आज देशभर में गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जा रही है. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आने वाला यह पर्व इस बार और भी खास है क्योंकि श्रद्धालु अपने-अपने घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना कर रहे हैं. पुराणों व शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था इसलिए गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन को विनायक चतुर्थी या विनायक चविथि भी कहा जाता है. मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से जीवन से सभी विघ्न दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है. साथ ही गणेश चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि समेत कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है.
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सुखकर्ता कहा गया है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश जी का जन्म हुआ था. गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है, यानी किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे की जाती है. इस पर्व पर गणपति की मूर्ति स्थापित कर 10 दिनों तक भक्ति, पूजा और उत्सव का माहौल रहता है. श्री गणेशजी को सिद्धि, बुद्धि और विघ्नहर्ता माना गया है इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन के सभी अवरोध दूर होते हैं. विशेषकर विद्यार्थियों, व्यापारियों और नए कार्य की शुरुआत करने वालों के लिए यह पर्व अत्यंत फलदायी है. शास्त्रों के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर व्रत और पूजन करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और मिथ्या दोष (चंद्रदर्शन का दोष) से मुक्ति मिलती है.
देश में बुधवार को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। महाराष्ट्र में तो हर गली-मोहल्ला गणपति बप्पा की भव्य झांकियों और पंडालों से सज गया है। मुंबई के लाल बागचा राजा से लेकर पुणे के दगडूशेठ हलवाई गणपति तक लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं।
मुंबई के सिद्धीविनायक मंदिर में सुबह की आरती हुई। दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और देश के अन्य राज्यों में भी गणेश मंदिरों में विशेष आरती, शृंगार और झांकियों का आयोजन किया जा रहा है।
इस साल महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक गणेशोत्सव को आधिकारिक रूप से ‘महाराष्ट्र राज्य महोत्सव’ घोषित किया है।
आज यानी 27 अगस्त 2025 से 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव पर्व की शुरुआत हो गई है और अब इसका समापन 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। गणेश उत्सव का पहला दिन बेहद खास होता है क्योंकि इस दिन भक्त गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापना करते हैं। फिर जितने दिन घर में गणेश जी की मूर्ति रहती है उतने दिन उसकी विधि विधान पूजा करते हैं और सुबह-शाम गणेश जी की आरती उतारते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेश चतुर्थी के दिन गणपति स्थापना की सही विधि क्या है। तो चलिए आपको बताते हैं गणेश जी को बिठाने का सही तरीका और नियम।
महाराष्ट्र में 10 दिवसीय गणेशोत्सव का आगाज,
महाराष्ट्र में बुधवार को 10 दिन का गणेशोत्सव शुरू हो गया। लोग बड़े उत्साह के साथ अपने पसंदीदा हाथी के सिर वाले भगवान गणेश को अपने घरों, मकानों और सार्वजनिक पंडालों में ला रहे हैं। सुबह के वक्त चारों ओर ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया’ के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है।
सुबह के समय ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया’ के जयकारे गूंज रहे हैं। छोटे, मध्यम और बड़े आकार की गणेश की प्रतिमाएं ढोल-ताशा की ताल के साथ भक्तों के दिलों और घरों में श्रद्धा के साथ विराजमान हो रही हैं। मुंबई में भगवान गणेश के स्वागत के लिए भव्य सजावट की गई है। उन्हें समृद्धि लाने वाला और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।
पहली बार महाराष्ट्र सरकार ने गणेशोत्सव को राज्य का आधिकारिक त्योहार घोषित किया है। इस 10 दिन के उत्सव के दौरान राज्य के संस्कृति विभाग की ओर से कई गतिविधियां, कार्यक्रम, समारोह और प्रतियोगिताएं आयोजित की गई हैं।
गणेश मंडलों को छत्रपति शिवाजी महाराज के 12 किलों को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित किए जाने, ऑपरेशन सिंदूर और स्वदेशी भावना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कहा गया है। बृहन्मुंबई सार्वजनिक गणेशोत्सव समन्वय समिति ने अपने सदस्यों से त्योहार के आयोजन को सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने आगामी नगर निगम चुनावों को देखते हुए गणेशोत्सव को राजनीतिक रंग से दूर रखने पर जोर दिया है और कहा कि यह संस्कृति और भक्ति का त्योहार है।
घर पर गणेश स्थापना पूजा विधि (Ganesh Sthapana Puja Vidhi In Hindi)
- सबले पहले घर की अच्छे सफाई करें और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
- फिर जहां गणपति बप्पा की मूर्ति की स्थापना करनी है उस स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- फिर एक पवित्र लकड़ी की चौकी या पट्टा लें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछा लेँ।
- अब उस स्थान पर एक स्वस्तिक चिह्न बनाएं और चावल से हलका सा चौकोर मंडप बना लें।
- इसके बाद शुभ मुहूर्त में गणपति बप्पा मोरया का जयघोष करते हुए गणेश जी की मूर्ति को घर लाएं।
- मूर्ति को तैयार मंडप पर स्थापित करें और उनके दाएं हाथ में अक्षत साथ ही बाएं हाथ में दूर्वा रखें।
- भगवान की प्रतिमा के सामने एक तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरकर रखें।
- इसके बाद“ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करते हुए भगवान को आमंत्रित करें।
- गणेश जी को माला पहनाकर फूल अर्पित करें।
- गंगाजल या दूध से भगवान को प्रतीकात्मक स्नान कराएं, फिर साफ जल से शुद्ध करें।
- बप्पा के माथे पर चंदन और रोली लगाएं। इसके बाद हल्दी और अक्षत चढ़ाएं।
- घी का दीप जलाएं और सुगंधित धूप दें।
- आखिरी में परिवार सहित गणेश जी की आरती करें और हाथ जोड़कर बप्पा से विघ्न दूर करने की प्रार्थना करें।
- विसर्जन तक गणेश जी की विधि विधान पूजा करें और दिन में कम से कम एक बार भजन, आरती अवश्य करें।
गणेश भगवान के मंत्र (Ganesh Sthapana Mantra)
- ॐ गण गणपतये नमः ।
- ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा ।
- वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
- ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
इन मंत्रों का कम से कम 11, 21 या 108 बार उच्चारण करें।
गणेश स्थापना कितने दिन के लिए करें? (Ganesh Sthapana Kitne Din Ke Liye Kare)
आप अपनी सुविधा अनुसार 1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन तक गणपति की स्थापना कर सकते हैं।
गणेश स्थापना दिशा (Ganesh Sthapana Direction)
गणपति बप्पा की मूर्ति उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके रखें।
भगवान गणेश का प्रिय भोग (Ganesh Puja Bhog)
बप्पा को मोदक सबसे प्रिय है खासकर उकड़ीचे मोदक यानी गुड़-नारियल से भरे चावल के मोदक। गणेश चतुर्थी के दिन इसका भोग बप्पा को जरूर लगाएं।







