आरजेडी के पूर्व नेता राजकुमार राय उर्फ आला राय की गोली मारकर हत्या…………….

बुधवार की रात हुए एक सनसनीखेज वारदात ने बिहार की राजनीति को हिला दिया. जमीन कारोबारी और आरजेडी के पूर्व नेता राजकुमार राय उर्फ आला राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई. बताया जा रहा है कि अपराधियों ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर छह गोलियां मारीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई. वारदात पटना […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 11 सितंबर 2025, 06:18 AM 6 मिनट read
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आरजेडी के पूर्व नेता राजकुमार राय उर्फ आला राय की गोली मारकर हत्या…………….
Photo: UB India News Archive
बुधवार की रात हुए एक सनसनीखेज वारदात ने बिहार की राजनीति को हिला दिया. जमीन कारोबारी और आरजेडी के पूर्व नेता राजकुमार राय उर्फ आला राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई. बताया जा रहा है कि अपराधियों ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर छह गोलियां मारीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई. वारदात पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल के पास मुन्नाचक रोड नंबर 17 पर हुई.

राजकुमार राय उर्फ आला राय की हत्या ने सिर्फ पटना ही नहीं बल्कि पूरे बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है. वजह साफ है- आला राय राघोपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे. यह वही सीट है जो आरजेडी का गढ़ मानी जाती है और जिसे यादव परिवार की प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है.
राघोपुर से चुनाव लड़ने की तैयारी
राजकुमार राय वैशाली जिले के मीरमपुर के रहने वाले थे. राजनीति और जमीन कारोबार, दोनों में उनकी सक्रियता रही. वे आरजेडी के जिला अध्यक्ष भी रह चुके थे. हाल ही में उन्होंने पार्टी से दूरी बनाई थी और इस बार राघोपुर विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. यह वही सीट है, जहां से आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव चुनाव जीतते आ रहे हैं.
कैसे हुई हत्या?
घटना की रात राय अपने ड्राइवर के साथ घर लौट रहे थे. घर पहुंचने से पहले वे पास की दुकान से मसाला खरीदने उतरे. तभी पहले से घात लगाए दो हमलावरों ने उन पर गोली चला दी. शुरुआत में एक गोली दुकान के फ्रिज पर लगी, लेकिन इसके बाद अपराधियों ने पीछा कर ताबड़तोड़ फायरिंग की. राय को छह गोलियां लगीं और वे मौके पर ढेर हो गए. पुलिस ने घटनास्थल से छह खोखा बरामद किया है और इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है.

सड़क पर दौड़ा कर मारी 6 गोलियां

राजकुमार राय वैशाली के राघोपुर मीरमपुर के रहने वाले थे। राजेंद्रनगर टर्मिनल के सामने मुन्नाचक रोड नंबर 17 में वारदात को अंजाम दिया गया है। वे पटना में मुन्नाचक में मकान बनाकर रह रहे थे। राजकुमार राय बुधवार की रात करीब 9.25 के आसा-पास बजे गांव से कार से ड्राइवर के साथ अपने घर आ रहे थे। उनके घर के पास गाड़ी नहीं जाती है। ड्राइवर कार खड़ी कर रहा था। राजकुमार कार से उतरकर सब्जी के लिए मसाला खरीदने पास में ही दुकान में गए। पहले से मौजूद दो शूटर्स ने एक गोली चलाई, जो दुकान के फ्रिज में लगी। उसके बाद वे वहां से भागकर गली में चले गए। शूटर्स ने फिर गोली चलाई। पहली गोली उनकी पीठ में लगी। वे भाग कर एक दुकान के अंदर घुस गए। दोनों अपराधी भी होटल के अंदर घुस गए।

चश्मदीद बोला- गली की लाइट पहले ही बंद कर दी थी

चश्मदीद अशोक कुमार अग्रवाल ने बताया कि, दो की संख्या में अपराधी मास्क लगाकर पैदल आला राय का पीछा करते रोड नंबर 17 में घुसे थे। गली की लाइट पहले से ऑफ कर दी गई थी।

जमीन कारोबार से भी जुड़े थे राजकुमार

मृतक के गांव के लोगों का कहना है कि, राजकुमार राय पटना में विवादित जमीन की खरीद-बिक्री करते थे। उन्होंने कई लोगों से कर्ज भी ले रखा था। राजकुमार की हत्या की सूचना मिलने के बाद गांव से लोग भी पहुंचे। पीएमसीएच से लेकर उनके घर तक लोगों की भीड़ जमा हो गई। राजकुमार की दो बेटियां हैं।

इधर, मामले की जांच करने और अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है। पुलिस की एक टीम देर रात राघोपुर के लिए रवाना हो गई। पुलिस ने तीन को हिरासत में लिया है। पुलिस सीसीटीवी खंगाल रही है। जिस दुकान में उन्हें पहले निशाना बनाया गया, वहां के सीसीटीवी का डीवीआर पुलिस अपने साथ ले गई।

दो शूटर एक घंटे से इंतजार कर रहे थे

पुलिस के मुताबिक, राजकुमार की हत्या में उनका एक करीबी ही लाइनर है। पुलिस ने उसकी पहचान कर ली है। हत्या पूरी साजिश के साथ हुई है। उनकी हत्या के लिए शूटरों को सुपारी दी गई। हत्या के पीछे जमीन कारोबार में लेनदेन बड़ी वजह है। हालांकि पारिवारिक एंगल भी है। दोनों शूटर एक घंटे से उनके आने का इंतजार कर रहे थे। शूटर ने बाइक को घटनास्थल से दूर लगाया और पैदल ही मौके पर पहुंचे। घटना के बाद दोनों पैदल भागे फिर बाइक से फरार हो गए।

 

 

हत्या का राजनीतिक कनेक्शन
इस हत्या को राजनीतिक एंगल से भी देखा जा रहा है. राघोपुर आरजेडी का गढ़ माना जाता है. 2015 और 2020 दोनों चुनावों में तेजस्वी यादव ने यहां से जीत दर्ज की है और लगातार 48-49% वोट शेयर बनाए रखा है. इससे पहले लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं. 2010 में भले ही आरजेडी को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन फिर से यह सीट यादव परिवार के पास लौट आई.

तेजस्वी को चुनौती?
राजकुमार राय का राघोपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान सीधे-सीधे तेजस्वी यादव की चुनौती मानी जा रही थी. स्थानीय स्तर पर माना जा रहा है कि उनकी सक्रियता से आरजेडी का समीकरण बिगड़ सकता था. यही वजह है कि उनकी हत्या को राजनीतिक साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है.
किसे हो सकता था नुकसान?
अगर राय मैदान में उतरते तो वोटों का बंटवारा होना तय था. इससे सबसे ज्यादा नुकसान आरजेडी को हो सकता था, क्योंकि आला राय का आधार उन्हीं इलाकों में था जहां आरजेडी परंपरागत रूप से मजबूत है. ऐसे में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को अप्रत्यक्ष फायदा मिलता. राजकुमार राय की हत्या ने यह साफ कर दिया है कि आने वाला विधानसभा चुनाव न सिर्फ विकास या जातिगत समीकरण पर लड़ा जाएगा, बल्कि अपराध और राजनीतिक साजिश भी बड़ा मुद्दा बनेगी.

जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन इस वारदात ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति और अपराध का रिश्ता अभी भी गहराई से जुड़ा हुआ है. सवाल यह भी है कि क्या आला राय की हत्या महज जमीन कारोबार का विवाद है या फिर इसके पीछे राघोपुर की सियासत छिपी है.
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