हप्ते भर में ही बैकफुट पर हुए क्यों ट्रम्प ,75 देशों के लिए टैरिफ पर 90 दिन की रोक लगाई………….

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीति पर बड़ा यू-टर्न लेते हुए बुधवार को 75 देशों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ पर 90 दिन तक रोक लगा दी है. बीते हफ्ते तक ट्रंप ने कहा था कि “मेरी नीतियां कभी नहीं बदलेंगी”, लेकिन केवल एक सप्ताह में ही राजनीतिक और आर्थिक दबाव के चलते […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 10 अप्रैल 2025, 05:35 AM 7 मिनट read
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हप्ते भर में ही बैकफुट पर हुए क्यों ट्रम्प ,75 देशों के लिए टैरिफ पर 90 दिन की रोक लगाई………….
Photo: UB India News Archive

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीति पर बड़ा यू-टर्न लेते हुए बुधवार को 75 देशों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ पर 90 दिन तक रोक लगा दी है. बीते हफ्ते तक ट्रंप ने कहा था कि “मेरी नीतियां कभी नहीं बदलेंगी”, लेकिन केवल एक सप्ताह में ही राजनीतिक और आर्थिक दबाव के चलते उन्होंने इस योजना पर विराम लगाने का निर्णय लिया. अमेरिकी बॉन्‍ड बाजार में मची हलचल ने डोनाल्‍ड ट्रंप को टैरिफ पर अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया. बॉन्ड बाजार में आई तेज गिरावट और आर्थिक संकट की आशंका से अमेरिकी प्रशासन में खलबली मच गई. कारोबारी जगत की तीखी प्रतिक्रिया और ट्रंप समर्थकों द्वारा ही राष्‍ट्रपति पर हमला बोलने से वे चौतरफा घिर गए और उन्‍हें टैरिफ को 90 दिनों के लिए रोकने का ऐलान करना पड़ा.

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग में बॉन्ड बाजार की स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता ट्रंप के फैसले की प्रमुख वजह बनी. ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार सुबह ट्रंप से मुलाकात की और उन्हें बाजार की गिरावट और उसकी संभावित आर्थिक तबाही के बारे में जानकारी दी. अमेरिकी सरकारी बॉन्ड को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन अचानक मांग में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने प्रशासन को चौंका दिया. ट्रंप ने भी प्रेस से बातचीत में कहा, “बॉन्ड बाजार काफी पेचीदा है. मैं इसे देख रहा था. कल रात मैंने देखा कि लोग थोड़ा घबरा रहे थे.” एक हफ्ते पहले ग्लोबल ट्रेड सिस्टम को हिला देने वाली घोषणा करने के बाद अब ट्रंप ने कहा, “आपको लचीला होना पड़ता है. वित्तीय बाजार तेजी से बदलते हैं. देखिए आज आपने कितना कुछ बदला.”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को 75 से ज्यादा देशों पर जैसे को तैसा यानी कि रेसिप्रोकल टैरिफ 90 दिनों के लिए रोक दिया है। यह उनके फैसले के साथ ही लागू हो गया है। हालांकि, उन्होंने चीन को इस छूट में शामिल नहीं किया है, बल्कि उस पर लगे टैरिफ को 104% से बढ़ाकर 125% कर दिया है। ट्रम्प ने यह कार्रवाई चीन की तरफ से लगाए गए जवाबी 84% टैरिफ के बाद की।

चीन पर 125% टैरिफ लगाने का आसान भाषा में मतलब है कि चीन में बना 100 डॉलर का सामान अब अमेरिका में जाकर 225 डॉलर का हो जाएगा। अमेरिका में चीनी सामानों के मंहगे होने से उसकी बिक्री कम हो जाएगी।

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि चीन ने ग्लोबल मार्केट के लिए सम्मान नहीं दिखाया है। इसी वजह से मैं उस टैरिफ बढ़ाकर 125% कर रहा हूं। उम्मीद है कि चीन जल्द यह समझेगा कि अमेरिका और दूसरे देशों को लूटने के दिन चले गए हैं।

जो देश डील करेंगे, उनके लिए टैरिफ 10% रहेगा

ट्रम्प ने कहा कि 75 से ज्यादा देशों ने अमेरिका के प्रतिनिधियों को बुलाया है और इन देशों ने मेरे मजबूत सुझाव पर अमेरिका के खिलाफ किसी भी तरह से जवाबी कार्रवाई नहीं की है। इसलिए मैंने 90 दिन के विराम (पॉज) को स्वीकार किया है। टैरिफ पर इस रोक से नए व्यापार समझौतों पर बातचीत करने का समय मिलेगा।

वहीं, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत करने के इच्छुक देशों के लिए यह दर घटकर 10% हो जाएगी। उन्होंने कहा कि कनाडा और मेक्सिको के कुछ सामानों पर 25% टैरिफ लगता था। अब उन्हें भी बेसलाइन टैरिफ में शामिल कर लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि यूरोपीय यूनियन इस बेसलाइन टैरिफ में शामिल है या नहीं।

