दिल्ली चुनाव आते ही कांग्रेस से इतनी नफरत क्यों करने लगते है केजरीवाल !

दिल्ली चुनाव से पहले तक कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के रिश्ते दोस्ताना थे. अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी दोनों साथ-साथ मंच साझा करते थे. विपक्षी एकता की आवाज बुलंद करते थे. मगर अब दिल्ली चुनाव में चीजें बदल गई हैं. दोस्ती दुश्मनी में बदल गई है. दिल्ली चुनाव आते ही कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 30 दिसंबर 2024, 10:52 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
दिल्ली चुनाव आते ही कांग्रेस से इतनी नफरत क्यों करने लगते है केजरीवाल !
Photo: UB India News Archive

दिल्ली चुनाव से पहले तक कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के रिश्ते दोस्ताना थे. अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी दोनों साथ-साथ मंच साझा करते थे. विपक्षी एकता की आवाज बुलंद करते थे. मगर अब दिल्ली चुनाव में चीजें बदल गई हैं. दोस्ती दुश्मनी में बदल गई है. दिल्ली चुनाव आते ही कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल की आप एक-दूसरे पर हमलावर है. आम आदमी पार्टी अब कांग्रेस से नफरत करने लगी है. यह तब है जब कांग्रेस और आम आदमी पाार्टी इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल हैं. हरियाणा चुनाव में गठबंधन न होने के बावजूद दोनों को एक-दूसरे पर इस कदर हमलावर नहीं देखा गया. मगर अब दिल्ली चुनाव में समीकरण बदल चुके हैं. दोनों एक-दूसरे को फूटे आंख भी नहीं सुहा रहे हैं. हमला करने का एक मौका तक नहीं छोड़ते. अब सवाल है कि आखिर अन्य राज्यों की दोस्ती दिल्ली में अचानक दुश्मनी में क्यों बदल गई?

दरअसल, दिल्ली में कड़ाके की ठंड के बीच सियासत गर्म है. दिल्ली की सियासत बीते कुछ साल से भाजपा बनाम आम आदमी पार्टी होती रही है. मगर अब सियासी फ्रेम में कांग्रेस भी आ चुकी है. दिल्ली का चुनाव इस बार त्रिकोणीय लग रहा है. अब कांग्रेस भी पूरी तरह एक्टिव हो चुकी है. कांग्रेस जहां अपना 10 साल का सूखा खत्म करना चाह रही है, वहीं भाजपा 26 साल का वनवास खत्म करने की फिराक में है.  आम आदमी पार्टी इस बार भी जीत की उम्मीद लगाए बैठी है. अब जब कांग्रेस भी भाजपा की तरह आम आदमी पार्टी पर हमलावर है, ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कांग्रेस के एक्टिव होने से किसे फायदा होगा और किसे नुकसान. अगर इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथ मजबूत होते हैं तो अरविंद केजरीवाल को फायदा होगा या नुकसान?

क्यों कांग्रेस से आप की दुश्मनी?
इसे समझने के लिए बीते विधानसभा चुनावों के नतीजों पर गौर करना होगा. 2011 में अन्ना हजारे आंदोलन से जन्मी आम आदमी पार्टी ने पहली बार दिल्ली का चुनाव 2013 में लड़ा था. तब तक कांग्रेस की सरकार थी. 2013 का यही विधानसभा चुनाव था, जिसमें कांग्रेस का गेम फिनिश हो गया था. आम आदमी पार्टी बादशाह के रूप में उभरकर आई थी. हालांकि, 2013 के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर भाजपा ही उभरी थी. 2013 के चुनाव में भाजपा को 31 सीटें मिली थीं, जबकि आम आदमी पार्टी 28 सीट जीतने में कामयाब रही थी. कांग्रेस 8 सीटों पर सिमट गई थी. वोट फीसदी के लिहाज से देखें तो भाजपा को 34 फीसदी, आम आदमी पार्टी को 30 फीसदी और कांग्रेस को 25 फीसदी वोट मिले थे.

कांग्रेस की वजह से ही आप हुई मजबूत
2013 के चुनाव में भले ही कांग्रेस को सीटें कम मिली थीं, मगर वोट फिसदी सही था. इसको पाटने के बाद ही आम आदमी पार्टी की राह आसान हो सकती थी. इसका मतलब था कि अगर कांग्रेस को जो वोट मिले थे, वो अगर आम आदमी पार्टी को मिलते तो उस वक्त भी केजरीवाल की पार्टी ही सबसे बड़ी पार्टी बनती. 2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी का काम बन गया. इस चुनाव में कांग्रेस का वोट फीसदी काफी कम हुआ. इसका मतलब था कि आम आदमी पार्टी की ओर यह स्विंग हुआ था. 2015 में कांग्रेस काफी कमजोर हो गई. इसका फायदा सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी को मिला. आम आदमी पार्टी को उस चुनाव में 54 फीसदी वोट मिले थे. 70 सीटें में से 68 सीटों पर जीत दर्ज की थी. कांग्रेस के वोटर्स आम आदमी पार्टी की ओर शिफ्ट हुए थे. कांग्रेस का वोट शेयर 9 फीसदी पर आ गया.

2020 में भी वही कहानी दोहराई गई. कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हुई. इसका फायदा भी आम आदमी पार्टी को ही मिला. आम आदमी पार्टी ने 62 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि भाजपा के खाते में 8 सीटें गईं. कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला. वोट फीसदी के लिहाज से कांग्रेस और कमजोर हुई. कांग्रेस दिल्ली में करीब 5 फीसदी वोटों पर समिट गई. इन चुनावी नतीजों से यह साफ है कि कांग्रेस जब-जब कमजोर हुई है, इसका सीधा फायदा अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को ही मिला है. ऐसे में अरविंद केजरीवाल को यह साफ एहसास है कि अगर कांग्रेस फ्रंटफुट पर आई और मजबूत हुई तो नुकसान आप को ही होगा. यही वजह है कि अरविंद केजरीवाल नहीं चाहते होंगे कि कांग्रेस दिल्ली की सियासत में फ्रंटफुट पर आकर बैटिंग करे.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू
खास खबर

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू

राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का खार्ग द्वीप पूरी तबाह कर दिया गया है. हालांकि अभी ईरान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने हमले की एआई वीडियो भी जारी की है.

UB India News31 अग॰
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