QUAD के भविष्य अब सवाल क्यों हैं !

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने करीब तीन साल पहले भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि QUAD का भविष्य नहीं है। उसने कहा था कि ‘भविष्य में क्वाड का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।’ उस वक्त ग्लोबल टाइम्स की इस भविष्यवाणी को सिर्फ एक प्रोपेगेंडा माना गया था। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने अपने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 23 अगस्त 2025, 07:34 AM 6 मिनट read
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QUAD के भविष्य अब सवाल क्यों हैं !
Photo: UB India News Archive

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने करीब तीन साल पहले भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि QUAD का भविष्य नहीं है। उसने कहा था कि ‘भविष्य में क्वाड का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।’ उस वक्त ग्लोबल टाइम्स की इस भविष्यवाणी को सिर्फ एक प्रोपेगेंडा माना गया था। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के शुरूआती करीब 200 दिनों में साबित कर दिया है कि क्वाड का भविष्य खतरे में है। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भारत-अमेरिका के रिश्तों को खराब किया और अब उन्होंने जापान के साथ भी भारत जैसा ही सलूक किया है। इसे देखकर यकीनन सबसे ज्यादा खुश चीन होगा।

QUAD बनाने का मकसद इंडो-पैसिफिक में चीन को काउंटर करना था। इसमें चार सदस्य देश हैं, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में क्वाड को मजबूत किया और बाइडेन प्रशासन ने उस नीति को आगे बढ़ाया। लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ साथ जापान पर भी ना सिर्फ सख्त कारोबारी टैरिफ लगाए हैं, बल्कि अपमानजनक बयानबाजी भी की है। ट्रंप ने इस गठबंधन की एकजुटता और आपसी विश्वास को तहस-नहस कर दिया है।

ट्रंप के फैसलों से QUAD खत्म होने के कगार पर?
डोनाल्ड ट्रंप के फैसले बीजिंग के लिए किसी रणनीतिक जीत से कम नहीं है, क्योंकि खुद वॉशिंगटन ने अपने सबसे करीबी साझेदारों को अपमानित किया है, उनमें अविश्वास पैदा किया है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ऐसा अपने घरेलू राजनीति के लिए कर रहे हैं, लेकिन इसका असर अमेरिका की विदेश नीति और एशिया में अमेरिका की पकड़ को कमजोर कर देंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को पहला बड़ा झटका अप्रैल महीने में 25 प्रतिशत टैरिफ लगाकर दिया था, जिसे उन्होंने ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ नाम दिया था। इसके बाद उन्होंने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत कर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ थोप दिया, जिससे भारतीय सामानों पर कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया। जिसने भारत और अमेरिका के उस रिश्ते की बुनियाद ही हिला दी है, जिसे 25 सालों से लगातार मजबूत करने की कोशिश की गई है और जिसमें खुद ट्रंप के पहले कार्यकाल में उठाए गये कदम शामिल थे।

ट्रंप की अपमानजनक बयानबाजी और उग्र टैरिफ का नतीजा ये हुआ है कि भारत ने अमेरिकी फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एफ-35 खरीदने से इनकार कर दिया है, अमेरिका से कई डिफेंस प्रोजेक्ट रोकने के संकेत दिए हैं और चीन के साथ रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। जाहिर तौर पर इससे अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी पर सीधा असर पड़ा है।

जापान को डोनाल्ड ट्रंप ने कैसे किया अपमानित?
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से जापान लगातार अमेरिकी छतरी के नीचे रहा है। जापान की सुरक्षा अमेरिका पर निर्भर है और अमेरिका की एशिया पॉलिसी में जापान हमेशा से शीर्ष पर रहा है। लेकिन ट्रंप के टैरिफ ने जापान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। ट्रंप ने 22 जुलाई को जापान पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी और 15 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं। जबकि अभी तक जापानी सामानों पर अमेरिका में कोई टैरिफ नहीं था। ट्रंप के टैरिफ ने जापान को बुरी तरह से प्रभावित किया है। जापान की स्टील और कार इंडस्ट्री पर ट्रंप की टैरिफ का सीधा चोट हुआ है। जबकि इसी जापान ने 2023 में अमेरिका में 780 अरब डॉलर का निवेश किया था।

लेकिन ट्रंप के टैरिफ को जापान की सरकार ‘धोखा’ मान रही है। जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा, जिन पर पहले से ही चीन को लेकर “नरम” रवैया अपनाने का आरोप लगता रहा है, वो देश को अमेरिकी टैरिफ से संभालने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने भी चीन के साथ रिश्तों को सामान्य करने के संकेत दे दिए हैं। जापान में पिछले दिनों करवाए गये सर्वे से पता चला है कि जापानी लोगों में अमेरिका को लेकर विश्वसनीयत काफी तेजी से गिर गई है। प्यू रिसर्च के सर्वे के मुताबिक सिर्फ 55 प्रतिशत जापानियों को ही अमेरिका पर विश्वास बचा है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप पर सिर्फ 38 प्रतिशत लोगों को ही विश्वास है। डोनाल्ड ट्रंप ने जापान पर अमेरिका में 550 अरब डॉलर का निवेष करने का जबरदस्त प्रेशर डाला है और जापान को ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिससे जापानियों में भारी गुस्सा है। इसके अलावा जापान को अपने कृषि बाजार को अमेरिका के लिए जबरदस्ती खोलना पड़ा है, जिससे देश की सरकार की काफी आलोचना हो रही है।

QUAD के भविष्य अब सवाल क्यों हैं?
ट्रंप ने भारत और जापान के साथ जैसा सलूक किया है, उसका सीधा असर QUAD पर होता दिख रहा है। नई दिल्ली में इस साल क्वाड शिखर सम्मेलन होना है, लेकिन अभी तक उसकी तारीख तक की घोषणा नहीं हुई है, जबकि इस साल के खत्म होने में सिर्फ साढ़े चार महीने बचे हैं। बहुत उम्मीद है कि क्वाड की बैठक को स्थगित कर दिया जाएगा। क्वाड की अगर बैठक होती है तो ट्रंप को दिल्ली आना होगा और मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा होना अत्यंत मुश्किल दिख रहा है। इसके अलावा मोदी करीब सात सालों के बाद इसी महेनी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में हिस्सा लेने चीन जा रहे हैं। जापान भी बीजिंग के साथ सीमित स्तर पर आर्थिक बातचीत आगे बढ़ा रहा है। इससे साफ पता चल रहा है कि जब अमेरिका अपने सहयोगियों पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव डाल रहा है, तब चीन उसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है और वो ‘वैकल्पिक साझेदार’ बनने की कोशिश में तेजी से जुट गया है।

चीन ने ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ भारत का सीधा साथ देने की घोषणा की है। इसके अलावा अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत को साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया है, जाहिर तौर पर ट्रंप के टैरिफ के असर को कम करने के लिए भारत के पास भी ऑप्शन सीमित हैं। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स को अभी भी क्वाड को लेकर पॉजिटिव उम्मीदें हैं और उनका मानना है कि चीन का खतरा वास्तविक है, इससे भारत और जापान काफी अच्छे से समझ रहे हैं, लेकिन करीब करीब सभी एक्सपर्ट इस बात पर सहमत हैं कि ट्रंप ने सहयोगी देशों में अमेरिका को लेकर विश्वास को चकनाचूर कर दिया है।

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