रंजन गोगोई और शेखर यादव को लेकर हमलावर विपक्ष क्या उपराष्ट्रपति उम्मीदवार का नाम तय करने में चूक गई ?

श का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा, इसका फैसला 9 सितंबर को होगा. मुकाबला NDA के सीपी राधाकृष्णन और इंडिया गठबंधन के बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच है. रेड्डी उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं. पूर्व जस्टिस को चुनाव मैदान में उतारकर इंडिया गठबंधन सत्तापक्ष के निशाने पर आ गया है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं क्या नाम […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 20 अगस्त 2025, 08:02 AM 5 मिनट read
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रंजन गोगोई और शेखर यादव को लेकर हमलावर विपक्ष क्या उपराष्ट्रपति उम्मीदवार का नाम तय करने में चूक गई ?
Photo: UB India News Archive

श का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा, इसका फैसला 9 सितंबर को होगा. मुकाबला NDA के सीपी राधाकृष्णन और इंडिया गठबंधन के बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच है. रेड्डी उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं. पूर्व जस्टिस को चुनाव मैदान में उतारकर इंडिया गठबंधन सत्तापक्ष के निशाने पर आ गया है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं क्या नाम तय करने में विपक्ष से गलती हो गई.

रेड्डी के नाम का ऐलान करते वक्त कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि वह भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रगतिशील न्यायविदों में से एक हैं. कांग्रेस नेता ने कहा, उनका कानूनी करियर लंबा और प्रतिष्ठित रहा है. आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में, वह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के निरंतर और साहसी समर्थक रहे हैं.

रेड्डी पर खड़गे ने क्या कहा?

खड़गे ने कहा, वह गरीबों के पक्षधर हैं और अपने कई फैसलों में उन्होंने गरीबों का पक्ष लिया और संविधान तथा मौलिक अधिकारों की रक्षा भी की. रेड्डी के बारे में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, वह उन मूल्यों को पूरी तरह से दर्शाते हैं जिन्होंने हमारे देश के स्वतंत्रता आंदोलन को इतनी गहराई से बचाया और जिन मूल्यों पर हमारे देश का संविधान और लोकतंत्र टिका हुआ है.

रेड्डी की उम्मीदवारी पर सत्तापक्ष से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें रिटायर हुए 11 साल से ज्यादा का लंबा वक्त हो गया. उन्होंने UPA सरकार के दौरान ऐसा क्या फैसले लिए थे, जिसका उन्हें अब इनाम मिल रहा है. अपनी उम्मीदवारी पर खुद रेड्डी कहते हैं कि पिछले 55 साल से संविधान की विचाराधारा उनके बेहद करीब रही है. उम्मीदवारी को स्वीकार में करने में दिक्कत क्या है. इंडिया गठबंधन देश की 60 फीसदी आबादी का प्रतिनिधत्व करता है. उन्होंने आगे कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि NDA के पास बहुमत है, लेकिन इस चुनाव में कोई पार्टी अपने सांसदों को व्हिप नहीं जारी कर सकती है. ऐसे में मैं सभी सांसदों से अपील करूंगा कि वे मेरी उम्मीदवारों पर मंथन करें और तय करें कि राधाकृष्णन और रेड्डी में बेहतर कौन है.

गोगोई-यादव पर हमलावर था विपक्ष

विपक्ष पूर्व CJI रंजन गोगोई और जस्टिस शेखर यादव को लेकर बीजेपी पर हमला बोलता रहा है. गोगोई को राज्यसभा के लिए मनोनीत करने पर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने कहा था कि क्या ये काम के बदले दिया गया तोहफा है. जनता जजों की स्वाधीनता पर कैसे भरोसा करेगी. बहुत से सवाल हैं.

दरअसल, गोगोई 17 नवंबर 2019 को उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. उनके सेवानिवृत्त होने से कुछ दिनों पहले इन्हीं की अध्यक्षता में बनी पीठ ने अयोध्या मामले में फैसला सुनाया था. रिटायर होने के बाद मार्च, 2020 में उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था.

गोगोई के अलावा विपक्ष जस्टिस शेखर यादव को लेकर भी सत्तापक्ष पर हमलावर रहा है. जस्टिस यादव विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इस कार्यक्रम में वो यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बोल रहे थे और बोलते-बोलते कुछ ऐसा बोल गए कि इस पर दिल्ली तक राजनीतिक क्लेश हो गयाक्लेश का कारण उनके पांच शब्द थेइनमें पहला था कठमुल्लादूसरा हलालातीसरा तीन तलाकचौथा चार शादी और पांचवां शब्द था बहुसंख्यक.

चूंकि उन्होंने बयान VHP के मंच से दिया था तो बीजेपी बैकफुट पर आ गई थी. ओवैसी से लेकर कपिल सिब्बल तक ने इसपर बीजेपी को घेरा था. कपिल सिब्बल ने कहा था कि ये भारत को तोड़ने वाला बयान है. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि एक जज का ऐसा भाषण देश की कॉलेजियम प्रणाली पर आरोप लगाता है और न्यायालयों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है. सीपीएम नेता वृंदा करात ने जस्टिस शेखर यादव के भाषण को नफरती कहा और इसे संविधान पर हमला बताया.

बीजेपी को मिल गया मौका

रंजन गोगोई और शेखर यादव के मुद्दे पर बैकफुट पर रही बीजेपी को अब बैठे बिठाए विपक्ष को घेरने का मौका मिल गया है. बीजेपी ने निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी 2011 के उस फैसले के लिए याद किए जाते हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण नक्सल विरोधी पहल सलवा जुडूम को खारिज कर दिया गया था. बीजेपी ये भी सवाल पूछ रही है कि रेड्डी ने UPA सरकार की ऐसी क्या मदद की थी, जिसका इनाम उन्हें अब मिल रहा है.

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