महाकुंभ का समापन , “एकता का महाकुंभ-युग परिर्वतन की आहट “पीएम मोदी ने लिखा ब्लॉग ……..

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रयागराज में महाशिवरात्रि के साथ संपन्न महाकुंभ (Mahakumbh) पर्व की दिव्यता और भव्यता पर अपने मां के उद्गार व्यक्त करते हुए इसे युग परिवर्तन की आहट बताया है। उन्होंने महाकुंभ पर अपने विचार को लेखबद्ध करते हुए गुरुवार को कहा है कि सहस्राव्दिय से चली आ रही महाकुंभ (Mahakumbh) की यह […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 27 फरवरी 2025, 07:55 AM 12 मिनट read
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महाकुंभ का समापन , “एकता का महाकुंभ-युग परिर्वतन की आहट “पीएम मोदी ने लिखा ब्लॉग ……..
Photo: UB India News Archive

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रयागराज में महाशिवरात्रि के साथ संपन्न महाकुंभ (Mahakumbh) पर्व की दिव्यता और भव्यता पर अपने मां के उद्गार व्यक्त करते हुए इसे युग परिवर्तन की आहट बताया है। उन्होंने महाकुंभ पर अपने विचार को लेखबद्ध करते हुए गुरुवार को कहा है कि सहस्राव्दिय से चली आ रही महाकुंभ (Mahakumbh) की यह सनातन परंपरा राष्ट्र चेतना जागृत करने वाला पर्व है। पीएम मोदी ने लिखा, “महाकुंभ संपन्न हुआ…एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। जब एक राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वो सैकड़ों साल की गुलामी की मानसिकता के सारे बंधनों को तोड़कर नव चैतन्य के साथ हवा में सांस लेने लगता है, तो ऐसा ही दृश्य उपस्थित होता है, जैसा हमने 13 जनवरी के बाद से प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में देखा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मैंने देवभक्ति से देशभक्ति की बात कही थी। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान सभी देवी-देवता जुटे, संत-महात्मा जुटे, बाल-वृद्ध जुटे, महिलाएं-युवा जुटे, और हमने देश की जागृत चेतना का साक्षात्कार किया। उन्होंने कहा, “यह महाकुंभ एकता का महाकुंभ था, जहां 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ गई थीं।

संगम पर स्नान की भावनाओं का ज्वार, लगातार बढ़ता ही रहा

पीएम मोदी ने कहा, “तीर्थराज प्रयाग के इसी क्षेत्र में एकता, समरसता और प्रेम का पवित्र क्षेत्र श्रृंगवेरपुर भी है, जहां प्रभु श्रीराम और निषादराज का मिलन हुआ था। उनके मिलन का वो प्रसंग भी हमारे इतिहास में भक्ति और सद्भाव के संगम की तरह ही है। प्रयागराज का ये तीर्थ आज भी हमें एकता और समरसता की वो प्रेरणा देता है।” उन्होंने कहा कि बीते 45 दिनों में प्रतिदिन, मैंने देखा, कैसे देश के कोने-कोने से लाखों-लाख लोग संगम तट की ओर बढ़े जा रहे हैं। संगम पर स्नान की भावनाओं का ज्वार, लगातार बढ़ता ही रहा। हर श्रद्धालु बस एक ही धुन में था, संगम में स्नान! मां गंगा, यमुना, सरस्वती की त्रिवेणी हर श्रद्धालु को उमंग, ऊर्जा और विश्वास के भाव से भर रही थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में हुआ महाकुंभ (Mahakumbh) का ये आयोजन, आधुनिक युग के ‘मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स’ के लिए, ‘प्लानिंग’ और ‘पॉलिसी एक्सपर्ट्स’ के लिए, नए सिरे से अध्ययन का विषय बना है। आज पूरे विश्व में इस तरह के विराट आयोजन की कोई दूसरी तुलना नहीं है, ऐसा कोई दूसरा उदाहरण भी नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया हैरान है कि कैसे एक नदी तट पर, त्रिवेणी संगम पर इतनी बड़ी संख्या में करोड़ों की संख्या में लोग जुटे। इन करोड़ों लोगों को ना औपचारिक निमंत्रण था, ना ही किस समय पहुंचना है, उसकी कोई पूर्व सूचना थी। बस, लोग महाकुंभ चल पड़े और पवित्र संगम में डुबकी लगाकर धन्य हो गए।

‘स्नान के बाद असीम आनंद और संतोष से भरे वो चेहरे नहीं भूल सकता’

