क्या परमाणु हमले की धमकी से सरेंडर कर गया आईएमएफ

पहलगाम हमले में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने किस तरह से बेगुनाहों का कत्ल किया, उससे पूरी दुनिया वाकिफ है। ऐसे समय में अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी संस्था से फिर से राहत पैकेज देने का प्रस्ताव पास करना चौंकाने वाला है। भारत ने तो वोटिंग से हटकर अपनी […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 10 मई 2025, 09:21 AM 5 मिनट read
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क्या परमाणु हमले की धमकी से सरेंडर कर गया आईएमएफ
Photo: UB India News Archive

पहलगाम हमले में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने किस तरह से बेगुनाहों का कत्ल किया, उससे पूरी दुनिया वाकिफ है। ऐसे समय में अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी संस्था से फिर से राहत पैकेज देने का प्रस्ताव पास करना चौंकाने वाला है। भारत ने तो वोटिंग से हटकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी, लेकिन सवाल है कि एक तरह से आंतकी राष्ट्र के रूप में स्थापित हो चुके पाकिस्तान को एक वैश्विक संस्था की ओर से ऐसे समय में बेलआउट देने की सोच के पीछे आखिर क्या मजबूरी हो सकती है। भारत की चिंता बेवजह नहीं है। वह देख रहा है कि कर्ज में डूबे पाकिस्तान ने आज तक राहत पैकेज के नाम पर मिले ऐसे फंड का कभी भी उचित उपयोग करने की मानसिकता नहीं दिखाई है। यही वजह है कि भारत ने इसपर यह कहकर आपत्ति जताई है कि इस, ‘फंड का राज्य प्रायोजित सीमापार आतंकवाद के लिए दुरुपयोग की संभावना’है।

पाकिस्तान के आतंकवाद की स्पॉन्सरशिप को पुरस्कार!

दरअसल, IMF में किसी प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने का कोई प्रावधान नहीं है। कोई देश या तो इसके पक्ष में मतदान कर सकता है या इससे दूर रह सकता है। भारत विरोध में वोट नहीं डाल सकता था, इसलिए बाहर होना ही उसकी मजबूरी बन गई। आईएमएफ की बैठक पर एक बयान में भारत ने कहा, ‘भारत ने बताया कि सीमा पार आतंकवाद के लगातार स्पॉन्सरशिप को पुरस्कृत करना, वैश्विक समुदाय को एक खतरनाक संदेश देता है, फंडिंग एजेंसियों और दाताओं की प्रतिष्ठा को जोखिम में डालता है और वैश्विक मूल्यों का मजाक उड़ाता है।’

35 साल में 28 बार मेहरबानी के पीछे की मजबूरी?

यह पहली बार नहीं है कि IMF ने पकिस्तान के लिए इस तरह से खजाना खोला है। 1989 से अब तक के 35 वर्षों में पाकिस्तान को 28 बार IMF से कर्ज मिला है। पिछले पांच सालों में IMF की चार योजनाओं से पाकिस्तान को मदद मिली है। लेकिन, पाकिस्तान में सुधार के नाम पर दिखाने के लिए कुछ खास नहीं है। मशहूर पाकिस्तानी अर्थशास्त्री कैसर बंगाली भी कह चुके हैं कि उनका देश कंगाल हो गया है। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान कर्ज चुकाने के लिए भी कर्ज ले रहा है। हालत बहुत खराब है।’ फिर भी IMF बोर्ड की बैठक में पाकिस्तान को 1 बिलियन डॉलर का लोन विस्तार देना बड़ी बात है। यह लोन पाकिस्तान को IMF के एक प्रोग्राम के तहत मिलेगा। IMF ने पाकिस्तान को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भी 1.3 बिलियन डॉलर का क्रेडिट लाइन देने पर भी विचार किया है। इसका मतलब है, पाकिस्तान को जलवायु परिवर्तन के लिए भी पैसा मिल सकता है।

आतंकवाद को बनाया आर्थिक नीति का हिस्सा!

भारत का साफ कहना है कि पाकिस्तान में अगर पहले के कार्यक्रम सफल होते, तो उसे IMF से बार-बार मदद नहीं मांगनी पड़ती। भारत ने जोर देकर कहा कि किसी भी समझदार देश के लिए उसकी अर्थव्यवस्था सबसे जरूरी होनी चाहिए। लेकिन पाकिस्तान ऐसा नहीं करता। कर्ज चुकाने के बाद उसके पास जो भी पैसे बचते हैं, उसमें से ज्यादातर वो रक्षा बजट पर खर्च कर देता है। आतंकी कैंपों में भारतीय हमले में ढेर हुए दहशत के आकाओं के जनाजे में जिस तरह से पाकिस्तानी सेना के बड़े अफसर शामिल हुए हैं, वह भी इसकी गवाही देता है कि आतंकवाद उसकी रक्षा और विदेश नीति का अटूट हिस्सा बन चुका है। पाकिस्तान के पास जो पैसे बाकी बचते हैं, वह भ्रष्टाचार में बर्बाद हो जाता है।

बढ़ते कर्ज और रक्षा बजट से कंगाल हुआ पाकिस्तान

अगर स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यट (SIPRI) के आंकड़ों को देखें तो पाकिस्तान ने 2024 में रक्षा पर 10 अरब डॉलर खर्च कर दिए। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब पाकिस्तान पर 130 अरब डॉलर से ज्यादा कर्ज है। जबकि, उसके पास सिर्फ 15.5 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बचा हुआ है। इससे वह मात्र तीन महीने का आयात कर सकता है। फिर भी मौजूदा साल में इसका रक्षा बजट 18% बढ़ाने पर विचार चल रहा है। यही वजह है कि 2025 में पाकिस्तान का GDP के अनुपात में कर्ज 73.6% रहने का अनुमान है। जबकि, पाकिस्तान की स्थिति आज ऐसी है कि अगर टैक्स में 100 रुपये आते हैं तो सिर्फ 60 पैसे ही व्यापार और कारोबार से आते हैं। पाकिस्तान के ज्यादातर नेता इसी श्रेणी में आते हैं।

 

परमाणु हमले की धमकी से सरेंडर कर गया IMF?

ऐसे में सवाल है कि क्या IMF पाकिस्तान का परमाणु बम के इस्तेमाल की धमकी से डर गया है? क्या दुनिया को वह फिर से एक बार ब्लैकमेल करने में सफलता हासिल कर ली है? क्योंकि, जब से भारत ने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को सजा देने की ओर कदम बढ़ाने पर विचार शुरू किया है, उसकी ओर से लगातार इसकी धमकियां दी गई हैं। लगभग पूरा विश्व आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का साथ देता नजर आया है, लेकिन बावजूद इसके पाकिस्तान को इस रह से अरबों डॉलर का उधार देने पर सवाल उठना लाजिमी है।

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