अमेरिका में ट्रम्प की ताजपोशी कल , दुनिया में इतनी हलचल क्यों?

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले हैं। शपथ ग्रहण से पहले ही देश के कई हिस्सों में उनके विरोध में प्रदर्शन हो गए हैं। शनिवार को हजारों लोगों ने अलग-अलग जगहों पर ट्रम्प के खिलाफ प्रदर्शन किया। राजधानी वॉशिंगटन में कई NGO के एक ग्रुप ने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 19 जनवरी 2025, 08:57 AM 13 मिनट read
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अमेरिका में ट्रम्प की ताजपोशी कल , दुनिया में इतनी हलचल क्यों?
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अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले हैं। शपथ ग्रहण से पहले ही देश के कई हिस्सों में उनके विरोध में प्रदर्शन हो गए हैं। शनिवार को हजारों लोगों ने अलग-अलग जगहों पर ट्रम्प के खिलाफ प्रदर्शन किया।

राजधानी वॉशिंगटन में कई NGO के एक ग्रुप ने ‘पीपुल्स मार्च’ बैनर के तले ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने ट्रम्प के अलावा इलॉन मस्क और उनके करीबी सहयोगियों के खिलाफ पोस्टर और बैनर के जरिए विरोध जताया।

इससे पहले भी इस ग्रुप ने जनवरी 2017 में ट्रम्प के पहले शपथ ग्रहण पर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए थे।

इस ग्रुप में अबॉर्शन एक्शन नाउ, द फेमिनिस्ट फ्रंट और वीमन्स मार्च जैसे संगठन शामिल हैं।
इस ग्रुप में अबॉर्शन एक्शन नाउ, द फेमिनिस्ट फ्रंट और वीमन्स मार्च जैसे संगठन शामिल हैं।

शपथ ग्रहण के लिए वाशिंगटन पहुंचे ट्रम्प

डोनाल्ड ट्रम्प शपथ ग्रहण के लिए राजधानी वॉशिंगटन पहुंच चुके हैं। ट्रम्प ने शनिवार दोपहर फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच से वायुसेना के सैन्य विमान सी-32 में सवार होकर उड़ान भरी। उनके साथ उनकी पत्नी मेलानिया और बेटे बैरेन ट्रम्प भी साथ थे।

इस फ्लाइट को स्पेशल एयर मिशन 47 नाम दिया गया था। मिशन 47 का मतलब है कि डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ट्रम्प को ये विमान मुहैया कराया।

अमेरिका में आमतौर पर सत्ता से बाहर जा रहे राष्ट्रपति नए राष्ट्रपति के लिए ऐसा करते हैं। हालांकि 2021 में डोनाल्ड ट्रम्प ने बाइडेन के लिए ऐसा नहीं किया था। इस वजह से बाइडेन को निजी प्लेन से वॉशिंगटन आना पड़ा था।

तस्वीर डोनाल्ड ट्रम्प, पत्नी मेलानिया और बेटे बैरेन ट्रम्प की है।
तस्वीर डोनाल्ड ट्रम्प, पत्नी मेलानिया और बेटे बैरेन ट्रम्प की है।

शपथ ग्रहण के बाद 100 से ज्यादा आदेशों पर साइन करेंगे ट्रम्प

सोमवार को शपथ लेने के बाद ट्रम्प 100 से ज्यादा कार्यकारी आदेशों पर साइन करेंगे। उनकी टीम ने कार्यकाल शुरू होने से पहले इन आदेशों को तैयार कर लिया है। ओवल ऑफिस में ट्रम्प की टेबल पर इन्हें रखा जाएगा।

ट्रम्प के चुनावों वादों को पूरा करने के मकसद से इन आदेशों को तैयार किया गया है। एक इंटरव्यू के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि वह पहले दिन रिकॉर्ड संख्या में आदेशों पर साइन करने की योजना बना रहे हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इन आदेशों में मैक्सिको बॉर्डर को सील करना, अवैध प्रवासियों को देश से भेजना और महिलाओं के खेलों में ट्रांसजेंडर्स को शामिल होने से रोकने के आदेश शामिल हो सकते हैं।

कार्यकारी आदेश वह आदेश होते हैं जो राष्ट्रपति द्वारा एकतरफा जारी किए जाते हैं और जो कानून की शक्ति रखते हैं। इन्हें कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती। कांग्रेस इन्हें पलट नहीं सकती, लेकिन इन्हें अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

