सियासी तमाशे में जानलेवा भगदड़ से खड़े हुए सवाल……………

तमिलनाडु में फिल्मी सितारों और सियासत का चोली-दामन का रिश्ता रहा है और लोग यहां फिल्मी सितारों की पूजा करते हैं, उनके प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं। मगर उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि इससे कभी तबाही और मौत का ऐसा भी मंजर पैदा हो सकता है। पर ऐसा ही हुआ। शनिवार को […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 30 सितंबर 2025, 07:46 AM 4 मिनट read
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सियासी तमाशे में जानलेवा भगदड़ से खड़े हुए सवाल……………
Photo: UB India News Archive

तमिलनाडु में फिल्मी सितारों और सियासत का चोली-दामन का रिश्ता रहा है और लोग यहां फिल्मी सितारों की पूजा करते हैं, उनके प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं। मगर उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि इससे कभी तबाही और मौत का ऐसा भी मंजर पैदा हो सकता है। पर ऐसा ही हुआ।

शनिवार को चेन्नई से 384 किलोमीटर दूर कपड़ा उद्योग के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध करूर की सड़कों पर तमिल फिल्मों के सुपरस्टार विजय के रोड शो में भगदड़ मचने से 40 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। कई परिवार तबाह हो गए। उस समय विजय अपने वाहन की छत से उमड़ी भीड़ को संबोधित कर रहे थे। तमिलनाडु में पहले भी कई भगदड़ मची हैं, पर यह उन सबसे घातक थी और आम जनता के दिलों में गहरा जख्म छोड़ गई।

इस दुर्घटना का कोई एक कारण नहीं है। पीछे मुड़कर देखने पर लगता है कि यह तो होना ही था। एक साल पहले राजनीति में प्रवेश करने की घोषणा के बाद सुपरस्टार विजय का यह पांचवां बड़ा कार्यक्रम था। पहले के दो कार्यक्रम बड़े मैदानों में हुए थे। अंतिम तीन कार्यक्रम रोड शो थे। इनकी योजना उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले हर शनिवार को करने की बनाई थी। इन सभी कार्यक्रमों में अपेक्षा से ज्यादा भीड़ उमड़ी, पानी व भोजन की कमी रही, महिलाएं व बच्चे समेत प्रशंसकों की बड़ी संख्या चिलचिलाती धूप में घंटों बैठी रही। इनमें अराजक प्रशंसक सुपरस्टार की एक झलक पाने के लिए जहां जगह मिली, वहीं चढ़ गए, चाहे वे बिजली के खंभे, पेड़ या ट्रांसफॉर्मर टावर ही क्यों न हों!

विजय की पहली दो रैलियों ने ही राज्य में हंगामा मचा दिया और मामला मद्रास उच्च न्यायालय तक जा पहुंचा। तब न्यायाधीश ने विजय की तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) द्वारा आयोजित रैलियों में सुरक्षा चूक के बारे में चेतावनी दी और सवाल उठाया कि अगर किसी की जान गई, तो जिम्मेदारी कौन लेगा? टीवीके पदाधिकारियों की शिकायत है कि स्थानीय प्रशासन डीएमके के कार्यक्रमों की तरह पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है। लेकिन प्रशासन का दावा है कि विजय के प्रशंसक बेकाबू होते हैं और इससे पुलिस-प्रशासन पर दबाव काफी बढ़ जाता है। दोनों पक्ष अपनी बता रहे, लेकिन न्यायाधीश की बात पर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। इस त्रासदी पर गौर करें, तो कम से कम सात कारण इसके लिए जिम्मेदार हैं।

एक, पहली रैली शनिवार सुबह 8:45 बजे नमक्कल में होनी थी। भीड़ तड़के 3 बजे से एकत्र होने लगी थी। मगर विजय चेन्नई से लगभग 9 बजे उड़े। उनकी पहली सभा दोपहर 2:30 बजे हो सकी। यह देरी क्यों? दूसरा, विजय को करूर में दोपहर 12 बजे सभा को संबोधित करना था, लेकिन यह शाम 7:30 बजे शुरू हुई। जगह-जगह भीड़ जमा हो रही थी। प्रशासन या विजय ने सभा रद्द करने के बारे में क्यों नहीं सोचा? तीसरा, टीवीके ने अनुमान लगाया था कि भीड़ 10,000 के आस-पास होगी, लेकिन यह 50,000 हो गई। विजय या पुलिस खुफिया विभाग ने भीड़ का अंदाजा क्यों नहीं लगाया?

चौथा, भीड़ में धक्का-मुक्की से महिलाएं, बच्चे समेत कई लोगों के दम घुटने लगे और वे बेहोश होने लगे। उसी समय विजय ने एक नौ साल की बच्ची के लापता होने की घोषणा की और अचानक अपनी वैन में चले गए। ऐसा क्यों? पांचवां, भीड़ खुली जगह में जाने के लिए धक्का-मुक्की कर रही थी और जैसे ही एंबुलेंस आई, पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। आखिर क्यों? छठा, इससे पहले कथित तौर पर किसी ने विजय पर चप्पल फेंकी थी। वे उपद्रवी कौन थे? सातवां, टीवीके का कहना है कि उसने पुलिस के निर्देशों का पालन किया। प्रशासन का कहना है, टीवीके पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासित नहीं रख सकी। असलियत क्या है?

टीवीके ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है और कहा है कि वह एक साजिश का शिकार हुई है। भाजपा व अन्नाद्रमुक, राज्य सरकार पर आरोप लगा रही हैं। एक ओर जब यह घमासान जारी है, राजनीतिक वर्ग व चुनाव आयोग को सामान्य जनजीवन को प्रभावित करने वाले रोड शो पर रोक लगाने पर गंभीर विचार करना चाहिए।

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