श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके मंगलवार को बोधगया पहुंचे। उनके साथ विदेश मंत्री विजीथा हेराथ और उप वित्त मंत्री अनिल जयंता व अधिकारियों का एक दल है। सभी का स्वागत बीटीएमसी के नदजीक महाबोधि सोसाइटी आफ इंडिया के महासचिव भंते पी सिवली थेरो, बीटीएमसी सचिव डा महाश्वेता महारथी सहित अन्य सदस्यों ने खादा भेंट कर किया।
ये है राष्ट्रपति का पूरा कार्यक्रम
उसके बाद सभी महाबोधि मंदिर में दर्शन व पूजा अर्चना करने गए। बीटीएमसी सचिव डा महारथी ने बताया कि वे मंदिर के गर्भगृह में पूजा अर्चना कर पवित्र बोधिवृक्ष का अवलोकन करेंगे। उसके बाद मंदिर परिसर स्थित भगवान बुद्ध से जुड़ा सात स्थलों का अवलोकन कर साधना उद्यान में धर्म घंटा बजाएंगे।
उसके बाद महाबोधि सोसाइटी के जयश्री महाबोधि मंदिर में पूजा कर भगवान बुद्ध व उनके शिष्यों के अस्थि अवशेष का दर्शन करेंगे। लगभग डेढ़ घंटे बुद्धभूमि पर व्यतीत कर वापस एयरपोर्ट के लिए रवाना हो जाएंगे।बोधगया एक पवित्र शहर है जो भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ा हुआ है और यहां कई महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल हैं।
बोधगया की खास बातें
महाबोधि मंदिर: यह मंदिर भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति के स्थान पर बनाया गया है। यह मंदिर बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।
बोधिवृक्ष: यह वृक्ष भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति के समय का है। यह वृक्ष महाबोधि मंदिर के पास स्थित है।
बौद्ध मठ और मंदिर: बोधगया में कई बौद्ध मठ और मंदिर हैं जो विभिन्न देशों की बौद्ध परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
बौद्ध कला और संस्कृति: बोधगया में बौद्ध कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा है। यहां कई संग्रहालय और कला दीर्घाएं हैं जो बौद्ध कला और संस्कृति को प्रदर्शित करती हैं।
बौद्ध त्योहार और उत्सव: बोधगया में कई बौद्ध त्योहार और उत्सव मनाए जाते हैं। इनमें बुद्ध पूर्णिमा, लोसर और वेसाक शामिल हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य: बोधगया के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहां कई नदियां, झीलें और वनस्पतियां हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
बोधगया मंदिर की खासियत
भगवान बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति का स्थल: बोधगया मंदिर वह स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था। यह स्थल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।
महाबोधि वृक्ष: मंदिर परिसर में एक पवित्र वृक्ष है जिसे महाबोधि वृक्ष कहा जाता है। यह वृक्ष भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति के समय का है।
मंदिर की वास्तुकला: बोधगया मंदिर की वास्तुकला बौद्ध वास्तुकला की एक अद्वितीय मिसाल है। मंदिर का निर्माण 5वीं शताब्दी में हुआ था।
दिसानायके ने पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना, चीन नहीं;
‘मैं श्रीलंका के राष्ट्रपति का भारत में स्वागत करता हूं। मुझे खुशी है कि राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए उन्होंने भारत को चुना है। इस यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा का सृजन हो रहा है।’
श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके के साथ जॉइन्ट स्टेटमेंट में ये बात PM नरेंद्र मोदी ने कही। PM मोदी की ये खुशी लाजिमी भी है।
तीन महीने पहले अनुरा कुमारा दिसानायके श्रीलंका के राष्ट्रपति बने, तो भारतीय मीडिया में एक आशंका थी। क्योंकि उनकी पार्टी JVP का स्टैंड भारत विरोधी माना जाता है। इसके बावजूद उन्होंने पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना। दिसानायके ने ऐसा क्यों किया और इस यात्रा से क्या हासिल होगा,
राष्ट्रपति दिसानायके ने 3 दिन के भारत दौरे पर क्या-क्या किया?
10वें श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके अपनी पहले विदेश यात्रा पर 3 दिन के लिए भारत पहुंचे। उनके साथ श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ और वित्त उपमंत्री अनिल जयंता फर्नांडो भी आए।
- 15 दिसंबर को शाम 5 बजकर 30 मिनट पर नई दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री एल मुरुगन ने उनकी अगवानी की।
- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के देशों के बीच आर्थिक सहयोग मजबूत करने, क्षेत्रीय सुरक्षा और सागर आउटलुक पर चर्चा की गई।

