तेल के बदले हथियार, क्या वर्ल्ड वॉर-3 की स्क्रिप्ट हो रही है तैयार?

इतिहास के पन्नों को पलटते हुए तीन साल पहले चलें तो किसी ने नहीं सोचा था कि रूस यूक्रेन पर हमला कर देगा और दोनों देशों का युद्ध इतना लंबा खिंच जाएगा. उसके बाद इजराइल का गाजा पर हमला और फिर ईरान इजराइल युद्ध. बीच में कुछ दिनों तक भारत और पाकिस्तान के बीच भी […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 8 जुलाई 2025, 12:57 PM 7 मिनट read
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तेल के बदले हथियार, क्या वर्ल्ड वॉर-3 की स्क्रिप्ट हो रही है तैयार?
Photo: UB India News Archive

इतिहास के पन्नों को पलटते हुए तीन साल पहले चलें तो किसी ने नहीं सोचा था कि रूस यूक्रेन पर हमला कर देगा और दोनों देशों का युद्ध इतना लंबा खिंच जाएगा. उसके बाद इजराइल का गाजा पर हमला और फिर ईरान इजराइल युद्ध. बीच में कुछ दिनों तक भारत और पाकिस्तान के बीच भी हवाई संघर्ष देखने को मिला. इन तमाम देशों के बीच चले युद्ध में काफी हथियारों का इस्तेमाल हुआ. भारत और पाकिस्तान ने वॉर के एक नए युग की शुरुआत की. दोनों के बीच ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल ज्यादा देखने को मिला. इस संघर्ष ने बताया आने वाले दिनों में वॉर की रूपरेखा क्या हो सकती है?

इस दौरान बम गोला बारूद और असलाहों की सप्लाई और प्रोडक्शन में भी बढ़ोतरी देखने को मिली. मौजूदा समय में भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर है. रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है. उधर इजराइल और हूतियों के बीच संघर्ष शुरू हो गया है. ईरान सीजफायर के दौर से गुजर रहा है. जानकारों का अनुमान है कि ईरान का यूरेनियम प्रोग्राम अमेरिका को सीधे तौर युद्ध में उतार सकता है. जिसकी चेतावनी डोनाल्ड ट्रंप कई बार दे चुके हैं. सीजफायर के दौर में तमाम देश ताकत को बढ़ाने में जुट गए हैं. दुनिया के कई अहम देश हथियारों की खरीद फरोख्त में कच्चे तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं.

ईरान चीन से कच्चे तेल के बदले में हथियार खरीद रहा है. वहीं यूक्रेन अपने प्राकृतिक संसाधनों के बदले में अमेरिका और यूरोप ये हथियार खरीदने में लगा है. रूस ने भी हथियारों के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए कच्चे तेल का इस्तेमाल किया है. चीन और भारत को सस्ते में कच्चा तेल बेचकर उसके पैसों से हथियारों में प्रोडक्शन में लगा रहा है. जिसकी एक चेतावनी डोनाल्ड ट्रंप भी दे चुके हैं. वहीं पाकिस्तान भी अपने प्राकृतिक संसाधनों के बदले में चीन से मिसाइल, फाइटर जेट और डिफेंस सिस्टम ले रहा है. यही वजह भी है कि पाकिस्तान के डिफेंस बजट में काफी इजाफा भी देखने को मिला है.

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि कच्चे तेल को जिस तरह से हथियार खरीदने के लिए एक करेंसी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, क्या इसमें कोई और खेल तो नहीं. तमाम देश अपने तोपखानों को मजबूत कर रहे हैं, क्या वर्ल्ड वॉर-3 की स्क्रि​प्ट तो नहीं लिखी जा रही है? आइए इसे जरा विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…

ईरान का तेल और चीनी हथियार

हाल ही खबर आई है कि ईरान अपने तोपखाने को एक बार फिर से मजबूत कर रहा है. इसके लिए ईरान को कच्चे तेल की सप्लाई कर रहा है और चीन और दुनिया के बाकी देशों से हथियारों की खरीदारी कर रहा है. चीन ईरानी तेल का 90 फीसदी इंपोर्टर है. ऐसे में चीन से मिले पैसों वो चीन से मिसाइल, जेट और डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है. हथियारों के लिए ईरान रूस की ओर भी जा रहा है. ताकि उसके एक बार फिर यूरेनियम प्रोग्राम शुरू करने के बाद अमेरिकी और इजराइली हमलों का मुकाबला कर सके. मौजूदा समय में ईरान का डिफेंस बजट करीब 10 अरब डॉलर यानी 83 से 85 हजार करोड़ रुपए है. जिसे वो तेल के जरिए जुटाने में लगा है.

War (1)

रूसी तेल कैसे कर रहा खेल?

