महाकुंभ 2025 : संगम में पावन स्नान जारी, अब तक 27 करोड़ से अधिक लोगों ने लगाई पवित्र डुबकी

मौनी अमावस्या पर हुए हादसे से उबरकर श्रद्धालु संगम में पावन स्नान कर रहे हैं। मेले में व्यवस्थाएं पटरी पर हैं और अधिकारी अलर्ट हैं। तीन फरवरी को अगले अमृत स्नान के मद्देनजर प्रशासन सतर्कता बरत रहा है। श्रद्धालुओं से भी मेला प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है। प्रयागराज में […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 30 जनवरी 2025, 06:20 AM 12 मिनट read
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महाकुंभ 2025 : संगम में पावन स्नान जारी, अब तक 27 करोड़ से अधिक लोगों ने लगाई पवित्र डुबकी
Photo: UB India News Archive

मौनी अमावस्या पर हुए हादसे से उबरकर श्रद्धालु संगम में पावन स्नान कर रहे हैं। मेले में व्यवस्थाएं पटरी पर हैं और अधिकारी अलर्ट हैं। तीन फरवरी को अगले अमृत स्नान के मद्देनजर प्रशासन सतर्कता बरत रहा है। श्रद्धालुओं से भी मेला प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।  प्रयागराज में त्रिवेणी के घाटों से ड्रोन से तस्वीरें ली गई हैं। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगा रहे हैं। आज सुबह 8 बजे तक 55 लाख से अधिक लोगों ने पवित्र डुबकी लगाई है। यूपी सरकार के अनुसार 29 जनवरी तक 27 करोड़ से अधिक लोगों ने पवित्र डुबकी लगाई है।

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https://x.com/hashtag/WATCH?src=hashtag_click | https://x.com/hashtag/MahaKumbh2025?src=hashtag_click | Prayagraj, Uttar Pradesh: Drone visuals from the Ghats of Triveni as a huge number of devotees take a holy dip. More than 55 lakh people have taken a holy dip today till 8 am; More than 27 crore people have taken a holy dip till 29th January, as per UP govt.

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प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या स्नान से पहले संगम तट पर हुई भगदड़ और दुखद मौतों के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं. जिसके तहत मेला क्षेत्र में पांच बड़े बदलाव लागू किए हैं. इसके साथ ही पूरे मेला क्षेत्र को अब नो-व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया है. जिससे किसी भी प्रकार के वाहन को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी. यही नहीं वीवीआईपी पास और ट्रैफिक को लेकर भी परिवर्तन किए गए हैं.

महाकुंभ में भगदड़ की घटना के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया है, सीएम योगी के सख्त निर्देशों के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए मेला क्षेत्र के लिए पांच बड़े फैसले लिए गए हैं ताकि आने वाले समय में ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके. पुलिस प्रशासन के लिए अब बसंत पंचमी पर अमृत स्नान को कुशलता पूर्वक कराने की चुनौती है जिसे देखते हुए ये बदलाव किए गए हैं.

मेला क्षेत्र में किए गए ये पांच बड़े बदलाव
1. मेला क्षेत्र पूरी तरह नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है जिसके तहत सभी प्रकार के वाहनों का मेला क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा.
2. मेला प्रशासन की ओर से VVIP पास भी रद्द कर दिए गए हैं. किसी भी विशेष पास के जरिए वाहनों को मेले में प्रवेश नहीं मिलेगा.
3. मेला क्षेत्र में रास्ते वन-वे किए गए हैं. श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए एक तरफा मार्ग व्यवस्था लागू हुई जिसके तहत श्रद्धालुओं के एक मार्ग से एंट्री मिलेगी और वो दूसरे रास्ते से बाहर आ सकेंगे.
4. वाहनों की एंट्री पर रोक लगाई गई है. प्रयागराज से सटे जिलों से आने वाले वाहनों को जिले की सीमा पर रोका जा रहा है.
5. 4 फरवरी बसंत पंचमी का स्नान संपन्न होने तक सख्त प्रतिबंध लागू रहेंगे, शहर में चार पहिया वाहनों की एंट्री पर पूरी तरह से रोक रहेगी.

भगदड़ की घटना के बाद प्रशासन अब कोई भी लापरवाही बरतने के मूड में नहीं हैं, इसलिए ये सख्त नियम लागू किए गए हैं. प्रशासन का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य कुंभ क्षेत्र में भीड़ को नियंत्रित करना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने में सहयोग करें.