- दूसरे दिन यानी 16 दिसंबर की सुबह अनुरा ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।
- इसके बाद वे राष्ट्रपति भवन पहुंचे, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और PM नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। यहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
- नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में PM मोदी और राष्ट्रपति अनुरा की बायलैट्रल मीटिंग यानी द्विपक्षीय वार्ती हुई। इस दौरान सिक्योरिटी, रक्षा समझौते और इकोनॉमी के मुद्दे पर बात हुई। PM मोदी ने कहा, ’हमने अपनी साझेदारी के लिए एक फ्यूचरिस्टिक विजन अपनाया है।’
- इसके बाद अनुरा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने कुछ बिजनेस प्रोग्राम्स से शिरकत की।
- आखिरी दिन यानी 17 दिसंबर को अनुरा बिहार के बोधगया भी पहुंचेंगे। यहां वे बौद्ध तीर्थ जाएंगे।

चीन के करीबी माने जाते हैं, फिर भी दिसानायके ने पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को क्यों चुना?
विदेश मामलों के जानकार और JNU के प्रोफेसर राजन कुमार बताते हैं,
श्रीलंका को ये पता है कि जब वहां क्राइसिस आई थी तो भारत ने मदद की थी। भारत ने कई वैश्विक मंचों पर श्रीलंका को सपोर्ट किया है। श्रीलंका पहले भी ये देख चुका है कि वह केवल चीन पर निर्भर नहीं रह सकता है।

डॉ. राजन कुमार कहते हैं, ‘भले ही अनुरा की आइडियोलॉजी चीन से मेल खाती हो, लेकिन इकोनॉमी, स्ट्रैटजी और डिफेंस के लिए उन्हें भारत की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा उन्हें ये भी मालूम है कि अगर पश्चिमी देशों से दोस्ती करनी है तो भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने होंगे। अगर श्रीलंका चीन की ओर ज्यादा रुख बढ़ाता है तो वह न केवल भारत की अनदेखी करेगा, बल्कि पश्चिमी देशों से भी दूर हो जाएगा।’
चेन्नई के लोयोला कॉलेज के प्रोफेसर ग्लैडसन जेवियर ने BBC से कहा, ‘श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौर में भारत ने मदद की थी और इस लिहाज से दिसानायके भी रिश्तों में जोखिम नहीं लेना चाहेंगे। भारत को अलग करके श्रीलंका को और कठिन हालात में ले जाना समझदारी नहीं होगी।’
दिसायनायके की इस भारत यात्रा का हासिल क्या है?
अक्टूबर 2024 में श्रीलंका यात्रा पर गए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिसानायके को भारत आने का न्योता दिया था। इसके दो महीने बाद ही अनुरा नई दिल्ली पहुंचे। इस दौरान अनुरा के साथ मीटिंग में जयशंकर ने भारत की नेबर फर्स्ट पॉलिसी और सागर आउटलुक में श्रीलंका के अहमियत को बताया। जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत से नई दिल्ली और कोलंबो के बीच सहयोग बढ़ेगा।
16 दिंसबर को PM मोदी के साथ हुई मुलाकात में राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा कि उनके देश की जमीन का इस्तेमाल किसी भी भारत विरोधी एक्टिविटी के लिए नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने दो साल पहले श्रीलंका के आर्थिक संकट में मदद करने के लिए भारत का आभार व्यक्ति किया। इस दौरान PM मोदी ने कहा कि भारत ने करीब 5 बिलियन डॉलर (करीब 43 हजार करोड़ रुपए) के कर्ज और ग्रांट के जरिए श्रीलंका को सपोर्ट किया था।
भारत और श्रीलंका दोनों एक-दूसरे के लिए जरूरी क्यों हैं? जवाबः भारत और श्रीलंका हर लिहाज से एक-दूसरे की अहमियत बखूबी जानते है। स्ट्रैटजी, सिक्योरिटी, बिजनेस और ट्रेड्स के हर मोर्चे पर दोनों देश एक-दूसरे की जरूरत और महत्व को समझते हैं।
इसे एक टाइमलाइन से समझिए। 23 सितंबर को अनुरा दिसानायके श्रीलंका के राष्ट्रपति बने। महज 12 दिन बाद 4 अक्टूबर को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर कोलंबो दौरे पर पहुंचे और अनुरा से मिले। तब अनुरा से मिलने वाले पहले हाई-लेवल विदेशी मेहमान जयशंकर ही थे। अब अनुरा अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत आए हैं।