ट्रम्प की वापसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। यूरोप, कनाडा और चीन जैसे देशों के बीच ट्रंप की नीतियों को लेकर असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है।

वहीं, भारत और सऊदी अरब जैसे देशों में ट्रंप की जीत को सकारात्मक रूप में देखा जा रहा और उनके आने से लोगों में खुशी की लहर है। भारत के लिए उनकी नीतियां व्यापारिक दृष्टि से लाभकारी रही हैं, और इसके साथ ही सऊदी अरब जैसे देश ट्रंप की जीत से खुश नजर आ रहे हैं और रिश्ते को मजबूती से दिखा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यूरोप और नाटो देशों की चिंताएं बढ़ी
डोनाल्ड ट्रंप के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर व्यापारिक दृष्टिकोण ने यूरोप और नाटो देशों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। ट्रंप का रूस और चीन के प्रति मैत्रीपूर्ण रवैया पश्चिमी देशों की सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि के लिए चिंता का कारण बन गया है। यूरोपीय काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (ECFR) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक सर्वे के मुताबिक, यूरोप में ट्रंप के प्रति नकारात्मकता ज्यादा देखने को मिल रही है, जिससे उनकी विदेश नीति के बारे में सवाल उठ रहे हैं।

वहीं, भारत और सऊदी अरब जैसे देशों में ट्रंप को एक नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इन देशों के लिए ट्रंप का विदेश नीति पर फोकस एक नया आर्थिक और व्यापारिक मार्ग खोलने की संभावना के रूप में देखा जा रहा है।

जीत से खुश हैं 82 फीसदी लोग
एक सर्वे के अनुसार, भारत में 82 फीसदी लोग डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी जीत से खुश हैं। भारतीयों का मानना है कि ट्रंप की व्यावसायिक नीति से देश को अधिक आर्थिक फायदे हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का प्रशासन भारत के लिए अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के नए अवसर खोल सकता है, जो पिछले प्रशासन की तुलना में ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

ट्रंप का रवैया यूरोपीय देशों में चिंता का कारण बना
डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रवैये ने यूरोपीय देशों को परेशान कर दिया है। नाटो सहयोगियों के प्रति उनके कठोर दृष्टिकोण और रूस को ज्यादा छूट देने की धमकी से यूरोप में असुरक्षा का माहौल बन गया है। ट्रंप के सत्ता में वापस आने के बाद, यूरोपीय देशों में नकारात्मक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।

हालिया सर्वे के अनुसार, यूरोप में सिर्फ 28 प्रतिशत लोग ही ट्रंप की जीत से खुश हैं। वहीं, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों में 50 प्रतिशत से ज्यादा लोग उनकी वापसी से नाराज हैं। इन देशों का मानना है कि ट्रंप का कड़ा रवैया और रूस के प्रति नरम रुख यूरोप की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।

ट्रंप के बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मचा हड़कंप
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कुछ विवादास्पद बयान दिए हैं, जिनसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। उन्होंने ग्रीनलैंड को डेनमार्क से जोड़ने, कनाडा को अपने देश में शामिल करने और पनामा को अपने कब्जे में लेने की बात की है। इन बयानों ने वैश्विक समुदाय में चिंता और आशंका की लहर पैदा कर दी है, क्योंकि ये बयान किसी देश की संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में देखे जा सकते हैं।

भारत में उम्मीदें, यूरोप में चिंताएं
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले दुनिया भर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भारत जैसे देशों में जहां ट्रंप के व्यावसायिक दृष्टिकोण को लेकर सकारात्मक उम्मीदें जताई जा रही हैं, वहीं यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों में उनके शासन के फिर से लौटने से असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है।

भारत में, व्यापारिक दृष्टिकोण से ट्रंप की नीतियों को लेकर उम्मीदें जताई जा रही हैं, खासकर उनके व्यापारिक समझौतों और आर्थिक विकास के पहलुओं को लेकर। वहीं, यूरोप और पश्चिमी देशों में उनके प्रशासन के दौरान उठाए गए कठोर कदमों को लेकर चिंता है, जो वैश्विक असंतुलन का कारण बन सकते हैं। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की नीतियां वैश्विक स्तर पर नए समीकरण बना सकती हैं, जिनका असर आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखेगा।