मोदी ने कहा, “मैं वो तस्वीरें भूल नहीं सकता, स्नान के बाद असीम आनंद और संतोष से भरे वो चेहरे नहीं भूल सकता। महिलाएं हों, बुजुर्ग हों, हमारे दिव्यांग जन हों, जिससे जो बन पड़ा, वो साधन करके संगम तक पहुंचा।” उन्होंने कहा, “मेरे लिए ये देखना बहुत ही सुखद रहा कि बहुत बड़ी संख्या में भारत की आज की युवा पीढ़ी प्रयागराज पहुंची। भारत के युवाओं का इस तरह महाकुंभ (Mahakumbh) में हिस्सा लेने के लिए आगे आना, एक बहुत बड़ा संदेश है। इससे ये विश्वास दृढ़ होता है कि भारत की युवा पीढ़ी हमारे संस्कार और संस्कृति की वाहक है और इसे आगे ले जाने का दायित्व समझती है और इसे लेकर संकल्पित भी है, समर्पित भी है!”

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महाकुंभ में प्रयागराज पहुंचने वालों की संख्या ने निश्चित तौर पर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। अमेरिका की आबादी के करीब दोगुने लोगों ने एकता के महाकुंभ में हिस्सा लिया, डुबकी लगाई, लेकिन इस महाकुंभ में हमने ये भी देखा कि जो प्रयाग नहीं पहुंच पाए, वो भी इस आयोजन से भाव-विभोर होकर जुड़े। कुंभ से लौटते हुए जो लोग त्रिवेणी तीर्थ अपने साथ लेकर गए, उस जल की कुछ बूंदों ने भी करोड़ों भक्तों को कुंभ स्नान जैसा ही पुण्य दिया। कितने ही लोगों का कुंभ से वापसी के बाद गांव-गांव में जो सत्कार हुआ, जिस तरह पूरे समाज ने उनके प्रति श्रद्धा से सिर झुकाया, वो अविस्मरणीय है! उन्होंने कहा कि ये कुछ ऐसा हुआ है, जो बीते कुछ दशकों में पहले कभी नहीं हुआ। ये कुछ ऐसा हुआ है, जो आने वाली कई-कई शताब्दियों की एक नींव रख गया है।

भारत अब एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है

PM मोदी ने कहा, “आध्यात्मिक क्षेत्र में रिसर्च करने वाले लोग करोड़ों भारतवासियों के इस उत्साह पर अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि अपनी विरासत पर गौरव करने वाला भारत अब एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। मैं मानता हूं, ये युग परिवर्तन की वो आहट है, जो भारत का नया भविष्य लिखने जा रही है।” उन्होंने कहा कि महाकुंभ की इस परंपरा से, हजारों वर्षों से भारत की राष्ट्रीय चेतना को बल मिलता रहा है। हर पूर्णकुंभ में समाज की उस समय की परिस्थितियों पर ऋषियों-मुनियों, विद्वत् जनों द्वारा 45 दिनों तक मंथन होता था। इस मंथन में देश को, समाज को नए दिशा-निर्देश मिलते थे। इसके बाद, हर छह वर्ष में अर्धकुंभ में परिस्थितियों और दिशा-निर्देशों की समीक्षा होती थी।

12 पूर्णकुंभ होते-होते, यानि 144 साल के अंतराल पर जो दिशा-निर्देश, जो परंपराएं पुरानी पड़ चुकी होती थीं, उन्हें त्याग दिया जाता था, आधुनिकता को स्वीकार किया जाता था और युगानुकूल परिवर्तन करके नए सिरे से नई परंपराओं को गढ़ा जाता था। 144 वर्षों के बाद होने वाले महाकुंभ में ऋषियों-मुनियों द्वारा, उस समय-काल और परिस्थितियों को देखते हुए नए संदेश भी दिए जाते थे। अब इस बार 144 वर्षों के बाद पड़े इस तरह के पूर्ण महाकुंभ ने भी हमें भारत की विकासयात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया है। ये संदेश है ‘विकसित भारत का’!

