मैं नक्सल समर्थक नहीं हूं…………………

विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी ने सोमवार को कहा कि वे नक्सल समर्थक बिल्कुल नहीं हैं और भारत का संविधान ही उनकी विचारधारा है। रेड्डी ने कहा कि सलवा जुडूम का फैसला सुप्रीम कोर्ट का फैसला था और वह माओवादियों के पक्ष में नहीं था। अगर ऐसा होगा, तो अब तक […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 26 अगस्त 2025, 05:35 AM 5 मिनट read
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मैं नक्सल समर्थक नहीं हूं…………………
Photo: UB India News Archive

विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी ने सोमवार को कहा कि वे नक्सल समर्थक बिल्कुल नहीं हैं और भारत का संविधान ही उनकी विचारधारा है। रेड्डी ने कहा कि सलवा जुडूम का फैसला सुप्रीम कोर्ट का फैसला था और वह माओवादियों के पक्ष में नहीं था। अगर ऐसा होगा, तो अब तक इसे चुनौती क्यों नहीं दी गई?

NDTV को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा- उपराष्ट्रपति चुनाव में प्रधानमंत्री समेत सभी सांसदों-मंत्रियों को पत्र लिखकर अपने लिए समर्थन मांगूंगा। मैं आंध्र प्रदेश के CM एन चंद्रबाबू नायडू से भी संपर्क करुंगा। अगर मैं चुना जाता हूं तो मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता संविधान की रक्षा करना होगी।

दरअसल, गृहमंत्री अमित शाह ने 22 अगस्त को केरल में विपक्ष की तरफ से बी सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने की आलोचना की थी। उन्होंने कहा थ, ‘सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सुदर्शन रेड्डी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने नक्सलवाद की मदद की। उन्होंने सलवा जुडूम पर फैसला सुनाया। अगर वह फैसला नहीं आता, तो नक्सली चरमपंथ 2020 तक खत्म हो गया होता।’

शाह ने रेड्डी पर नक्सलवाद का समर्थन करने का भी आरोप लगाया। सोमवार को रिटायर्ड जजों ने अमित शाह की टिप्पणी की आलोचना की। पूर्व जजों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति पद का सम्मान करना ही बुद्धिमानी होगी।

‘सलवा जुडूम फैसला नक्सलवाद का समर्थन नहीं करता’

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के समूह में पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस जे चेलमेश्वर समेत 18 जज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सलवा जुडूम फैसला स्पष्ट या परोक्ष रूप से नक्सलवाद या उसकी विचारधारा का समर्थन नहीं करता।

उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति पद के लिए अभियान भले ही वैचारिक हो, लेकिन इसे शालीनता और गरिमा के साथ चलाया जा सकता है। किसी भी उम्मीदवार की तथाकथित विचारधारा की आलोचना करने से बचना चाहिए।

जज बोले- फैसले की गलत व्याख्या से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान

रिटायर्ड जजों के समूह ने बयान जारी कर कहा एक उच्च राजनीतिक पदाधिकारी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पूर्वाग्रहपूर्ण गलत व्याख्या से जजों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंच सकता है।

बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ए के पटनायक, जस्टिस अभय ओका, जस्टिस गोपाल गौड़ा, जस्टिस विक्रमजीत सेन, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस जे चेलमेश्वर, सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े और प्रो. मोहन गोपाल शामिल हैं।

पिछले 5 दिनों में शाह के रेड्डी पर 2 बयान…

बीते चार दिनों में अमित शाह विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी और उनके सलवा जुडूम पर दिए जजमेंट को लेकर 2 बयान दे चुके हैं। 22 अगस्त को केरल के एक कार्यक्रम में शाह ने कहा था,

विपक्ष के प्रत्याशी सुदर्शन रेड्डी वही हैं, जिन्होंने वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद को समर्थन देने वाला जजमेंट दिया था। अगर सलवा जुडूम के खिलाफ जजमेंट न होता तो वामपंथी उग्रवाद 2020 तक खत्म हो गया होता। यही व्यक्ति विचारधारा से प्रेरित होकर सुप्रीम कोर्ट जैसे पवित्र मंच का इस्तेमाल करते हुए सलवा जुडूम के खिलाफ फैसला देने वाले थे।

रेड्डी ने सलवा जुडूम को खारिज कर दिया और आदिवासियों के आत्मरक्षा के अधिकार को खत्म कर दिया। इसी वजह से इस देश में नक्सलवाद दो दशकों से ज्यादा समय तक चला। मेरा मानना है कि वामपंथी विचारधारा ही (विपक्ष द्वारा सुदर्शन रेड्डी को चुनने का) मानदंड रही होगी।

रेड्डी ने कहा था- फैसला उनका नहीं, सुप्रीम कोर्ट का है

शाह की टिप्पणी पर रेड्डी ने 23 अगस्त को कहा था कि वह गृह मंत्री के साथ मुद्दों पर बहस नहीं करना चाहते। यह फैसला उनका नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट का है। उन्होंने सिर्फ फैसला लिखा था। अगर अमित शाह ने पूरा फैसला पढ़ा होता तो वह यह टिप्पणी नहीं करते।

2011 का फैसला, जिसका जिक्र शाह ने किया

दरअसल, छत्तीसगढ़ में सरकार ने नक्सलियों से लड़ने के लिए सलवा जुडूम अभियान चलाया था, जिसमें आदिवासी युवाओं को हथियार देकर स्पेशल पुलिस ऑफिसर बनाया गया। 2011 में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी की बेंच ने इस पर रोक लगाते हुए कहा कि यह तरीका असंवैधानिक और गैरकानूनी है।

कोर्ट ने कहा था कि सरकार का काम नक्सलियों से लड़ने के लिए सुरक्षाबलों को भेजना है, न कि गरीब आदिवासियों को ढाल बनाकर खतरे में डालना। फैसले में आदेश दिया गया कि इन युवाओं से तुरंत हथियार लिए जाएं। सरकार को नक्सलवाद की मूल कारणों पर काम करना चाहिए।

9 सितंबर को होगा चुनाव

उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होंगे। इसके लिए विपक्ष ने बी सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है। वे NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

रेड्डी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में 21 अगस्त को अपना नामांकन दाखिल किया था।

इस दौरान राकांपा (एससीपी) प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव, द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और गठबंधन के कई अन्य नेता भी मौजूद थे।

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