क्या पुलिसवाले संभाल नहीं पाए 10 लाख की भीड़ को ………

मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए 28 जनवरी रात 10 बजे से श्रद्धालु संगम पर पहुंचने लगे थे। सुबह तक इंतजार करना था, इसलिए ये लोग संगम नोज से पहले बैरिकेडिंग के किनारे पॉलिथीन बिछाकर सो गए। पीछे से भीड़ आती गई और करीब आधा किमी एरिया पूरी तरह चोक हो गया। भीड़ बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ी, तो सोए लोग कुुचलते चले गए।

संगम की भगदड़ में रमेश और उनका परिवार भी फंस गया। रमेश बताते हैं कि ‘हम 12:30 बजे संगम घाट पर पहुंच गए थे। वहीं आराम करने लगे थे। तभी पुलिस वाले लाउडस्पीकर लेकर आए और कहने लगे कि जाओ स्नान करो।’

‘इसी दौरान भगदड़ मच गई। 15 मिनट तक हम लोग भीड़ में दबे रहे। मैंने मां का हाथ पकड़ रखा था, लेकिन कुछ देर में वह छूट गया। पत्नी भी बिछड़ गई। मैंने जो देखा था, उसके बाद घर फोन कर दिया कि सब लोग खत्म हो गए।’

रमेश की किस्मत अच्छी थी कि उन्हें हॉस्पिटल में मां और पत्नी सही-सलामत मिल गईं। प्रशासन के मुताबिक इस भगदड़ में 30 लोग मारे गए, हालांकि भास्कर रिपोर्टर्स के मुताबिक ये आंकड़ा 35-40 है।

1. हर तरफ से भीड़ संगम की तरफ बढ़ती गई मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान के लिए ज्यादातर श्रद्धालु संगम पहुंचना चाहते थे। भारी भीड़ की वजह से प्रयागराज और मेले में जितने भी रैन बसेरे, धर्मशाला, होटल थे, सब फुल हो गए। लोग सड़कों पर सोने लगे।

सड़कों पर भी जगह नहीं मिली, तो लोग संगम के किनारे पहुंच गए। यहां का आधा हिस्सा अखाड़ों के लिए रिजर्व है। आम लोग उधर नहीं जा सकते थे। आम लोगों के लिए तय जगह पर भीड़ जमा होती गई। चुंगी और गऊ घाट से आ रहे लोग भी संगम की तरफ पहुंच रहे थे। संगम पर भीड़ का आगे बढ़ना रुक गया, लेकिन पीछे से लोग आते रहे। इससे 500 मीटर का एरिया चोक हो गया।

भगदड़ की दूसरी घटना संगम से करीब एक किमी दूर सेक्टर-21 में हुई। ये संगम के बाद सबसे प्राइम एरिया सेक्टर-20 से सटा है। सेक्टर-20 में सभी प्रमुख अखाड़े हैं। इसलिए यहां ज्यादा भीड़ होती है। यहां जमा भीड़ संगम की तरफ जाना चाहती थी। पुलिस उन्हें जिस रास्ते से भेज रही थी, उस पर करीब 7 किमी चलना था।

2. प्रशासन और पुलिस भीड़ मैनेज नहीं कर सकी मेला प्रशासन ने दावा किया था कि क्राउड मैनेजमेंट के लिए 328 AI कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे हेड काउंट कर कंट्रोल रूम को अलर्ट करते रहेंगे। संगम में भीड़ बढ़ती जा रही थी, लेकिन उसे डायवर्ट नहीं किया गया।

सारे पांटून पुल बंद कर दिए गए। इससे जिन लोगों को दूसरी तरफ कल्पवासियों या अपने पंडो के आश्रम में जाना था, वे नहीं जा सके। इसलिए भी संगम पर भीड़ का प्रेशर बना। प्रशासन इसे नहीं संभाल पाया। संगम एरिया में उस वक्त करीब 1000 पुलिसवाले तैनात थे।

3. पुलिस ने लोगों को हटाना चाहा, इससे भगदड़ की स्थिति बनी घटना के वक्त मौजूद लोगों के मुताबिक, पुलिसवाले माइक पर अनाउंस करके लोगों से स्नान के लिए कह रहे थे। लोग ब्रह्म मुहुर्त में तीन बजे से स्नान की बात कह रहे थे। पुलिस ने जबरदस्ती लोगों को उठाना शुरू कर दिया। इससे भगदड़ की स्थिति बन गई।

