फेल होते रहे हैं विपक्ष के नैरेटिव , राहुल ने जब-जब घेरा, तब-तब और खिला कमल !

कर्नाटक में 2018 में विधानसभा के चुनाव होने थे. तब राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष (LoP) नहीं थे. हालांकि, अपने ऊटपटांग बयानों और हरकतों के कारण तब तक वे काफी चर्चित हो चुके थे. याद होगा, उन्हीं दिनों उन्होंने गौतम अडानी की कंपनी को लेकर अमेरिकी फर्म हिंडेनबर्ग की एक रिपोर्ट पर खूब हंगामा मचाया था. […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 13 अगस्त 2025, 05:38 AM 9 मिनट read
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फेल होते रहे हैं विपक्ष के नैरेटिव , राहुल ने जब-जब घेरा, तब-तब और खिला कमल !
Photo: UB India News Archive
कर्नाटक में 2018 में विधानसभा के चुनाव होने थे. तब राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष (LoP) नहीं थे. हालांकि, अपने ऊटपटांग बयानों और हरकतों के कारण तब तक वे काफी चर्चित हो चुके थे. याद होगा, उन्हीं दिनों उन्होंने गौतम अडानी की कंपनी को लेकर अमेरिकी फर्म हिंडेनबर्ग की एक रिपोर्ट पर खूब हंगामा मचाया था. अब हिंडेनबर्ग रिपोर्ट की चर्चा ही नहीं होती. राफेल पर भी राहुल गांधी की बेचैनी ठीक वैसी ही दिखती थी. पर, अब यह भी अचर्चित है. राहुल गांधी का ताजा हंगामा गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर है. बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग के SIR पर विपक्ष ने सड़क से संसद तक हंगामा खड़ा कर दिया है. इसके खिलाफ विपक्षी महागंठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने सबसे पहले आवाज उठाई तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी इसे राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का रूप देने का ब्लूप्रिंट बना चुके हैं.

सड़क से संसद तक हंगामा
बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग के SIR पर विपक्ष ने सड़क से संसद तक हंगामा खड़ा कर दिया है. विपक्षी गठबंधन इंडिया को राष्ट्रीय स्तर पर लीड कर रहे राहुल गांधी और दूसरे प्रतिपक्षी नेताओं को लगता है कि नरेंद्र मोदी का सितारा अब गर्दिश की ओर है. विपक्ष की यह धारणा 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद बनी है. भाजपा की सीटों में कमी को विपक्ष मोदी मैजिक की फीकी पड़ती चमक के रूप में देख रहा है. उसे लगता है कि एक और धक्का खाते ही मोदी गर्त में चले जाएंगे. यह मुद्दा तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे राज्य की राजनीति में रमे नेताओं को उतना लाभ नहीं पहुंचाएगा, जितना लाभ राहुल गांधी को मिल सकता है. कांग्रेस की देश में जो स्थिति है, उसमें विपक्ष की मदद से ही राहुल के पीएम बनने का सपना सच हो सकता है. यही वजह है कि कभी ममता बनर्जी, लालू प्रसाद यादव, अखिलेश यादव और शरद पवार जैसे विपक्षी नेताओं द्वारा खारिज किए जा चुके राहुल ने बिहार के SIR के मुद्दे को राष्ट्रीय आवाज बनाने की पहल शुरू की है. कभी वे अपने आवास पर दावत पर विपक्षी नेताओं को जुटा रहे हैं तो कभी मल्लिकार्जुन खरगे अपने यहां भोज करा रहे हैं. कांग्रेस ने आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए वेबसाइट भी बना ली है. मिस्ड काल के जरिए लोगों का समर्थन कांग्रेस जुटा रही है. दिल्ली में विपक्षी सांसदों ने SIR के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया.
याद होगा, लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के कुछ महीने बाद ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाया था. उन्होंने यह भी कहा था कि वे इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व करने को तैयार हैं. उनके बयान का लालू प्रसाद यादव ने यह कह कर समर्थन किया था कि वे ममता की बात से सहमत हैं. फिर तो ममता बनर्जी जैसे इंडिया ब्लाक के दूसरे नेताओं के भी राहुल के खिलाफ कंठ खुल गए थे. जम्मू-कश्मीर के चीफ मिनिस्टर उमर अब्दुल्ला और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने तो इंडिया ब्लाक के अस्तित्व को ही नकार दिया था. ऐसे में राहुल लाख कोशिशें करें, उनकी राह उतनी आसान नहीं, जितनी वे साथी दलों से उम्मीद पाले हुए हैं. SIR पर राहुल के आरोप की हवा तो कर्नाटक में उनके ही एक मंत्री राजन्ना ने निकाल दी है. पार्टी से अलग लाइन लेने के कारण उन्हें मंत्री पद से अब हटा दिया गया है. राजन्ना ने कहा था- वोटर लिस्ट गड़बड़ी इसी सरकार (कांग्रेस राज) में हुई है. यह कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की नाकामी है.

