18 जुलाई को चंपारण से कौन सा सियासी समीकरण साधने जा रहे पीएम मोदी?

बिहार के चंपारण में 18 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है. यह दौरा न केवल चंपारण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बिहार की सियासत में एनडीए के मजबूत गढ़ को बनाए रखने और नए समीकरण साधने की दिशा में […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 12 जुलाई 2025, 06:27 AM 7 मिनट read
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18 जुलाई को चंपारण से कौन सा सियासी समीकरण साधने जा रहे पीएम मोदी?
Photo: UB India News Archive

बिहार के चंपारण में 18 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है. यह दौरा न केवल चंपारण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बिहार की सियासत में एनडीए के मजबूत गढ़ को बनाए रखने और नए समीकरण साधने की दिशा में एक बड़ा कदम है. बता दें कि मोतिहारी ऐतिहासिक रूप से महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन का केंद्र रहा है, लेकिन अब एनडीए के लिए एक सियासी मंच बनने जा रहा है जहां से वह अपनी ताकत और जनता के बीच पैठ को दिखाएगा. पीएम मोदी से पहले बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे एनडीए के बड़े नेताओं के दौरे हो चुके हैं और गठबंधन ने अपनी रणनीति बनाने पर काम शुरू कर दिया है. मोतिहारी में होने वाली इस सभा से एनडीए न केवल सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश करेगा, बल्कि विकास और सुशासन का नया नारा भी बुलंद करेगा. पीएम मोदी के इस दौरे को 2025 विधानसभा चुनावों की जमीन तैयार को और पुख्ता करने और चुनावी लिहाज से मास्टरस्ट्रोक बनाने की रणनीति कही जा रही है.
एनडीए की रणनीति और समीकरण- प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा एनडीए के लिए कई समीकरण साधने का अवसर है. दरअसल, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जिलों में बंटा चंपारण क्षेत्र सामाजिक और आर्थिक रूप से विवधताओं से भरा हुआ क्षेत्र है. यहां ऊंची जातियां, ओबीसी, अति पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों का मिला जुला मतदाता आधार है. एनडीए पीएम मोदी के इस दौरे के जरिए सामाजिक समीकरणों को मजबूत करना चाहता है. खासकर फोकस ओबीसी और अति पिछड़ा वर्ग को साधने पर है. सीएम नीतीश कुमार की जेडीयू ने पहले ही जातिगत जनगणना और ओबीसी-ईबीसी आरक्षण को बढ़ाने का कार्ड खेला है. इसके अतिरिक्त केंद्र की बड़ी महत्व वाली परियोजनाओं और नीतीश सरकार के विकास कार्यों को बताकर जनता को अपने पाले में रखने की कवायद भी है. बीते दो विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में एनडीए का प्रदर्शन को जानेंगे तो समझ जाएंगे कि यह एनडीए का मजबूत किला क्यों है.

2015 विधानसभा चुनाव: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए का प्रदर्शन चंपारण में मिला-जुला रहा. पूर्वी और पश्चिमी चंपारण में फैली 12 विधानसभा सीटों में से एनडीए ने 5 सीटें जीतीं, जबकि महागठबंधन ने 7 सीटों पर कब्जा किया. बीजेपी को 23.5% मत मिले थे. जबकि तब महागठबंधन में शामिल जेडी(यू) को 18.2%, आरजेडी को 20.5% और कांग्रेस को 3.6% प्रतिशत मत मिले थे.

2020 विधानसभा चुनाव: एनडीए में जेडीयू शामिल हो चुका था और गठबंधन ने चंपारण में बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें बीजेपी और जेडी(यू) ने मिलकर 8 सीटें जीतीं. बीजेपी को 25.8% और जेडी(यू) को 20.1% वोट शेयर मिला. महागठबंधन का वोट शेयर चंपारण में लगभग 39.8% रहा, जिसमें आरजेडी को 23.1%, कांग्रेस को 9.2% और सीपीआई(एमएल)को 7.5% मत मिले.