मंदी, महंगाई का खतरा था, ट्रम्प के करीबी भी टैरिफ के खिलाफ थे

1. ट्रम्प टैरिफ के चलते अमेरिका समेत ग्लोबल मार्केट में 10 लाख करोड़ डॉलर की गिरावट आई थी। हालांकि, टैरिफ रोकने के फैसले के कुछ घंटों के अंदर ही अमेरिकी शेयर बाजार की वैल्यू 3.1 लाख करोड़ डॉलर बढ़ गई।

2. ट्रम्प के कई करीबी सलाहकारों और खुद इलॉन मस्क भी टैरिफ वॉर रोकने की सलाह दे चुके थे। ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता भी टैरिफ के खिलाफ थे। मिच मैककोनल, रैंड पॉल, सुसन कोलिन्स व लिसा मुर्कोव्स्की ने टैरिफ को ‘असंवैधानिक, अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक और कूटनीतिक रूप से खतरनाक’ बताया था।

3. टैरिफ के चलते अप्रत्याशित तौर पर अमेरिकी बॉन्ड्स की बिकवाली शुरू हो गई थी। क्रूड की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, यह कोरोना काल जैसी स्थिति बन रही थी।

4. वॉल स्ट्रीट के बैंकों ने टैरिफ के चलते अमेरिका में महंगाई, बेरोजगारी बढ़ने और मंदी आने की चेतावनी दी थी।

5. अमेरिका चीन से 440 अरब डॉलर का आयात करता है। इस पर उसने 124% टैरिफ लगाया है। चीन से प्रोडक्ट्स मंगवाने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए अब इसका विकल्प खोजना बड़ी चुनौती बन रहा था। ऐसे में बाकी देशों पर टैरिफ रोकना इन कंपनियों की सप्लाई चेन के लिए जरूरी था।

ऐलान होते ही अमेरिकी शेयर बाजार में 10% तक तेजी

टैरिफ रोकने के ऐलान से 4 घंटे पहले ही ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “दिस इज ए ग्रेट टाइम टु बाय (यह खरीदी का बहुत अच्छा समय है)।” इसके बाद जैसे ही ट्रम्प ने रेसिप्रोकल टैरिफ रोकने की घोषणा की, शेयर बाजारों में तेजी लौट आई।

डॉऊ जोंस 2,600 अंक (7.1%) से अधिक उछला। S&P 500 में 9.5% बढ़ोतरी हुई। नैस्डैक 1536 अंक या 10.3% बढ़ा। नैस्डेक में यह बढ़त 2008 की मंदी के बाद सबसे बड़ी है। वहीं, एपल, एनवीडिया, टेस्ला जैसी कंपनियों के शेयर में भी उछाल देखा गया।

सबसे ज्यादा बढ़त 20.01% टेस्ला में हुई। बिटकॉइन में भी 6% बढ़त हुई। मालूम हो, एक दिन पहले ही टैरिफ वॉर से घबराए दुनियाभर के बाजार 4% तक गिर गए थे।

चीन पर टैरिफ क्यों बढ़ाया?

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रम्प ने उन देशों को टैरिफ वापस लेकर प्रोत्साहित किया है, जिन्होंने बढ़ते ट्रेड वॉर के बीच अमेरिका के खिलाफ मोर्चा नहीं खोला। चूंकि चीन ने बुधवार को ही अमेरिका पर टैरिफ 34% से बढ़ाकर 84% करने की घोषणा की थी। इसलिए ट्रम्प ने चीन पर टैरिफ 104% से 125% कर दिया।

EU को लेकर स्पष्टता नहीं?

यूरोपीय यूनियन (EU) के 26 देशों ने 9 अप्रैल को अमेरिका के सामानों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यह टैरिफ 15 अप्रैल से लागू हो जाएगा। यूरोपीय यूनियन के एकमात्र देश हंगरी ने अमेरिका पर टैरिफ लगाने के फैसले का विरोध किया था।

हालांकि इसके बावजूद EU ने बुधवार को 23 अरब डॉलर (1.8 लाख करोड़ रु.) के अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। ऐसे में अब EU पर टैरिफ की दर कितनी रहेगी, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।

चीन नई इंडस्ट्री व इनोवेशन बढ़ाने पर जोर दे रहा

चीन के पास अमेरिका के करीब 600 अरब पाउंड (करीब 760 अरब डॉलर) के सरकारी बॉन्ड हैं। मतलब ये कि चीन के पास अमेरिकी इकोनॉमी को प्रभावित करने की बड़ी ताकत है। वहीं, चीन ने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है।

चीन ने 1.9 लाख करोड़ डॉलर का अतिरिक्त लोन इंडस्ट्रियल सेक्टर को दिया है। इससे यहां फैक्ट्रियों का निर्माण और अपग्रेडेशन तेज हुआ। हुआवेई ने शंघाई में 35,000 इंजीनियरों के लिए एक रिसर्च सेंटर खोला है, जो गूगल के कैलिफोर्निया हेडक्वार्टर से 10 गुना बड़ा है। इससे टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कैपेसिटी तेज होगी।

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