सब एक महायज्ञ के लिए एकता के महाकुंभ में एक हो गए

प्रधानमंत्री ने कहा, “जिस तरह एकता के महाकुंभ में हर श्रद्धालु, चाहे वो गरीब हों या संपन्न हों, बाल हो या वृद्ध हो, देश से आया हो या विदेश से आया हो, गांव का हो या शहर का हो, पूर्व से हो या पश्चिम से हो, उत्तर से हो दक्षिण से हो, किसी भी जाति का हो, किसी भी विचारधारा का हो, सब एक महायज्ञ के लिए एकता के महाकुंभ में एक हो गए! एक भारत-श्रेष्ठ भारत का ये चिर-स्मरणीय दृश्य, करोड़ों देशवासियों में आत्मविश्वास के साक्षात्कार का महापर्व बन गया। अब इसी तरह हमें एक होकर विकसित भारत के महायज्ञ के लिए जुट जाना है।”

खुशी है कि जनता जनार्दन की यही शक्ति, विकसित भारत के लिए एकजुट हो रही है

मोदी ने कहा, आज मुझे वो प्रसंग भी याद आ रहा है जब बालक रूप में श्रीकृष्ण ने माता यशोदा को अपने मुख में ब्रह्मांड के दर्शन कराए थे। वैसे ही इस महाकुंभ में भारतवासियों ने और विश्व ने भारत के सामर्थ्य के विराट स्वरूप के दर्शन किए हैं। हमें अब इसी आत्मविश्वास से एक निष्ठ होकर, विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए आगे बढ़ना है।” उन्होंने कहा, “भारत की ये एक ऐसी शक्ति है, जिसके बारे में भक्ति आंदोलन में हमारे संतों ने राष्ट्र के हर कोने में अलख जगाई थी।

विवेकानंद हों या श्री अरबिंदो हों, हर किसी ने हमें इसके बारे में जागरूक किया था। इसकी अनुभूति गांधी जी ने भी आजादी के आंदोलन के समय की थी। आजादी के बाद भारत की इस शक्ति के विराट स्वरूप को यदि हमने जाना होता, और इस शक्ति को ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की ओर मोड़ा होता, तो ये गुलामी के प्रभावों से बाहर निकलते भारत की बहुत बड़ी शक्ति बन जाती! लेकिन हम तब ये नहीं कर पाए। अब मुझे संतोष है, खुशी है कि जनता जनार्दन की यही शक्ति, विकसित भारत के लिए एकजुट हो रही है!”

हम एकता के महामंत्र को जीवन मंत्र बनाएं

प्रधानमंत्री ने कहा, “वेद से विवेकानंद तक और उपनिषद से उपग्रह तक, भारत की महान परंपराओं ने इस राष्ट्र को गढ़ा है। मेरी कामना है, एक नागरिक के नाते, अनन्य भक्ति भाव से, अपने पूर्वजों का, हमारे ऋषियों-मुनियों का पुण्य स्मरण करते हुए, एकता के महाकुंभ से हम नई प्रेरणा लेते हुए, नए संकल्पों को साथ लेकर चलें! हम एकता के महामंत्र को जीवन मंत्र बनाएं, देश सेवा में ही देव सेवा, जीव सेवा में ही शिव सेवा के भाव से स्वयं को समर्पित करें!” उन्होंने कहा, “जब मैं काशी चुनाव के लिए गया था, तो मेरे अंतरमन के भाव शब्दों में प्रकट हुए थे, और मैंने कहा था, मां गंगा ने मुझे बुलाया है।

इसमें एक दायित्व बोध भी था, हमारी मां स्वरूपा नदियों की पवित्रता को लेकर, स्वच्छता को लेकर! प्रयागराज में भी गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम पर मेरा ये संकल्प और दृढ़ हुआ है। गंगा जी, यमुना जी, हमारी नदियों की स्वच्छता हमारी जीवन यात्रा से जुड़ी है। हमारी जिम्मेदारी बनती है कि नदी चाहे छोटी हो या बड़ी, हर नदी को जीवनदायिनी मां का प्रतिरूप मानते हुए, हम अपने यहां सुविधा के अनुसार, नदी उत्सव जरूर मनाएं! ये एकता का महाकुंभ हमें इस बात की प्रेरणा देकर गया है कि हम अपनी नदियों को निरंतर स्वच्छ रखें, इस अभियान को निरंतर मजबूत करते रहें!”

मोदी ने कहा है,” मैं जानता हूं, इतना विशाल आयोजन आसान नहीं था। मैं प्रार्थना करता हूं मां गंगा से, मां यमुना से, मां सरस्वती से, हे मां हमारी आराधना में कुछ कमी रह गई हो तो क्षमा करिएगा! जनता जनार्दन, जो मेरे लिए ईश्वर का ही स्वरूप है, श्रद्धालुओं की सेवा में भी अगर हमसे कुछ कमी रह गई हो, तो मैं जनता जनार्दन का भी क्षमाप्रार्थी हूं!”

