विकसित भारत’ के लिए क्यों जरूरी है लाल फीताशाही को कम करना?

कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के साथ विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना है, तो दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधारों की जरूरत है। इस लक्ष्य के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर को 8 फीसदी प्रति वर्ष तक बढ़ाना होगा, जो बेहद ही […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 27 जुलाई 2025, 07:39 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
विकसित भारत’ के लिए क्यों जरूरी है लाल फीताशाही को कम करना?
Photo: UB India News Archive

कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के साथ विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना है, तो दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधारों की जरूरत है। इस लक्ष्य के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर को 8 फीसदी प्रति वर्ष तक बढ़ाना होगा, जो बेहद ही कठिन कार्य है। कई विश्लेषकों का कहना है कि पहली पीढ़ी के सुधार काफी हद तक पूरे हो चुके हैं, लेकिन वे अकेले 8 फीसदी की वृद्धि दर हासिल नहीं कर सकते, जिसके लिए सुधारों का दूसरा दौर जरूरी है।

कैसे पूरा होगा ‘विकसित भारत’ का सपना
इस विश्लेषण में दो बड़ी कमियां हैं। पहली कमी यह है कि यह नए सुधारों की राजनीतिक लागत को अनदेखा करता है। जैसा कि हमने कृषि सुधारों के मामले में देखा। भूमि अधिग्रहण में भी दिक्कतें आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन है।

इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण 2024 में पूरा हुआ, जबकि इसकी योजना एक दशक पहले बनाई गई थी। दूसरी कमी यह है कि पहली पीढ़ी के सुधार अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। लाल फीताशाही को कम करने और भारतीय उद्योगों को बिना किसी परेशानी के तेजी से बढ़ने देने का काम अभी भी अधूरा है। आप जितनी भी लाल फीताशाही कम करें, वह फिर से बढ़ जाती है।

एक सोलर प्लांट के लिए इतने नियम

TeamLease RegTech की एक हालिया रिपोर्ट में उल्लेखनीय उदाहरण सामने आया। इस रिपोर्ट का नाम है ‘Unlocking Renewable Energy Potential by Reducing Compliance Burden’। इस रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात सामने आई। भारत में एक सोलर प्लांट लगाने और चलाने के लिए 2,735 तरह की अनुमति और नियमों का पालन करना पड़ता है। इतनी लाल फीताशाही देखकर हैरानी होती है कि भारत विकास कैसे कर रहा। याद रखें, सौर ऊर्जा एक उच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। सरकार इसके लिए कई तरह की छूट और सब्सिडी भी देती है। अगर इस उद्योग में इतनी लाल फीताशाही है, तो बाकी उद्योगों का क्या हाल होगा?

लाल फीताशाही को कम करना क्यों जरूरी

TeamLease की रिपोर्ट में सोलर एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में आने वाले जटिल नियमों का भी जिक्र है। इन नियमों के अनुसार, व्यवसायों को 35 केंद्रीय और राज्य कानूनों का पालन करना होता है। इसके लिए उन्हें 30 से ज्यादा सरकारी विभागों से निपटना पड़ता है। इनमें पर्यावरण मंत्रालय, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय श्रम विभाग शामिल हैं। इन विभागों से निर्माण परमिट, पर्यावरण मंजूरी, सुरक्षा प्रोटोकॉल, श्रम कानून और भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों में अनुमति लेनी होती है।

रजिस्ट्रेशन से लेकर अप्रूवल तक कई स्टेप

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सिर्फ एक मेगावाट (MW) की क्षमता वाले सोलर प्लांट को शुरू करने से पहले 100 से ज्यादा लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और अप्रूवल की जरूरत होती है। यह उन प्रोजेक्ट पर भी लागू होता है जिनका पर्यावरण पर कम असर पड़ता है। जैसे कि छत पर लगने वाले या जमीन पर लगने वाले सोलर यूनिट। इसके अलावा, नियमों का पालन सिर्फ एक बार नहीं करना होता है। हर साल, तिमाही और महीने में फाइलें जमा करनी होती हैं। सरकारी अधिकारी आकर निरीक्षण करते हैं। लाइसेंस को रिन्यू कराना होता है। इन सब कामों से कंपनियों पर बहुत ज्यादा प्रशासनिक बोझ पड़ता है।