राहुल का ECI पर आरोप
राहुल गांधी का आरोप है कि भारत निर्वाचन आयोग वोटों की चोरी करता है. इससे नरेंद्र मोदी और भाजपा को चुनाव जीतने में आसानी होती है. हाल ही उन्होंने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन देकर पत्रकारोो को बताया कि आयोग कैसे वोटों की चोरी करता है. इस क्रम में उन्होंने कर्नाटक में एक ही पते पर दर्ज मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की. चुनाव आयोग ने कहा कि हलफनामा देकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं तो कार्रवाई होगी. गलत साबित होने पर राहुल गांधी पर एक्शन होगा. राहुल के आरोप सही हो सकते हैं, हर तरह के परिमार्जन की सुविधा भी चुनाव आयोग के पास है. बहरहाल, चुनाव आयोग पर राहुल के आरोप सही हैं या गलत, इस पर माथा मारने से पहले यह सवाल प्रासंगिक हो जाता है कि राहुल ने नरेंद्र मोदी को लक्ष्य कर अब तक जो खुलासे किए हैं, कुछ ही दिनों में फुस्स हो गए. इसे लोग राहुल का प्रोपेगैंडा पोलिटिक्स भी कहते हैं. 2019 से 2024 तक राहुल ने ‘चौकीदार चोर है’ स्लोगन के साथ यात्रा की. उसकी हवा निकल गई. अब ‘वोट चोर’ नारे के साथ वे मतदाता अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं. चौकीदार चोर वाले बयान पर तो उन्हें कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी थी.

राहुल के अब तक कई आरोप
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं द्वारा भाजपा और नरेंद्र मोदी के खिलाफ गढ़े गए कुछ प्रमुख नैरेटिव, जो बाद में झूठ साबित हुए या विवादास्पद रहे, निम्नलिखित हैं. इनमें से कई नैरेटिव पर तथ्यों की जांच और आलोचनाओं के आधार पर सवाल उठे हैं.
1. चुनावी धांधली और वोट चोरी
यह पहली बार नहीं है, जब राहुल गांधी वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी ने वोट चोरी कर तीसरी बार प्रधानमंत्री का पद हासिल किया. उन्होंने कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1,00,250 फर्जी वोट और देशभर में 25 सीटों पर कम अंतर से भाजपा की जीत का दावा किया. उनका सीधा आरोप है कि आयोग और भाजपा की मिलीभगत से यह काम हुआ. चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से उनके दावों के समर्थन में शपथ पत्र मांगा है और कहा है कि बिना सबूत के आरोप गलत हैं. कर्नाटक और हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारियों ने भी राहुल से सबूत मांगे, लेकिन कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला.

1. संविधान व लोकतंत्र पर खतरा
लोकसभा चुनाव में विपक्ष, खासकर राहुल गांधी, ने संविधान और लोकतंत्र पर खतरा बता कर ‘संविधान बचाओ’ अभियान चलाया. दावा किया गया कि भाजपा 400 सीटें जीत कर संविधान बदल देगी और लोकतंत्र को खत्म कर देगी. भाजपा ने इसे आधारहीन बताया, क्योंकि 10 साल के शासन में भाजपा ने संविधान में कोई ऐसा बदलाव नहीं किया, जिससे लगे कि लोकतंत्र खतरे में है. भाजपा ने पलटवार किया कि आपातकाल (1975) में कांग्रेस ने ही संविधान और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया था. यह नैरेटिव भावनात्मक रूप से मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए था, लेकिन इसका कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिससे संविधान और लोकतंत्र को कोई खतरा महसूस होता हो.

