इजरायल-हमास में डील भले ही हो गई हो, मगर खतरे कम नहीं…………..

गाजा में शांति वाली डील हो गई. कत्लेआम रोकने को इजरायल और हमास मान गए. सीजफायर डील पर बेंजामिन नेतन्याहू की कैबिनेट ने मुहर भी लगा दी. अब इंतजार है बंधकों की रिहाई का. जी हां, गाजा में संघर्ष विराम और बंधकों को रिहा करने का समझौता कल यानी रविवार से लागू होगा. एक साल […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 18 जनवरी 2025, 06:06 AM 7 मिनट read
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इजरायल-हमास में डील भले ही हो गई हो, मगर खतरे कम नहीं…………..
Photo: UB India News Archive

गाजा में शांति वाली डील हो गई. कत्लेआम रोकने को इजरायल और हमास मान गए. सीजफायर डील पर बेंजामिन नेतन्याहू की कैबिनेट ने मुहर भी लगा दी. अब इंतजार है बंधकों की रिहाई का. जी हां, गाजा में संघर्ष विराम और बंधकों को रिहा करने का समझौता कल यानी रविवार से लागू होगा. एक साल से भी ज्यादा समय से चले आ रहे इजरायल और हमास के बीच जंग में यह सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता है. डील भले ही हो गई हो, मगर इसमें खतरे भी कम नहीं हैं. यह जितने जवाब देता है, उससे कहीं ज्यादा सवाल खड़े करता है.

अमेरिका, मिस्र और कतर की मध्यस्थता की वजह से इजरायल और हमास के बीच यह डील हो सकी. इसके लिए महीनों तक लंबी बातचीत हुई. इसके बाद शुक्रवार को इजरायली कैबिनेट के सामने जो समझौता रखा गया है, वह कूटनीतिक अस्पष्टताओं से भरा है. इसमें उन मुद्दों को बातचीत के लिए छोड़ दिया गया है, जो इसराइल और हमास के बीच तनाव को सबसे ज्यादा भड़काते हैं. इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि अगर दूसरा समझौता नहीं हुआ तो कुछ हफ्तों में जंग फिर से शुरू हो सकता है.

गाजा में ज्यादा मानवीय सहायता मिलने और लगातार बमबारी से राहत मिलने की उम्मीद से फिलिस्तीनियों को राहत जरूर मिली है. 15 महीने से इजरायली सैन्य अभियान के कारण उन्हें काफी कुछ झेलना पड़ रहा है. इसमें फिलिस्तीन के 46,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. इनमें ज्यादातर आम नागरिक और आतंकवादी दोनों शामिल हैं. उधर इजरायल में परिवारों ने उन रिश्तेदारों के घर वापसी की तैयारी पूरी कर ली है, जिन्हें हमास ने 7 अक्टूबर से बंधक बना रखा है. 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला किया था. इस हमले में 1,200 से ज्यादा लोग मारे गए थे. इनमें ज्यादातर आम नागरिक थे. हमास ने इस दौरान 250 इजरायलियों का अपहरण कर लिया था.
आने वाले दिनों में क्या उम्मीद है?
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, इजरायल और हमास के बीच समझौता का पहला चरण 42 दिनों तक चलेगा. यह रविवार से लागू होगा. इसकी जानकारी अमेरिका और कतर के अधिकारियों ने दी है. इस डील के तहत गाजा में हमास द्वारा पकड़े गए 33 बंधकों को इजरायल में बंद सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों के बदले में रिहा करना शामिल है. बंधकों में महिलाओं, बच्चों, 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों और बीमार या घायल लोग शामिल हैं.

क्या है डील का फॉर्मूला
समझौते के पहले दिन हमास तीन महिला बंधकों को रिहा करेगा. फिर 7वें दिन चार और बाकी 26 बंधकों को पहले चरण के अगले पांच हफ्तों में रिहा करेगा. हमास यूं इन बंधकों को नहीं छोड़ रहा है. पहले चरण की डील में यह भी जरूरी है कि इजरायल की ओर से हर दिन 600 मानवीय राहत ट्रक गाजा में प्रवेश करें. यह मौजूदा मदद की तुलना में काफी अधिक है. संयुक्त राष्ट्र ने इसे लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी बताया है.

