प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित होने के बाद नरेन्द्र मोदी और फिर 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर की रणनीति की इसबार आगामी बिहार विधानसभा में अग्नि परीक्षा होगी। प्रशांत किशोर का दावा है कि इन दोनों की जीत में उनकी भूमिका रही है, लेकिन अब रणनीतिकार रण में हैं और चुनौती बड़ी है। प्रशांत इस बात को समझते भी हैं, इसलिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पिछले साल उप चुनाव में जब चार सीटों पर उन्होंने अपने प्रत्याशी उतारे तो 10 फीसदी वोट लाकर दमदार हस्तक्षेप किया। अब वे आम चुनाव में तीसरा कोण बनने की कोशिश में ताबड़तोड़ बिहार बदलाव यात्रा कर रहे हैं।
जनसुराज का दावा है कि रोज तीन लाख लोगों से पार्टी संवाद कर रही है। पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद लोगों के बीच जा रहे हैं और वोटरों से संवाद कर रहे हैं। वे लोगों से अपील कर रहे हैं कि इनको वोट दिया, उनको वोट दिया, अबकी अपने बच्चों के लिए वोट कीजिए। वे अपनी सभाओं में एनडीए और महागठबंधन दोनों पर तीखे हमले कर रहे हैं। चुनाव में प्रदर्शन कैसा होता है यह तो परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।
जनसुराज बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पिछले साल चार सीटों पर हुए उपचुनाव में पार्टी ने अपनी दमदार मौजूदगी दिखा कर राजनीति में अच्छी प्रशंसा बटोरी। अब इसी वोट के विस्तार की योजना बना रही है। प्रशांत के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती खुद लोगों से संवाद कर रहे हैं।
महज तीन साल पूर्व रणनीतिकार का चोला उतारकर प्रशांत किशोर ने 5 मई 2022 को जनसुराज अभियान का ऐलान किया था। इसके बाद 2 अक्टूबर 2022 से उन्होंने पूरे बिहार में पदयात्रा की घोषणा की। इसे उन्होंने जनसुराज यात्रा का नाम दिया। इन सबका मकसद जनसुराज पार्टी के लिए बेहतर आधार तैयार करना था। लगभग पांच हजार किलोमीटर की यात्रा भी उन्होंने की। इसी बीच उन्होंने 2 अक्टूबर 2024 को पार्टी की स्थापना की विधिवत घोषणा की। बड़ी जनसभा कर पटना के वेटनरी कॉलेज मैदान में जनसुराज पार्टी ने आकार लिया। हालांकि जनसुराज के पार्टी बन जाने के बाद भी प्रशांत किशोर ने खुद को संगठन की जगह अभियान से ही जोड़े रखा।
बापू के चंपारण सत्याग्रह की भूमि भितिहरवा से उन्होंने 20 मई को बदलाव यात्रा की शुरुआत की। इस यात्रा के जरिए उनका लक्ष्य सभी जिलों में जाना और वहां लोगों से सीधा संवाद करना है। इसके पहले पार्टी ने इसी साल 11 अप्रैल को गांधी मैदान में बिहार बदलाव रैली का भी आयोजन किया। इसके माध्यम से पार्टी ने पूरे प्रदेश में अपनी मजबूत उपस्थिति का अहसास भी कराया। पहली बार पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक सभी जिलों से पटना पहुंचे।
पिछले साल नवंबर में चार सीटों के उप चुनाव में जनसुराज ने तरारी, रामगढ़, बेलागंज और इमामगंज सीटों पर प्रत्याशी उतारे। अपनी पहली परीक्षा में पार्टी को कोई सीट तो नहीं मिली लेकिन इसने औसतन 10 फीसदी वोट पाकर हार-जीत का अंतर पैदा किया। उसने महागठबंधन का गणित पूरी तरह बिगाड़ दिया। जनसुराज के कारण महागठबंधन कई सीटें हार गया और इसका फायदा एनडीए को हुआ।