2. आरक्षण खत्म करने का आरोप
राहुल गांधी और इंडिया ब्लाक के नेताओं ने दावा किया कि अगर भाजपा सत्ता में आई, तो वह आरक्षण खत्म कर देगी. यह 2024 के चुनाव में विपक्ष का प्रमुख नैरेटिव था. 2015 में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी यही प्रोपेगैंडा फैलाया था, जो महागठबंधन को बिहार में जीत दिलाने में कामयाब रहा. भाजपा ने राहुल गांधी और विपक्ष के दावे को झूठा बताया और कहा कि उनकी सरकार ने आरक्षण को कभी कमजोर नहीं किया, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% EWS आरक्षण लागू किया. विपक्ष के इस दावे का कोई ठोस सबूत नहीं था. इसे केवल डर फैलाने की विपक्ष की रणनीति माना गया.

3. भारतीय भूमि पर चीन का कब्जा
राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दावा किया कि चीन ने गलवान में भारतीय सैनिकों को पीटा और 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय जमीन पर कब्जा कर लिया. सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को इस बयान के लिए फटकार लगाई है और पूछा है कि उनके दावे का आधार क्या है. कोर्ट ने कहा कि कोई सच्चा भारतीय अपनी सेना के बारे में ऐसा नहीं कहेगा. लद्दाख के राज्यपाल बीडी मिश्रा ने भी राहुल के दावे का खंडन किया. केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने भी साफ कहा कि 1962 के बाद चीन ने भारत की एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं किया है.

4. सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल
राहुल गांधी ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सर्जिकल स्ट्राइक (2016) पर भी सवाल उठाए थे और इसे संदिग्ध बताया था. सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत सरकार और सेना द्वारा जब सार्वजनिक किए गए तो राहुल की बोलती बंद हो गई. सबूत के तौर पर ऑपरेशन के वीडियो फुटेज और अन्य दस्तावेज शामिल सरकार और सेना ने दिखाए थे.

5. SIR को वोट चोरी बताया
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने बिहार में SIR को वोटर लिस्ट से विपक्षी मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश बताया है. इसके लिए आंदोलन की तैयारी भी है. राहुल गांधी अन्य विपक्षी नेताओं के साथ 18 अगस्त से बिहार में पदयात्रा करेंगे. SIR के बाद मतदाता सूची के ड्राफ्ट में तेजस्वी यादव के नाम दो मतदान केंद्रों पर पाए गए हैं. उन्हें चुनाव आयोग से नोटिस भी मिले हैं. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR एक नियमित प्रक्रिया है. विपक्ष के दावे गलत हैं.

6. अरुण जेटली पर गलत दावा
राहुल गांधी ने दावा किया है कि अरुण जेटली ने 2020 के कृषि कानूनों के विरोध को कमजोर करने के लिए उनसे संपर्क किया था. भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने इसे झूठ बताया. जेटली का निधन 2019 में हो चुका था और 2020 में वे जीवित ही नहीं थे. राहुल का यह बयान विपक्ष की विश्वसनीयता के लिए नुकसानदेह है.फेल होते रहे हैं विपक्ष के नैरेटिव

राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं द्वारा बनाए गए ये नैरेटिव मुख्य रूप से राजनीतिक लाभ और जनता में भ्रम फैलाने के लिए थे. इनमें से कई दावों का कोई ठोस सबूत नहीं मिला. सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग या तथ्य-जांच ने इन्हें खारिज कर दिया. भाजपा ने इन आरोपों को ‘झूठ की राजनीति’ और ‘संवैधानिक संस्थाओं पर हमला’ करार दिया है.
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