संगम की रेती पर आयोजित हो रहे विश्व के सबसे बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक मेले महाकुंभ के दूसरे स्नान पर्व मकर संक्रांति के मौके पर संगम तट पर नागा संन्यासियों का अद्भुत और अलौकिक नजारा देखने को मिल रहा है. मकर संक्रांति का स्नान पर्व अखाड़े का पहला शाही स्नान है. प्रदेश की योगी सरकार ने साधु संतों की मांग पर शाही स्नान का मुगल कालीन नाम बदलकर अमृत स्नान कर दिया है. अखाड़ों का शाही स्नान सुबह 6:15 बजे शुरू हुआ. सबसे पहले सन्यासी परंपरा के महानिर्वाणी और अटल अखाड़े के नागा संन्यासियों ने कड़ाके की ठंड के बीच गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में डुबकी लगाई.
पौष पूर्णिमा के पहले स्नान के साथ महाकुंभ का आगाज हो चुका है. महाकुंभ का आज पहला शाही स्नान है. इस दौरान अलग-अलग अखाड़ों के साधु-संतों ने गंगा में डुबकी लगाई. महाकुंभ के पहले दिन करीब 1 करोड़ 60 लाख लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई थी. आज भी उम्मीद है कि 1 करोड़ से अधिक लोग डुबकी लगाएंगे. महाकुंभ में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई है. जगह-जगह पुलिस और अन्य जवान तैनात हैं. धार्मिक ग्रंथो के अनुसार त्रिवेणी संगम पर स्नान करने से कई जन्मों के पाप कट जाते हैं. हर अखाड़े को तेरह वर्षों बाद मिलता है सबसे पहले शाही स्नान का मौका. इसबार सबसे पहले जूना अखाड़ा के साधु-संतों ने शाही स्नान किया. 14 जनवरी को सुबह 4 बजे से शाही स्नान शुरू हो गया.
अखाड़ों के साधु-संतों ने अमृत स्नान किया, शाम तक चलेगा कार्यक्रम
मकर संक्रांति के मौके पर अखाड़ों के साधु-संतों द्वारा अमृत स्नान जारी है। मकर संक्रांति पर सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा ने अमृत स्नान किया। गौरतलब है कि पहला अमृत स्नान कई मायनों में खास है। यह सोमवार को पौष पूर्णिमा के अवसर पर संगम क्षेत्र में पहले बड़े स्नान के एक दिन बाद हुआ।
गौरतलब है कि अमृत स्नान के दौरान 13 अखाड़ों के साधु त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाते हैं। महाकुंभ मेले का मुख्य आकर्षण अमृत स्नान को ही माना जाता है। इसमें सबसे पहले स्नान का अवसर नागा साधुओं को दिया जाता है, आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है?
धार्मिक मान्यताओं की मानें तो जब देवता और असुर समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश की रक्षा के लिए एक-दूसरे से संघर्ष कर रहे थे, तो अमृत की 4 बूंदें 4 जगहों (प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार और नाशिक) पर गिर गईं। इसके बाद यहां महाकुंभ मेले की शुरुआत की गई। नागा साधु भोले बाबा के अनुयायी माने जाते हैं और वह इस स्नान को सबसे पहले करने के अधिकारी माने गए। तभी से यह परंपरा चली आ रही कि अमृत स्नान पर सबसे पहला हक नागा साधुओं का ही रहता है। नागा का स्नान, धर्म और आध्यत्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।
सीएम योगी ने क्या कहा?
इस मौके पर सीएम योगी ने एक्स पर पोस्ट भी किया। उन्होंने कहा, ‘यह हमारी सनातन संस्कृति और आस्था का जीवंत स्वरूप है। आज लोक आस्था के महापर्व मकर संक्रांति के पावन अवसर पर महाकुम्भ-2025, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम में प्रथम अमृत स्नान कर पुण्य अर्जित करने वाले सभी श्रद्धालु जनों का अभिनंदन!।’