4. नागा साधुओं के स्नान के लिए आने की अफवाह संगम पर मौजूद लोगों ने बताया कि भारी भीड़ के बीच अफवाह फैली कि नागा साधु स्नान के लिए आ रहे हैं। इसलिए जो लोग बैठे या लेटे हैं, हट जाएं। इसके बाद अफरातफरी मची और लोग दब गए। हालांकि, घटना के पीछे की वजह की जांच हो रही है।

भगदड़ के बाद संगम पहुंची 50 एंबुलेंस संगम से करीब डेढ़ किमी दूर सेंट्रल हॉस्पिटल महाकुंभ एरिया का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां 225 बेड हैं। भगदड़ के वक्त यहां करीब 50 लोगों का स्टाफ था। महाकुंभ एरिया में 25–25 बेड के तीन और हॉस्पिटल हैं।

भगदड़ के बाद घायलों को पहले सेंट्रल हॉस्पिटल ही लाया गया। हमारी टीम हॉस्पिटल पहुंची। देखा कि यहां एक के बाद एक एंबुलेंस आ रही हैं। डॉक्टर घायलों को उतारकर अंदर ले जाते।

करीब 50 एंबुलेंस लगातार संगम तक दौड़ रही थीं। एक एंबुलेंस में दो से तीन लोग हॉस्पिटल लाए गए। थोड़ी ही देर में महिला वार्ड के सभी 100 बेड भर गए। डॉक्टरों ने कुर्सी पर बैठाकर इलाज शुरू कर दिया। मरने वालों की तादाद भी बढ़ रही थी।

संगम नोज पर चीख-पुकार मची थी। जिन लोगों की मौत हो गई, वे गुस्से में थे और पुलिसवालों से नोकझोक कर रहे थे। गोंडा के कर्नलगंज से आईं सुनीता बताती हैं, ‘मेरे साथ पति, बेटा और दीदी थीं। हम संगम से कुछ दूर बैठे थे। पुलिस बार-बार हमसे कह रही थी कि मौनी अमावस्या शुरू हो गई है, जल्दी से नहाइए। इसके बाद हम लोग नहाकर आ गए। तभी भगदड़ मची और सब एक दूसरे पर चढ़ते गए।’

‘हमारे ऊपर भी लोग गिरे। मैं बेहोश हो गई। कुछ देर बाद होश आया तो कमर और पैर में चोट लगी थी। मुझे एंबुलेंस से हॉस्पिटल पहुंचाया।’

भगदड़ वाली जगह से 400 मीटर दूर हॉस्पिटल संगम से करीब 400 मीटर दूर सेक्टर-4 में संगम हॉस्पिटल है। यहां हमें दो लोगों का स्टाफ मिला। हमने पूछा कि यहां कितने बेड है? जवाब मिला- 20 बेड है। यहां बेड कम हैं, इसलिए मरीजों को सीधे सेंट्रल हॉस्पिटल ले जाया जा रहा है। 2 बजे से एंबुलेंस का आना-जाना शुरू हुआ और 90 मिनट तक लगातार वे फेरे लगाती रहीं। मरने वालों की डेडबॉडी मेडिकल कॉलेज भेज दी गईं।

एंबुलेंस स्टाफ के सर्वेश सिंह ने बताया कि लगभग डेढ़ बजे वायरलेस पर मैसेज मिला कि संगम पर भगदड़ मच गई। लोग घायल हैं और हालात काबू में नहीं है। जल्दी मौके पर पहुंचिए। सूचना मिलते ही मैं संगम पर पहुंचा। 2 डेड बॉडी और एक घायल को हॉस्पिटल पहुंचाया। उसका पैर टूट गया था।

मौनी अमावस्या पर संगम तट पर मची भगदड़ में कई लोगों के अपने लापता हो गए। ये लोग महाकुंभ एरिया में बने 10 खोया-पाया सेंटर में जाकर उन्हें तलाशते रहे।
मौनी अमावस्या पर संगम तट पर मची भगदड़ में कई लोगों के अपने लापता हो गए। ये लोग महाकुंभ एरिया में बने 10 खोया-पाया सेंटर में जाकर उन्हें तलाशते रहे।

चश्मदीद बोले– आधे घंटे बाद आईं एंबुलेंस गोंडा के कर्नलगंज से आए रमेश बताते हैं, ‘भगदड़ के बाद चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। वहां बहुत कम पुलिसवाले थे। एंबुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन वो 30 मिनट बाद आई। पता चला कि सेंट्रल हॉस्पिटल से एंबुलेंस निकली है, लेकिन भीड़ में फंस गई है। इसके बाद पुलिस ने लोगों को हटाकर एंबुलेंस को आगे पहुंचाया। एंबुलेंस अखाड़ों के लिए रिजर्व रास्तों से होकर सेंट्रल हॉस्पिटल की तरफ पहुंची।’