रूस की इकोनॉमी और यूक्रेन के खिलाफ वॉर को जारी रखने में रूसी तेल का अहम योगदान है. वो भी तब जब रूस पर कई तरह के सैंक्शंस लगे हुए हैं और रूस और डिस्काउंट के साथ कच्चे तेल को बेचना पड़ रहा है. वैसे बीते दो बरस में कच्चे तेल से रूस की कमाई 189 अरब डॉलर से 151 अरब डॉलर पर आ गई है. उसके बाद भी रूसी तेल की कमाई से उसके हथियार बनाने के कारखाने तेजी से चल रहे हैं. मौजूदा समय में चीन और भारत रूसी तेल के 70 फीसदी से ज्यादा खरीदार हैं. इंडियन बास्केट में रूसी तेल की हिस्सेदारी 44 फीसदी तक पहुंच गई है. अमेरिकी सरकार एक ऐसा बिल लेकर आ रही है, जिसमें कोई रूसी तेल या समान खरीदेगा, उस अमेरिकी सरकार 500 फीसदी टैरिफ लगाएगा. अमेरिका का मानना है कि रूस यूक्रेन को तबाह करने के लिए कच्चे तेल को एक करेंसी की तरह इस्तेमाल कर रहा है.

War (2)

यूक्रेन की अमेरिका के साथ खनिज डील

अमेरिका और यूक्रेन की खनिज डील भी कुछ वैसी ही है, जैसी चीन और ईरान के बीच की डील. अमेरिका रूस के खिलाफ यूक्रेन को लगातार डिफेंस से जुड़े सामान प्रोवाइड कर रहा है. जिसके लिए दोनों देशों के बीच यूक्रेन के मिनरल्स को लेकर डील साइन हुई है. वहीं दूसरी ओर अमे​रिका की नजर यूक्रेन के ऑयल भंडार पर भी है, जिसका यूक्रेन इस्तेमाल नहीं कर सका है. खबर है कि यूक्रेन में कच्चे तेल के भंडार मौजूद हैं, लेकिन यह एक प्रमुख तेल उत्पादक देश नहीं है. यूक्रेन में तीन मुख्य क्षेत्र हैं जहां हाइड्रोकार्बन संसाधन पाए जाते हैं: नीपर-डोनेट्स्क बेसिन, कार्पेथियन क्षेत्र और काला सागर और क्रीमिया क्षेत्र. नीपर-डोनेट्स्क बेसिन यूक्रेन के कच्चे तेल और गैस उत्पादन का 90 फीसदी हिस्सा है. हालांकि, यूक्रेन अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कच्चे तेल का आयात करता है.

War (4)

चीन से हथियार खरीद रहा पाक

चीन और पाकिस्तान की दोस्ती कितनी पुरानी है, ये किसी से छिपा नहीं है. यहां तक कि चीन ने पाकिस्तान को काफी कर्ज भी दिया हुआ है. ये कर्ज यूं ही नहीं दिया गया है. पाकिस्तान भी चीन को काफी कुछ दे रहा है. पाकिस्तान ने चीन को सीपीईसी प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए अपनी जमीन दी है. जहां चीन अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है. वहीं चीन की नजरें पाकिस्तान के 175 बिलियन टन कोयला पर भी है. जिसकी वैल्यू 618 बिलियन बैरल कच्चे तेल के बराबर है. जोकि वेनेजुएला के ऑयल रिजर्व 303 बिलियन बैरल से भी ज्यादा है. खास बात तो ये है कि इन कच्चा तेल तो दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है. इसका मतलब है कि पाकिस्तान भी अपने प्राकृतिक संसाधनों के बदले में चीन से हथियारों की डील कर रहा है.

War (3)

भारत भी बढ़ा रहा है जखीरा

वहीं दूसरी ओर भारत भी अपने हथियारों के जखीरे को बढ़ाने में जुटा हुआ है. जिसके लिए वो रूस और अमेरिका के साथ यूरोपीय देशों के साथ भी डील रहा है. फ्रांस की कंपनी रफाल के साथ हुई डील के बारे में कौन नहीं जानता. जर्मनी के साथ 6 सबमरीन डील अप्रैल के महीने में देखने को मिली थी. सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार 2020 से 2024 के बीच भारत आर्म्स और एम्युनेशन का सबसे बड़ा इंपोर्टर रहा है. ग्लोबल शेयरिंग में भारत की हिस्सेदारी 8.3 फीसदी देखने को मिली है. जबकि यूक्रेन की हिस्सेदारी 8.8 फीसदी देखी गई. अब आप समझ सकते हैं कि आखिर भारत अपने डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए कितना खर्च कर रहा है.

War (5)

क्या वर्ल्ड वॉर-3 की ओर बढ़ रही दुनिया?

जिस तरह से दुनिया के तमाम बड़े देश कच्चे तेल को करेंसी के रूप में इस्तेमाल कर हथियारों की खरीद फरोख्त कर रहे हैं. उससे संकेत यही मिल रहा है कि दुनिया वर्ल्ड वॉर-3 की ओरर बढ़ रही है. जिस तरह का माहौल बीते कुछ महीनों में देखने को मिला और हथियारों के प्रोडक्शन में इजाफा देखा गया और इंपोर्ट एक्सपोर्ट में तेजी देखने को मिली. उससे साबित होता है कि दुनिया के कई देश अपने डिफेंस को मजबूत करना चाह रहे हैं, ताकि वर्ल्ड वॉर की स्थिति में अपने आपको तैयार रखा जा सके.

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