्रोश था. इंफ़ाल में जगह-जगह महिलाएं विरोध प्रदर्शन भी कर रही थीं. इसी बीच पांच दिन बाद यानी 16 नवंबर को जिरीमुक गांव के पास राहत शिविर से लगभग 20 किलोमीटर दूर नदी में तीन शव मिले थे, जिनमें एक महिला और दो बच्चों के शव थे. इस शव के मिलने के बाद हिंसा और बढ़ गई. 16 नवंबर को मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह और भाजपा विधायकों के घरों पर हमले हुए.

इसके बाद कुछ भाजपा विधायकों और मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को हटाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा. 17 नवंबर को जिरिबाम जिले में एक मैतेई प्रदर्शनकारी की पुलिस की गोली से मौत हो गई, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए. इसी दिन CRPF के डीजी अनीश दयाल सिंह मणिपुर पहुंचे और हिंसा का जायजा लिया. 18 नवंबर को आखिरी किडनैप की गई महिला का शव भी मिल गया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई. इन घटनाओं ने मणिपुर में हिंसा को और बढ़ा दिया है और हालात गंभीर हो गए हैं.

मणिपुर में हिंसा के पीछे क्या कारण हैं?

मणिपुर में कूकी और मैतेई समुदायों के बीच संघर्ष की जड़ें कई कारणों में छिपी हैं. इन दोनों समुदायों के बीच बढ़ते तनाव और हिंसा की मुख्य वजहें जातीय, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों से जुड़ी हुई हैं.

जातीय और सांस्कृतिक भिन्नताएं: मैतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहता है, जबकि कूकी और नागा समुदाय पहाड़ी इलाकों में बसे हुए हैं. मैतेई समुदाय हिंदू धर्म का पालन करता है, जबकि कूकी और नागा ईसाई धर्म के अनुयायी हैं. इस सांस्कृतिक और धार्मिक भिन्नता ने समय के साथ तनाव को बढ़ाया है.

राजनीतिक और संसाधन से जुड़ी समस्याएं: कूकी और नागा समुदाय लंबे समय से अपने अधिकारों और संसाधनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. कूकी और नागा समुदायों का आरोप है कि मैतेई समुदाय राज्य की राजनीति और संसाधनों पर हावी है, जिससे उन्हें अपने हिस्से का विकास और अधिकार नहीं मिल पा रहा है.

अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा: मई 2023 में हिंसा का कारण तब और बढ़ा, जब मैतेई समुदाय ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग की. कूकी और नागा समुदायों ने इसे अपने अधिकारों पर हमला मानते हुए इसका विरोध किया, क्योंकि यह उनके सामाजिक और राजनीतिक हितों के खिलाफ था.

भूमि और बसावट से जुड़ी समस्याएं: कूकी बस्तियां अक्सर संरक्षित वन क्षेत्रों में बसी हुई हैं, और राज्य सरकार ने उन्हें हटाने का प्रयास किया, जिससे कूकी समुदाय में विरोध उत्पन्न हुआ. कूकी समुदाय का कहना है कि उन्हें अपनी परंपरागत भूमि पर रहने का अधिकार होना चाहिए, और सरकार का हस्तक्षेप उनके अस्तित्व को खतरे में डाल रहा है.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
प्रकृति की शक्ति के सामने मनुष्य की तैयारियां अब भी अपर्याप्त हैं……………………….
अन्तर्राष्ट्रीय

प्रकृति की शक्ति के सामने मनुष्य की तैयारियां अब भी अपर्याप्त हैं……………………….

नेपाल के पहाड़ी जिले रसुवा में तिब्बत सीमा के निकट भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी और आपदा-प्रबंधन की सीमाओं को एक बार फिर सामने ला दिया है। अचानक आई इस बाढ़ से भारी मानवीय क्षति के साथ मकानों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को हुए नुकसान ने […]

UB India News27 अग॰
एआई की ट्रेनिंग और मुफ्त कोचिंग के लिए क्या देश में तकनीक का प्रभावी नेटवर्क है?
शिक्षा

एआई की ट्रेनिंग और मुफ्त कोचिंग के लिए क्या देश में तकनीक का प्रभावी नेटवर्क है?

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और अगले साल तक एक करोड़ युवा भारतीयों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में ट्रेनिंग देने की घोषणा की। यह स्पष्ट संकेत था कि मोदी सरकार युवाओं को ज्यादा प्रतिस्पर्धी और तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना चाहती है। खास बात […]

UB India News25 अग॰
सावन में मछली दावत को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज ………..
खास खबर

सावन में मछली दावत को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज ………..

सावन के महीने में मछली की दावत को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सावन के पवित्र महीने में अयोध्या में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के स्वागत कार्यक्रम में मछली परोसे जाने से पार्टी एक नए विवाद में घिर गई है. इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. […]

UB India News24 अग॰
नीतीश की विरासत पर कुशवाहा ने खेला बड़ा दांव……………..
पटना

नीतीश की विरासत पर कुशवाहा ने खेला बड़ा दांव……………..

बिहार की राजनीति में अब नीतीश कुमार की विरासत को लेकर नया सियासी संग्राम छिड़ गया है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने नालंदा में पार्टी के समीक्षा शिविर में कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार और देश की राजनीति में समृद्ध विरासत बनाई है और अब जब उन्होंने फुर्सत ले ली है […]

UB India News24 अग॰
क्यों सता रही है सभी को Gen Z की चिंता?
खास खबर

क्यों सता रही है सभी को Gen Z की चिंता?

आभासी दुनिया की उपज कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सतह पर आते ही देश की तमाम राजनीतिक पार्टियों को अब जेन- Z की चिंता बताने लगी है. भाजपा ने उनके उग्र होते ही अपने पसंदीदा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करा लिया. झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार ने नौकरियों की 2014 और उसके […]

UB India News22 अग॰
भविष्य में भारत का ड्रोन बाजार दायरा कितना बड़ा हो सकता है?
खास खबर

भविष्य में भारत का ड्रोन बाजार दायरा कितना बड़ा हो सकता है?

कुछ साल पहले तक ड्रोन का नाम आते ही कैमरे से तस्वीरें लेने वाली उड़ती मशीन का ख्याल आता था। अब ड्रोन का इस्तेमाल इससे कहीं आगे निकल चुका है। खेती में कीटनाशक का छिड़काव, गांवों में जमीन की मैपिंग, हाईवे और रेलवे की निगरानी, आपदा के समय राहत-बचाव और रक्षा क्षेत्र में निगरानी जैसे […]

UB India News19 अग॰
एक व्यापक ‘डिजिटल एथिक्स कोड’ और ‘डिजिटल पेशेवर आचरण संहिता’ बनाने की मांग……………….
कानून

एक व्यापक ‘डिजिटल एथिक्स कोड’ और ‘डिजिटल पेशेवर आचरण संहिता’ बनाने की मांग……………….

वकीलों द्वारा सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल, पेशेवर नैतिकता, विज्ञापन, क्लाइंट बनाने की कोशिश और कानूनी पेशे के व्यावसायीकरण से जुड़े अहम सवाल खड़े करता है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से प्रमोशनल रील्स, पैसे कमाने वाले कानूनी कंटेंट, इन्फ्लुएंसर के साथ मिलकर काम करने, पेड विज्ञापनों और क्लाइंट बनाने के लिए […]

UB India News17 अग॰