मोदी ही उम्मीद की किरण! रूस-यूक्रेन जंग रोकने के लिए क्यों दुनिया PM की ओर देख रही?

रूस और यूक्रेन जंग को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े-बड़े दावे किए थे. सत्ता में आने से पहले कहे थे कि वो शांति ला देंगे. राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने अब तक कई प्रयास भी किए, लेकिन सफलता नहीं मिली. ट्रंप को नाकाम होता देख यूक्रेन में शांति के लिए दुनिया अब […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 5 सितंबर 2025, 08:19 AM 5 मिनट read
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मोदी ही उम्मीद की किरण! रूस-यूक्रेन जंग रोकने के लिए क्यों दुनिया PM की ओर देख रही?
Photo: UB India News Archive

रूस और यूक्रेन जंग को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े-बड़े दावे किए थे. सत्ता में आने से पहले कहे थे कि वो शांति ला देंगे. राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने अब तक कई प्रयास भी किए, लेकिन सफलता नहीं मिली. ट्रंप को नाकाम होता देख यूक्रेन में शांति के लिए दुनिया अब पीएम मोदी की ओर देखने लगी है. यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से लेकर यूरोपियन यूनियन (EU) तक के नेता पीएम मोदी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं.

SCO के मंच से जो तस्वीर दुनिया ने देखी उससे संदेश साफ हो गया कि अगर यूक्रेन में युद्धविराम और शांति चाहिए तो भारत ही उसका सूत्रधार हो सकता है. पीएम मोदी ही शांति दूत हो सकते हैं. कल यानी गुरुवार को जब पेरिस में यूरोप के सभी नेता जेलेंस्की के साथ यूक्रेन में शांति के लिए चर्चा कर रहे थे उसी दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर ने टेलीफोन पर पीएम मोदी से बातचीत की.

बातचीत के बाद EU की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया, रूस को युद्ध समाप्त करने और शांति की राह बनाने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है. वे यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ भारत के निरंतर सहयोग का स्वागत करते हैं. EU ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के वैश्विक सुरक्षा पर परिणाम होंगे और यह आर्थिक स्थिरता को कमजोर करेगा जिससे पूरी दुनिया के लिए ख़तरा पैदा होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए नई दिल्ली के निरंतर समर्थन को दोहराया.

जयशंकर की यूक्रेन के विदेश मंत्री से बात

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा भारत दौरे पर हैं. गुरुवार को उनकी मुलाकात विदेश मंत्री एस जयशंकर से हुई. बातचीत के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत इस संघर्ष को जल्द समाप्त करने और स्थायी शांति की स्थापना का समर्थन करता है.

हाल के हफ्तों में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और जेलेंस्की ने संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों पर चर्चा करने के लिए पीएम मोदी से फोन पर बात की. इस हफ्ते चीन में SCO मीटिंग के दौरान पीएम मोदी और पुतिन के बीच हुई मुलाकात में भी यह मुद्दा उठा था.

भारत का बैलेंस अप्रोच

भारत ने 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं की है. उसने संघर्ष का स्थायी समाधान खोजने के लिए बार-बार रूस और यूक्रेन के बीच सीधी बातचीत का आह्वान किया है. पीएम मोदी ने पुतिन और जेलेंस्की से यह भी कहा है कि युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकल सकता और बंदूक के साये में बातचीत सफल नहीं होगी.

पश्चिमी दबाव के बावजूद, भारत ने रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं. हालाकि पीएम मोदी ने कभी-कभी व्लादिमीर पुतिन के युद्ध की आलोचना की है, लेकिन वे आक्रामक लहजे से भी बचते रहे हैं. भारत ने रूस के साथ अपनी विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को सावधानीपूर्वक संरक्षित किया है.

पीएम मोदी शांति स्थापना के प्रयासों में भी रुचि रखते रहे हैं और उन्होंने कई मौकों पर यूक्रेनी राष्ट्रपति से मुलाकात की है. संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल के आयात में वृद्धि की है, साथ ही मानवीय सहायता के तहत यूक्रेन को चिकित्सा आपूर्ति, उपकरण और राहत सामग्री भी भेजी है. भारत ने यूक्रेन का समर्थन करने के लिए अन्य ठोस प्रयास भी किए हैं.

पीएम मोदी पर भरोसा क्यों?

  1. भारत पर पूरी दुनिया का फोकस
  2. विश्व शांति के लिए अहम सूत्रधार
  3. PM मोदी ने कहा कि ये वक्त युद्ध का नहीं
  4. पीएम मोदी कई मंच से शांति की बात कर चुके हैं
  5. पुतिन-जेलेंस्की ने भी मोदी को अहम माना है
  6. पीएम मोदी के पुतिन-जेलेंस्की से अच्छे रिश्ते हैं
  7. दुनिया पीएम मोदी की बात सुनती है
  8. यूक्रेन जंग न रुकने से ट्रंप की किरकिरी
  9. भारत-रूस-चीन के एक साथ से चिंता

बातचीत से निकला चीन के साथ विवाद का हल

पीएम मोदी बातचीत से समस्या का हल निकालने की बात करते हैं तो इसकी वजह भी है. उन्होंने खुद भारत और चीन सीमा विवाद का हल बातचीत से निकाला. गलवान झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्ते खराब हो चुके थे, लेकिन पीएम मोदी ने संयम से काम लेते हुए चीन से बातचीत को जारी रखा. दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर की बातचीत होती रही. कई बैठकों के बाद दोनों देश डिसइंगेजमेंट और डिएक्सलेशन पर राजी हुए.

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