प्रोफेसर राजन कुमार मानते हैं कि भारत और श्रीलंका पड़ोसी देश हैं, इसलिए दोनों को एक-दूसरे के लिए काफी अहम हैं। वे कहते हैं, ‘मौजूदा वक्त में श्रीलंका पर चीन की नजर है और क्राइसिस से पहले भारत के साथ श्रीलंका के फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट और कई व्यापार समझौते थे। ऐसे में पड़ोसी देश के साथ भारत रिश्ते मजबूत करेगा। वहीं भारत ने कभी श्रीलंका का विरोध नहीं किया, बल्कि मदद ही की है, जो श्रीलंका भी जानता है। साथ ही भारत में जो कुछ भी होता है उसका असर श्रीलंका पर जरूर पड़ता है।’
फ्रांस में भारत के राजदूत रहे डॉ. मोहन कुमार मानते हैं कि अनुरा की इस यात्रा से भारत और श्रीलंका के रिश्ते और मजबूत होंगे। मोहन ने अपने आर्टिकल में लिखते हैं, ‘ये दौरा PM मोदी को अनुरा के साथ पर्सनल बॉन्ड बनाने के मौका देगा। PM से उम्मीद है कि वे अनुरा को श्रीलंका की वित्तीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए भारत के कमिटमेंट को बताएंगे। वहीं श्रीलंका साउथ इंडिया के साथ रीजनल इकोनॉमिक इंटीग्रेशन को सिक्योर करे।’
दिसानायके का भारत को लेकर क्या रुख रहा है, क्या उसमें बदलाव दिख रहा है?
दिसानायके के अतीत को देखें तो उनका रुख भारत के खिलाफ रहा है, लेकिन अब उसमें काफी बदलाव नजर आ रहा है। प्रोफेसर राजन कुमार बताते हैं,
अनुरा की जो आइडियोलॉजी है, वह उन्हें कहीं और खींचती है, लेकिन उनकी आर्थिक और राजनीतिक मजबूरियां उन्हें भारत के साथ जोड़ती है। ऐसे में दिसानायके समझते हैं कि भारत को दरकिनार नहीं किया जा सकता है।

दरअसल, पारंपरिक तौर पर दिसानायके और उनकी पार्टी JVP (अब NPP) को चीन समर्थक पार्टी की तरह देखा जाता है। JVP के संस्थापक रोहाना विजेवीरा ने 1980 के दशक में भारत को ‘श्रीलंकाई हितों का दुश्मन’ बताया था। दिसानायके भी समय-समय पर भारत और भारतीय निवेश के विरोध में बयान देते आए हैं। चुनाव से पहले उन्होंने अडानी ग्रुप की 450 मेगावाट के विंड एनर्जी प्रोजेक्ट को रद्द करने की घोषणा की थी।
हालांकि, चुनाव कैंपेन के दौरान उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि श्रीलंका के समुद्र, जमीन और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल इस तरीके से न किया जाए, जिससे भारत या क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा हो। उनकी सरकार नेशनल सिक्योरिटी और डिफेंस मामलों में भारत के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखेगी।
फरवरी 2024 में दिसानायके भारत सरकार के न्यौते पर नई दिल्ली भी आए थे। उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर और NSA अजीत डोभाल से मुलाकात की। मीटिंग में अनुरा ने द्विपक्षीय संबंधों और उन्हें मजबूत करने पर चर्चा की। वहीं जयशंकर ने कहा था कि भारत हमेशा श्रीलंका का एक विश्वसनीय मित्र और भरोसेमंद साझेदार रहेगा।

दिसानायके के भारत को लेकर रुख पर NPP के मेंबर प्रोफेसर अनिल जयंता ने कहा,
भारत निश्चित तौर पर हमारा पड़ोसी और एक सुपर पावर है। हमारे नेता श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए सभी प्रमुख देशों के साथ काम करना चाहते हैं।

अनुरा दिसानायके श्रीलंका के पहले कम्युनिस्ट राष्ट्रपति कैसे बने?
दिसानायके को 2019 के राष्ट्रपति चुनाव में केवल 3 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन इसके बाद दिसानायके के चुनावी एजेंडे का फोकस देश की अर्थव्यवस्था पर रहा। उन्होंने लोगों के वेलफेयर के लिए कई वादे किए। उन्होंने IMF की लोन डील की आलोचना करते हुए डील की शर्तों पर बातचीत करने को कहा।
इसके अलावा अनुरा ने कैंपेन के दौरान कहा कि चुनाव जीतने के बाद वे विदेशी निवेशकों का स्वागत करेंगे। उन्होंने श्रीलंका के प्रेसिडेंट सिस्टम को खत्म करने और ब्रिटिश कल्चर के संसदीय लोकतंत्र को वापस लाने का भी वादा किया है। 1978 तक ये व्यवस्था श्रीलंका में मौजूद थी। वहीं देश में आया आर्थिक संकट अनुरा के लिए ‘करप्ट’ पॉलिटिक्स को बदलने का मौका साबित हुआ।
अनुरा की ये बातें वोटर्स, खास तौर पर यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स, टीचर्स और मजदूर वर्ग तक पहुंचीं और उनका समर्थन अनुरा को मिला। इसके बाद वे श्रीलंका के 10वें राष्ट्रपति बने और 23 सितंबर को उन्होंने शपथ ली।