2019 लोकसभा चुनाव: पूर्वी चंपारण (पुर्वी चंपारण) में बीजेपी के राधा मोहन सिंह ने 54.3% वोट शेयर के साथ जीत हासिल की, जबकि पश्चिमी चंपारण में बीजेपी के संजय जायसवाल ने 56.1% वोटों के साथ जीत दर्ज की. एनडीए ने दोनों सीटों पर मजबूत प्रदर्शन किया.
2024 लोकसभा चुनाव: इस बार एनडीए ने दोनों सीटें बरकरार रखीं, लेकिन वोट शेयर में मामूली कमी आई. पूर्वी चंपारण में राधा मोहन सिंह ने 51.2% और पश्चिमी चंपारण में संजय जायसवाल ने 52.7% वोट हासिल किए. विपक्ष के आक्रामक प्रचार ने एनडीए को कड़ी टक्कर दी.
ये खास घोषणाएं कर सकते हैं पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मोतिहारी दौरे कई विकास परियोजनाओं और योजनाओं की सौगात दे सकते हैं.
महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष पैकेज: पीएम मोदी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए वित्तीय समावेशन, उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ऋण, सब्सिडी और प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी योजनाओं की सौगात दे सकते हैं. बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला योजना जैसे मौजूदा कार्यक्रमों को और मजबूत करने की घोषणा हो सकती है.
पीएम-किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त: सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी मोतिहारी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त की राशि हस्तांतरित कर सकते हैं. यह योजना बिहार के लगभग 76 लाख किसानों को लाभ पहुंचाएगी. इससे पहले 19वीं किस्त 24 फरवरी 2025 को भागलपुर से हस्तांतरित की गई थी. इसके अतिरिक्त किसानों के लिए भी योजनाओं की शुरुआत कर सकते हैं.

रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास: रेलवे से संबंधित कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास संभावित है. इनमें करपूरी ग्राम रेलवे स्टेशन का उन्नयन (3.30 करोड़ रुपये की लागत) और 17 करोड़ रुपये से अधिक की अन्य रेल परियोजनाएं शामिल हैं. जानकारी के अनुसार, इस बार 4 अमृत भारत ट्रेन की घोषणा पीएम मोदी अपने बिहार दौरे के दौरान कर सकते हैं. ये परियोजनाएं चंपारण की कनेक्टिविटी को बढ़ाएंगी.
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के नए भवन का शिलान्यास: स्थानीय सांसद राधा मोहन सिंह ने संकेत दिया है कि पीएम मोदी मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के नए भवन की आधारशिला रख सकते हैं. यह परियोजना क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देगी और युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोलेगी.
विकास पैकेज की घोषणा हो सकती है : बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और सांसद संजय झा ने संकेत दिया है कि पीएम मोदी चंपारण के लिए कई करोड़ रुपये के विकास पैकेज की घोषणा कर सकते हैं. इसमें सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं.
बिहार चुनाव की चुनौतियां और विकल्प
एनडीए के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) की बढ़ती सक्रियता है. 2024 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन ने बिहार में बढ़िया प्रदर्शन किया, जिससे एनडीए को नुकसान हुआ. चंपारण में भी विपक्ष ने हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण और नीतीश कुमार के बार-बार पाला बदलने की आलोचना को हथियार बनाया, लेकिन चंपारण में महागठबंधन की दाल नहीं गली. लेकिन, बदले दौर की राजनीति में एनडीए के सामने महागठबंधन की बड़ी चुनौती है. ऐसे में एनडीए के पास इस चुनौती से निपटने के लिए कई विकल्प हैं. पहला, प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का लाभ उठाकर वह स्थानीय मुद्दों जैसे बाढ़, बेरोजगारी और कृषि संकट पर केंद्रित विकास योजनाओं को आधार बनाकर जनता को अपने पाले में कर सकता है. दूसरा, जेडी(यू) और बीजेपी के बीच बेहतर तालमेल बनाकर स्थानीय नेताओं को एकजुट कर चुनावी लड़ाई में जाना. तीसरा, युवा और महिला मतदाताओं को टारगेट कर केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे उज्ज्वला, पीएम-किसान और नारी शक्ति को बढ़ावा देकर इस चुनौती से पार पाया जा सकता है.
बिहार में एनडीए की चुनावी रणनीति और भविष्य
राजनीति के जानकारों की मानें तो प्रधानमंत्री का मोतिहारी दौरा एनडीए के लिए एक सुनहरा अवसर है. इस जनसभा के जरिए एनडीए न केवल अपनी एकता प्रदर्शित करेगा, बल्कि बिहार में अपनी सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएगा. नीतीश कुमार की मौजूदगी और स्थानीय सांसदों जैसे संजय जायसवाल और सतीश चंद्र दुबे की सक्रियता से यह दौरा चंपारण में एनडीए की स्थिति को और मजबूत कर सकता है. हालांकि, विपक्ष की ओर से जातिगत समीकरणों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाने की कोशिश होगी जिसके लिए एनडीए को पहले से तैयार रहना होगा. मोतिहारी में यह जनसभा न केवल चंपारण की धरती से विकास और सुशासन का संदेश देगी, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनावों के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगी. एनडीए की रणनीति होगी कि वह स्थानीय नेताओं को एकजुट रखे और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाए.

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