प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के दौरे पर मालदीव पहुंच गए हैं। उनका स्वागत करने के लिए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू लेने एयरपोर्ट पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने एक दूसरे को गले भी लगाया।
एयरपोर्ट पर पीएम मोदी के स्वागत में स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य भी किया। मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की और भारतीय मूल के बच्चों की डांस परफॉर्मेंस भी देखी।
मोदी की यह तीसरी मालदीव यात्रा है। वे यहां मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के न्योते पर आए हैं।
इससे पहले मुइज्जू ने राष्ट्रपति चुनाव में इंडिया आउट का नारा दिया था। चुनाव जीतने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई थी। हाल के दिनों में संबंधों में सुधार देखने को मिला है।
‘इंडिया आउट’ से ‘इंडिया इन’ की ओर मालदीव के कदम बढ़ चुके हैं. मोहम्मद मुइज्जू ने चीन के बहकावे में रिश्तों को ताक पर रखा. मालदीव-भारत की दोस्ती की लंका लगा दी. मालदीव ने भारत को आंख दिखाने की कोशिश की. पर आखिरकार उसे भारत की ताकत का एहसास हो गया. बीते कुछ समय से मोहम्मद मुइज्जू के टोन बदल चुके. अब वह भारत विरोधी नहीं लगते. अव्वल वह भारत से उसी पुरानी दोस्ती की चाहत रख रहे हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी जब आज यानी शु्क्रवार को मालदीव पहुंचे तो स्वागत करने को मोहम्मद मुइज्जू दौड़ पड़े. जी हां, पीएम मोदी ब्रिटेन के बाद अब अपनी दो दिवसीय यात्रा पर आज मालदीव पहुंचे.

पीएम मोदी का इंतजार करते दिखे मुइज्जू
मोदी के वेलकम को मालदीव सरकार खड़ी रही
तनातनी के बाद पीएम मोदी का यह पहला दौरा है.
क्यों अहम पीएम मोदी का मालदीव दौरा

पीएम मोदी का वेलकम करते मंत्री-अफसर
पीएम मोदी का भव्य स्वागत इस बात को दिलचस्प बनाता है कि यह उस भूमि पर हो रहा था, जहां कुछ समय पहले तक मुइज्जू और उनके नेता ‘इंडिया आउट’ अभियान चला रहे थे. मालदीव का यह कदम दिखाता है कि उसे अब समझ है कि भारत की दोस्ती उसके लिए कितनी अहम है.

पीएम मोदी के स्वागत में खड़ी रही मालदीव सरकार.
मालदीव में क्या-क्या करेंगे मोदी
स्वतंत्रता दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे
मोदी 26 जुलाई को मालदीव के 60वें स्वतंत्रता समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान भारत और मालदीव के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 60 साल पूरे होने का जश्न भी मनाया जाएगा।
मोहम्मद मुइज्जू नवंबर 2023 में राष्ट्रपति बने थे, उसके बाद से किसी विदेशी नेता की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस दौरान डिफेंस और रणनीतिक क्षेत्रों में कई समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर होंगे।
यह समझौते भारत की ” नेबरहुड फर्स्ट” पॉलिसी के तहत मालदीव के साथ विकास साझेदारी को और मजबूत करेंगे। मोदी इस यात्रा के दौरान मोदी भारत के सहयोग से तैयार कुछ प्रोजेक्ट का उद्घाटन भी कर सकते हैं।
संबंधों को सुधारने के लिए खास मोदी का दौरा
PM मोदी का दौरा भारत-मालदीव संबंधों को नई दिशा देने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और हिंद महासागर में रणनीतिक स्थिरता बढ़ाने के लिए खास है।
1. द्विपक्षीय संबंधों में सुधार: 2022 और 2023 में मालदीव में भारत के खिलाफ ‘इंडिया आउट’ कैंपेन चलाया गया था। हालांकि, बाद में राष्ट्रपति मुइज्जू ने अपने रुख में बदलाव किया और भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए।
2. रणनीतिक महत्व: मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का खास पड़ोसी है। यह दौरा भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी और ‘विजन सागर’ (SAGAR) को मजबूती देती है। जिसका मकसद क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा है।
3. आर्थिक सहयोग: मालदीव आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पीएम मोदी और मुइज्जू कई डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को शुरू कर सकते हैं और कई समझौता पत्रों (MoU) पर हस्ताक्षर करेंगे। दोनों देश UPI जैसे डिजिटल पेमेंट सुविधा को बढ़ावा देने पर भी काम कर रहे हैं।
4. चीन के प्रभाव को काउंटर करना: मुइज्जू की कई नीतियां चीन के प्रति झुकाव दिखाती थीं। ये दौरा भारत और मालदीव के बीच क्षेत्रीय कूटनीति और INS जटायु जैसे रणनीतिक ठिकानों के महत्व को दर्शाता है। साथ ही चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने की भारत की रणनीति का भी हिस्सा है।
5. पर्यटन: 2024 में ‘इंडिया आउट के खिलाफ ‘बॉयकॉट मालदीव’ अभियान शुरू हुआ था। इससे मालदीव में भारतीय पर्यटकों की संख्या में कमी आई। इस दौरे से पर्यटन को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की उम्मीद है।
भारत में चला था बायकॉट मालदीव कैंपेन
बीते कुछ सालों में भारत-मालदीव के रिश्ते उतार चढ़ाव भरे रहे हैं। 2023 में मुइज्जु ने ‘इंडिया आउट’ नारे के साथ चुनाव जीता था, लेकिन दिसंबर 2023 में दुबई में UN कॉप-28 सम्मेलन में पीएम मोदी और मुइज्जु की मुलाकात ने रिश्तों में सुधार की शुरुआत की।
दोनों नेताओं ने आर्थिक साझेदारी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई। हालांकि, 2024 की शुरुआत में मालदीव के कुछ मंत्रियों की पीएम मोदी और लक्षद्वीप यात्रा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के बाद भारत में ‘बायकॉट मालदीव’ कैंपेन शुरू हुआ।
जनवरी 2024 में मुइज्जु ने चीन यात्रा के बाद कहा कि मालदीव एक छोटा देश हो सकता है, लेकिन कोई इसे “धमका” नहीं सकता। उन्होंने मई 2024 तक भारतीय सैन्य कर्मियों को हटाने की मांग की थी, जिसके बाद भारत ने सैनिकों को हटाकर उनकी जगह तकनीकी कर्मचारी भेजे।
मुइज्जू की भारत यात्रा से दोनों देशों के रिश्ते सुधरे
2024 में रिश्तों में सुधार हुआ। अक्टूबर 2024 में मुइज्जु की भारत यात्रा के दौरान भारत ने मालदीव के लिए 750 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप डील की। इससे मालदीव को फॉरेन करेंसी की कमी से निपटने में मदद मिली।
मई 2025 में भारत ने 50 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल को रोल ओवर करके मालदीव की अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया।
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि दोनों देशों ने रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है। इस यात्रा के दौरान कई क्षेत्रों में समझौते होने की उम्मीद है, जिसमें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, नवीकरणीय ऊर्जा, मछली पालन और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे नए क्षेत्र शामिल हैं।
इससे पहले 2015 में श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और 2017 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ मालदीव के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि रह चुके हैं।