श्रम कानून से लेकर पर्यावरण नियमों का जिक्र

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2,735 अनुपालन कार्यों में से लगभग 40 फीसदी श्रम से संबंधित हैं। इसमें कई श्रम कानूनों के तहत रजिस्ट्रेशन कराना, तय फॉर्मेट में रिकॉर्ड रखना और इंस्पेक्शन का जवाब देना शामिल है। इसके अलावा, पर्यावरण नियमों का भी एक बड़ा हिस्सा है। इसमें गैर-प्रदूषणकारी सोलर परियोजनाओं के लिए भी मूल्यांकन और कचरा निपटान के नियम शामिल हैं। बिजली सुरक्षा मानक, ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन और आग से सुरक्षा जैसे नियम भी हैं। नियम जरूरी हैं, खासकर पर्यावरण के क्षेत्र में, लेकिन 2,735 बहुत बड़ी संख्या है।

सिस्टम पर क्यों उठ रहे सवाल

ज्यादातर राज्यों में नियमों का पालन करने का सिस्टम बिखरा हुआ है और यह डिजिटल भी नहीं है। 60 फीसदी से अधिक काम मैन्युअल रूप से करने होते हैं। इसके लिए सरकारी दफ्तरों में फाइलें जमा करनी होती हैं और अधिकारियों से मिलना होता है। इससे देरी होती है और भ्रष्टाचार बढ़ता है। आज के समय में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल इतना जरूरी है, तब मैन्युअल रूप से फाइलें जमा करने का क्या मतलब है? इससे भारत के 2030 तक 500GW गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को खतरा है।

निवेशकों के सामने कई चिंताएं

TeamLease का कहना है कि नियमों का ज्यादा बोझ नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में कारोबार करने की आसानी को कम करता है। 2019 में विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में भारत 190 देशों में 63वें स्थान पर था। लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नियमों का ढांचा अभी भी पुराना है।

रिपोर्ट में नियमों को आसान बनाने, उन्हें डिजिटली करने और उन्हें स्टैंडर्डाइज करने की बात कही गई है। इसमें सोलर प्रोजेक्ट के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस की सिफारिश की गई है। साथ ही, ऑटोमेटेड फाइलिंग और समय पर अप्रूवल देने की भी बात कही गई है। NITI Aayog और निवेशकों ने भी इसी तरह की चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि खराब नियामक ढांचे की वजह से उन्हें अक्सर परेशानी होती है।

भारत की महत्वाकांक्षा में सबसे बड़ी बाधा घरेलू- रिपोर्ट

भारत दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी सोलर ऊर्जा कार्यक्रमों में से एक का दावा करता है। इसके साथ ही अक्सर यह कहता रहा है कि उसे अपने सोलर ट्रांजिशन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त मदद नहीं मिल रही। विश्व इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2023 में भी यह कहा गया है कि विकासशील देशों को हर साल 1.7 ट्रिलियन डॉलर के रिन्यूएबल एनर्जी निवेश की जरूरत है।

हालांकि, 2022 में उन्हें सिर्फ 544 बिलियन डॉलर ही मिले। TeamLease की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत की महत्वाकांक्षाओं में सबसे बड़ी बाधाएं घरेलू हैं। 2,735 अनुपालन बाधाओं को कम करना सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, यह एक टिकाऊ ऊर्जा भविष्य के लिए जरूरी है।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू
खास खबर

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू

राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का खार्ग द्वीप पूरी तबाह कर दिया गया है. हालांकि अभी ईरान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने हमले की एआई वीडियो भी जारी की है.

UB India News31 अग॰
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