 जयशंकर समेत दिग्गज मेहमान शपथ के साक्षी बनेंगे

अमेरिका में भीषण ठंड व बर्फबारी के मद्देनजर 40 वर्षों में पहली बार शपथ ग्रहण समारोह को खुले स्थान के बजाय कैपिटल रोटुंडा में बंद जगह पर कराने का फैसला लिया गया है। शपथ ग्रहण समारोह से जुड़ी समिति ने बताया कि ट्रंप शपथ ग्रहण समारोह के लिए स्थानीय समयानुसार शनिवार को वाशिंगटन पहुंचेंगे। इस समारोह में भारत से विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर समेत कई विदेशी मेहमान शामिल होंगे। फिल्म, मनोरंजन और संगीत जगत के सितारों की महफिल भी सजेगी।

व्हाइट हाउस में जो बाइडन के साथ चाय पीएंगे ट्रंप
शपथ ग्रहण समारोह की पूर्व संध्या पर, ट्रंप अर्लिंग्टन नेशलन सेमेट्री पहुंचकर श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद वह वाशिंगटन में कैपिटल वन एरिना में एक रैली में भाग लेंगे। रैली के बाद एक निजी रात्रिभोज होगा। शपथ ग्रहण समारोह के दिन, ट्रंप सेंट जॉन एपिस्कोपल चर्च में पारंपरिक रूप से प्रार्थना करेंगे। इसके बाद वह व्हाइट हाउस में निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन और उनकी पत्नी जिल बाइडन के साथ चाय पीएंगे।

बता दें कि आर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री अमेरिका का सबसे बड़ा कब्रिस्तान है। 639 एकड़ में फैले इस कब्रिस्तान में चार लाख से अधिक लोगों को दफनाया गया है। 1864 में अमेरिकी गृह युद्ध के दौरान इसकी स्थापना हुई थी। इसका प्रबंधन अमेरिका सेना करती है।

शपथ ग्रहण समारोह की जगह में बदलाव
अमेरिका में आर्कटिक तूफान जारी है। हालिया मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, सोमवार को वाशिंगटन डीसी में तापमान माइनस 11 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। खराब मौसम के कारण ट्रंप का शपथ ग्रहण कैपिटल रोटुंडा में आयोजित होगा। इससे पहले 20 जनवरी, 1985 को रोनाल्ड रीगन ने बंद जगह में शपथ ली थी। तब वाशिंगटन का तापमान माइनस 14 डिग्री पहुंच गया था। समारोह से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि हर बार शपथ ग्रहण समारोह के समय प्रतिकूल मौसम संबंधी स्थिति में एक विकल्प के तौर पर कैपिटल रोटुंडा को तैयार रखा जाता है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के शपथ ग्रहण में लाखों लोगों को कैसे समायोजित किया जाएगा। रोटुंडा में केवल 600 लोगों के बैठने का बंदोबस्त है, जबकि खबरों के मुताबिक करीब 2.50 लाख से अधिक लोगों ने 20 जनवरी को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का टिकट लिया है।

US President Donald Trump's swearing-in ceremony Many foreign guests including S Jaishankar to attend

ट्रंप की अपील- गर्म कपड़े पहनें
शपथ ग्रहण समारोह बंद जगह में आयोजित किए जाने के फैसले की जानकारी खुद ट्रंप ने साझा की। उन्होंने कहा, वाशिंगटन में तापमान रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा सकता है। मैं लोगों को बीमार होते नहीं देखना चाहता। यह कानून प्रवर्तन व समारोह में लगे हजारों कर्मचारियों के लिए खतरनाक होगा, जो समारोह के दिन घंटों तक बाहर रहते। आप समारोह में आ रहे हों तो कृपया गर्म कपड़े पहनें।
US President Donald Trump's swearing-in ceremony Many foreign guests including S Jaishankar to attend

क्यों खास है रोटुंडा
बता दें कि रोटुंडा यूएस कैपिटल के केंद्र में स्थित एक बड़ा, गुंबददार, गोलाकार कमरा है। जगह में बदलाव के बाद ट्रंप ने समर्थकों को आश्वस्त किया कि शपथ ग्रहण समारोह ऐतिहासिक और यादगार रहेगा। कड़ाके की ठंड के बावजूद राष्ट्रपति परेड और अन्य गतिविधियां योजना के अनुसार ही होंगी। कैपिटल वन एरिना में लाइव व्यूइंग भी शामिल है। कैपिटल रोटुंडा में विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों और मेहमानों के लिए खास इंतजाम होंगे। ट्रंप ने 40 साल बाद बदली गई जगह के बारे में कहा, सभी के लिए और विशेष रूप से बड़ी संख्या में टीवी दर्शकों के लिए 20 जनवरी का समारोह बहुत ही सुंदर अनुभव होगा!
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