90 लाख फिलिस्तीनी हो चुके विस्थापित
इस डील से गाजा में फिलिस्तीनियों को लग रहा है कि अब लड़ाई बंद हो जाएगी. इजरायली सेना आबादी वाले इलाकों से दूर पूर्व में हट जाएगी. इससे नागरिक अपने तबाह घरों को लौट सकेंगे. 23 लाख की आबादी वाले गाजा के करीब 90 फीसदी लोग विस्थापित हो चुके हैं. शुक्रवार को इजरायली न्याय मंत्रालय की ओर से जारी आंशिक सूची के अनुसार, रिहाई के लिए चुने गए अधिकतर फिलिस्तीनी कैदी महिलाएं और नाबालिग हैं. इन्हें कब्जे वाले वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम में अहिंसक अपराधों के लिए जेल में डाल दिया गया है.

राजनयिकों ने डील के आगे के चरणों को रेखांकित किया है. उम्मीद है कि तत्काल युद्धविराम से इजरायल और हमास को युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने और तबाह हुए गाजा के पुनर्निर्माण की दिशा में काम करने का मौका मिलेगा.
अब आगे क्या होगा?
सूत्रों का कहना है कि समझौते का दूसरा चरण पहले चरण के खत्म होने से पहले तैयार किया जाना है. दोनों पक्षों को युद्धविराम के लिए राजी करने के लिए ऐसा लगता है कि विदेशी मध्यस्थों ने दूसरे चरण को जानबूझकर अस्पष्ट छोड़ दिया है. मोटे तौर पर रूपरेखा यह है कि गाजा में बंधक बनाए गए सभी बचे हुए लोग चाहे वे जीवित हों या मृत उन्हें रिहा किया जाएगा. इसके बदले में इजरायल को गाजा से पूरी तरह से पीछे हटना होगा और स्थायी शांति बनाए रखनी होगी. यह बातचीत काफी मुश्किल होने वाली है, क्योंकि इसमें शामिल लोगों के बीच दुश्मनी है और उनके लक्ष्य एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं.

हमास और इजरायल में अभी और होगी तकरार?
इजरायल का कहना है कि वह तब तक पूरी तरह से पीछे हटने के लिए राजी नहीं होगा, जब तक हमास की सैन्य और राजनीतिक क्षमताओं को खत्म नहीं कर दिया जाता. ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह अब शासन नहीं कर सकता. हमास बुरी तरह से पिट चुका है लेकिन अभी भी गाजा के बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है. उसने कहा है कि वह केवल एक ऐसे समझौते पर सहमत होगा जो युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त कर दे. उसने आखिरी इजरायली बंधकों को सौंपने से इनकार कर दिया है. इसका मतलब है कि करीब 100 अभी भी गाजा में हैं. जब तक कि इजरायल अपने सभी सैनिकों को नहीं हटा देता, 100 लोग हमास के बंधक में ही रहेंगे.

नेतन्याहू घर में घिरे
उधर, इजरायल में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के धुर दक्षिणपंथी सहयोगी युद्धविराम समझौते के खिलाफ में हैं. इसके बावजूद वह अपने अस्थिर गठबंधन सरकार में बने रहने के लिए मनाने की उम्मीद कर रहे हैं. उन्होंने लोगों को कोई गारंटी नहीं दी है कि इजरायल समझौते को दूसरे चरण पर अमल करेगा. इससे कई परिवारों को डर है कि गाजा में फंसे उनके प्रियजन वहीं पीछे छूट जाएंगे. कट्टरपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने गुरुवार रात घोषणा की कि उनकी अति-राष्ट्रवादी यहूदी पावर पार्टी युद्धविराम को लेकर सरकार छोड़ देगी. और लड़ाई फिर से शुरू होने पर ही वापस आएगी. इजरायल के वित्त मंत्री बेजलल स्मोट्रिच ने भी मांग की कि नेतन्याहू गाजा में कुछ बंधकों को मुक्त करने के बाद युद्ध जारी रखने का वादा करें. यह मांग उन्होंने स्मोट्रिच की धार्मिक ज़ायोनिज्म पार्टी के सरकार में बने रहने की शर्त के तौर पर की है.

मन में सबको शक
कुछ लोगों का मानना है कि युद्धविराम से युद्ध के मूल कारणों का समाधान हो जाएगा. वहीं, इजरायली अखबार का मानना है कि कोई भी यह वादा नहीं कर सकता कि हमास अपनी बात रखेगा और दूसरे चरण पर अमल करेगा. और बहुत से लोगों को नेतन्याहू के इरादों पर शक है. बहरहाल, आगे क्या होगा यह देखने वाली बात होगी. अभी तो यह देखना है कि रविवार को डब समझौता लागू होगा तो किस तरह से उसे अमल में लाया जाएगा.

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