मैं उत्तर प्रदेश की जनता का आभार व्यक्त करता हूं

प्रधानमंत्री ने कहा, “श्रद्धा से भरे जो करोड़ों लोग प्रयाग पहुंचकर इस एकता के महाकुंभ का हिस्सा बने, उनकी सेवा का दायित्व भी श्रद्धा के सामर्थ्य से ही पूरा हुआ है। उत्तर प्रदेश का सांसद होने के नाते मैं गर्व से कह सकता हूं कि योगी जी के नेतृत्व में शासन, प्रशासन और जनता ने मिलकर, इस एकता के महाकुंभ को सफल बनाया! केंद्र हो या राज्य हो, यहां ना कोई शासक था, ना कोई प्रशासक था, हर कोई श्रद्धा भाव से भरा सेवक था।

हमारे सफाईकर्मी, हमारे पुलिसकर्मी, नाविक साथी, वाहन चालक, भोजन बनाने वाले, सभी ने पूरी श्रद्धा और सेवा भाव से निरंतर काम करके इस महाकुंभ को सफल बनाया। विशेषकर, प्रयागराज के निवासियों ने इन 45 दिनों में तमाम परेशानियों को उठाकर भी जिस तरह श्रद्धालुओं की सेवा की है, वह अतुलनीय है। मैं प्रयागराज के सभी निवासियों का, उत्तर प्रदेश की जनता का आभार व्यक्त करता हूं, अभिनंदन करता हूं!

उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दृश्यों को देखकर, बहुत प्रारंभ से ही मेरे मन में जो भाव जगे, जो पिछले 45 दिनों में और अधिक पुष्ट हुए हैं, राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को लेकर मेरी आस्था, अनेक गुना मजबूत हुई है। 140 करोड़ देशवासियों ने जिस तरह प्रयागराज में एकता के महाकुंभ को आज के विश्व की एक महान पहचान बना दिया, वो अद्भुत है!”

महाकुंभ की आध्यात्मिक चेतना की धारा और एकता की धारा निरंतर बहती रहेगी

PM मोदी ने कहा है,” देशवासियों के इस परिश्रम से, उनके प्रयास से, उनके संकल्प से अभीभूत… मैं जल्द ही द्वादश ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग, श्री सोमनाथ के दर्शन करने जाऊंगा और श्रद्धा रूपी संकल्प पुष्प को समर्पित करते हुए हर भारतीय के लिए प्रार्थना करूंगा!” उन्होंने कहा, “महाकुंभ का स्थूल स्वरूप महाशिवरात्रि को पूर्णता प्राप्त कर गया है। लेकिन मुझे विश्वास है, मां गंगा की अविरल धारा की तरह, महाकुंभ की आध्यात्मिक चेतना की धारा और एकता की धारा निरंतर बहती रहेगी!”

योगी ने संगम पर झाड़ू लगाई, गंगा से कचरा निकाला, पूजन किया

45 दिन तक चले महाकुंभ का कल (26 फरवरी) समापन हो चुका है। हालांकि, आज भी मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ है। लोग संगम स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। मेले में दुकानें भी लगी हैं।

सीएम योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव संगम पहुंचे। योगी और दोनों डिप्टी सीएम ने अरैल घाट पर झाड़ू लगाई। सभी ने गंगा के कूड़ा-कचरा निकाला। गंगा की पूजा की। योगी ने गंगा पंडाल में सफाईकर्मियों और स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानित किया।

महाकुंभ के समापन पर पीएम मोदी ने ‘एकता का महाकुंभ-युग परिर्वतन की आहट’ शीर्षक से ब्लॉग लिखा। उन्होंने लिखा- इतना विशाल आयोजन आसान नहीं था। मैं प्रार्थना करता हूं मां गंगा से…मां यमुना से…मां सरस्वती से…हे मां हमारी आराधना में कुछ कमी रह गई हो तो क्षमा करिएगा। श्रद्धालुओं की सेवा में भी कुछ कमी रह गई हो, तो मैं जनता जनार्दन का भी क्षमाप्रार्थी हूं।

संगम और योगी से जुड़ी तस्वीरें-

डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने गार्बेज बैग पकड़ा और CM योगी ने गंगा से कचरा निकालकर उसमें भरा।
डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने गार्बेज बैग पकड़ा और CM योगी ने गंगा से कचरा निकालकर उसमें भरा।
योगी ने संगम में सफाई अभियान चलाया। उनके साथ दोनों डिप्टी सीएम भी मौजूद थे।
योगी ने संगम में सफाई अभियान चलाया। उनके साथ दोनों डिप्टी सीएम भी मौजूद थे।
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