भगदड़ की दूसरी घटना सेक्टर-21 में सेक्टर-21 में सतुआ बाबा का आश्रम है। यहां 28 जनवरी की रात करीब 3 बजे भीड़ बढ़ने लगी। ये लोग संगम की तरफ जाना चाहते थे। चश्मदीद बताते हैं कि पुलिस और CRPF के जवान भीड़ को दूसरी तरफ भेज रहे थे। इसी बीच भगदड़ मच गई। बैरिकेड्स टूट गए। लोहे की जालियां लगी थीं, उसमें लोग फंस गए। 5 मिनट में ही 250 मीटर एरिया में चीख-पुकार मच गई।

यहां से करीब 200 मीटर दूर हॉस्पिटल है। ये घायलों से भर गया। एक कमरे में डेड बॉडी रखी जाने लगीं। हॉस्पिटल के एक स्टाफ ने नाम जाहिर न करते हुए बताया कि हादसे के कुछ देर बाद ही 24 डेड बॉडी यहां लाई गई थीं। इनमें से 21 को डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल भेज दिया गया।

यहां हमें उत्तराखंड के रूद्रपुर से आए सूरज पाल मिले। वे हॉस्पिटल के बाहर बैठकर रो रहे थे। उनके पिता नंदराम और मामा शीशपाल लापता थे। सूरज ने बताया, ‘संगम पर जाने के लिए एक ही रास्ता खुला था। उस पर बहुत ज्यादा भीड़ थी। इसी से भगदड़ मच गई। मैं पिता की तलाश में हॉस्पिटल आया हूं।’

संगम की तरफ जाने वाले रास्ते बंद होने की वजह से भीड़ एक जगह जमा हो गई। इससे आगे बढ़ने की जगह भी नहीं बची।
संगम की तरफ जाने वाले रास्ते बंद होने की वजह से भीड़ एक जगह जमा हो गई। इससे आगे बढ़ने की जगह भी नहीं बची।

65 साल के देवशरण बलिया जिले से आए हैं। वे बताते हैं,

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मेरे सामने ही पत्नी नीचे गिर गई और लोग उसके ऊपर से निकलने लगे। मुझे एक लड़के ने खींच लिया, इसलिए मैं बच गया। पत्नी का अब तक कुछ पता नहीं है। उसे तलाशते हुए हॉस्पिटल आया हूं।

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इसी बीच हॉस्पिटल के बाहर एक कागज चिपका दिया गया। इस पर लिखा है, ‘जिन लोगों के रिश्तेदार खो गए हैं, वो स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज के शवगृह या सेक्टर-21 के खोया-पाया केंद्र में जाकर पता कर लें।’

महाकुंभ एरिया में 10 खोया-पाया सेंटर हैं। लापता लोगों को ढूंढने के लिए उनके परिवार वाले यहां पहुंचते रहे। सुबह 11 बजे तक ही करीब 3 हजार लोग यहां इन्क्वायरी कर चुके थे।

शुरुआत में हॉस्पिटल में किसी को एंट्री नहीं दी गई। कुछ देर बाद हम अंदर गए तो देखा कि 20 बेड के हॉस्पिटल में 30 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा था। स्टाफ इस बात का ध्यान रख रहा था कि कोई फोटो या वीडियो न बनाए।

सुबह 6 बजे घायलों को स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां से 14 डेडबॉडी पोस्टमॉर्टम हाउस भेजी गईं। कुंभ मेला की OSD आकांक्षा राणा ने बताया कि संगम नोज पर बैरियर टूटने के बाद भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में कुछ लोग घायल थे, जिनका इलाज कराया गया।

प्रशासन ने देर शाम माना- भगदड़ में 30 मौतें मौनी अमावस्या का स्नान खत्म हो गया। मेला प्रशासन हर दो घंटे में स्नान के लिए आ रहे लोगों की तादाद बताता रहा, लेकिन भगदड़ में कितने लोगों की मौत हुई, इसकी जानकारी नहीं दी। शाम 7 बजे मीडिया सेंटर में मेला अधिकारी विजय किरण आनंद और DIG कुंभ वैभव कृष्ण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 30 मौतों की पुष्टि की।

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