मनुष्यता की अमरता का सच्चा पर्व: विजयदशमी का दिन मरणोत्सव…………………..

दशहरा मरणोत्सव है। मरण का उत्सव, अंत्येष्टि का पर्व! यह स्वाभाविक प्रश्न है कि क्यों शोक की स्मृति को उल्लास के रूप में परिणत करने की परंपरा हमारे पूर्वज स्थापित कर गए? इसलिए कि मनुष्यता की स्मृति जीवंत रह सके। हमारे पुरखों ने रावण की अंत्येष्टि को इसलिए महत्वपूर्ण बना दिया, ताकि दानवता की पराजय […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025, 06:26 AM 8 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
मनुष्यता की अमरता का सच्चा पर्व: विजयदशमी का दिन मरणोत्सव…………………..
Photo: UB India News Archive

दशहरा मरणोत्सव है। मरण का उत्सव, अंत्येष्टि का पर्व! यह स्वाभाविक प्रश्न है कि क्यों शोक की स्मृति को उल्लास के रूप में परिणत करने की परंपरा हमारे पूर्वज स्थापित कर गए? इसलिए कि मनुष्यता की स्मृति जीवंत रह सके। हमारे पुरखों ने रावण की अंत्येष्टि को इसलिए महत्वपूर्ण बना दिया, ताकि दानवता की पराजय और मानवता की विजय की स्मृति अमिट बनी रहे। रावण के पुतले का दहन एक रूढ़ि नहीं है, सोच है, वह चिंतन है, जो बार-बार बंधनमुक्ति के द्वार पर लाकर खड़ा कर देता है। उन बंधनों से मुक्ति के द्वार पर, जो छल, छद्म, पाखंड, अपारदर्शिता, अहंकार, अमर्ष और अनुदारता के हैं, वैमनस्य, ईर्ष्या, कलुष और विभेद के हैं। दशहरा इन अर्थों में लोक में ही मुक्ति पा लेने का वह अनुष्ठान है, जो रावण दहन से उठती अग्नि की साक्षी में संपन्न किया जाता है। इसे विजयदशमी भी कहते हैं, ताकि हम इन सब वृत्तियों और अवगुणों पर विजय पा सकें। यह भी मान्यता है कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय ‘विजय’ नामक मुहूर्त होता है तथा इस मुहूर्त में चूंकि सभी कार्यों की सिद्धि होती है, इसलिए इसे विजयदशमी कहते हैं।

यह शक्ति की आराधना का भी पर्व है। आदि शक्ति की इस दिन पूरे भाव के साथ आराधना होती है तथा इस आस्था के मूर्तिरूप को सदैव जीवंत बने रहने के लिए विसर्जित किया जाता है। नए कार्य आरंभ किए जाते हैं, शस्त्र पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन शिवाजी महाराज ने औरंगजेब पर विजय के लिए प्रस्थान किया था। यह राजाओं द्वारा युद्ध के लिए प्रस्थान करने का आदर्श दिन माना जाता था।

प्रायः समूचे भारत में संध्या के समय रावण दहन होता है और शमी वृक्ष के पत्ते सोने के रूप में तथा ज्वार की पत्तियां चांदी के रूप में रावण दहन के पश्चात लाई जाती हैं तथा भगवान के समक्ष रखने के बाद उनका एक-दूसरे के बीच आदान-प्रदान किया जाता है। यह वस्तुतः एक-दूसरे की समृद्धि की कामना की अभिव्यक्ति है, जिसे लोक मानस ने रावण की सोने की लंका के लुटने से जोड़ दिया है। यह भी मान्यता है कि शमी वृक्ष पर अर्जुन ने अपना धनुष रखा था, जिसके कारण उसे विजय मिली और यह भी कि इस वृक्ष ने राम की विजय का उद्घोष किया था, इसलिए इसकी पूजा की जाती है।

दशहरा, पारंपरिक रूप से मनाई जाने वाली रामलीला का महत्वपूर्ण अंग है, जिसकी जड़ें प्राचीन भारतीय महाकाव्य रामायण में हैं, जिसे महर्षि वाल्मीकि ने लगभग 500 ईसा पूर्व रचा था। रामायण की कथा, वाचिक परंपरा में निरंतर रही तथा मध्यकाल में उसका नाटकीय रूप विकसित हुआ। ओरछा के राजमहल की भित्तियों पर जो रामलीला के अंकन राजा वीरसिंहजूदेव के समय सोलहवीं सदी में निर्मित हुए, वे वास्तव में रामलीला के नाट्य अंकन हैं, जिनमें रामचरित को अंकित किया गया है। विद्वान मानते हैं कि ये अंकन केशव की रामचंद्रिका के आधार पर किए गए थे।

सोलहवीं सदी में जब गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की, तब रामलीला को नया आयाम मिला। उन्होंने रामलीला की परंपरा विकसित की, जो आज भी प्रचलित है। यह परंपरा उनके अनुयायी मेधा भगत ने आरंभ की और बनारस में तो यह 31 दिनों तक मनाई जाती है तथा रावण वध दशहरे को ही होता है। वर्ष 2008 में यूनेस्को ने रामलीला को ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर’ घोषित किया है।

हिमाचल प्रदेश का कुल्लू का दशहरा प्रसिद्ध है। आश्विन माह के पहले 15 दिनों में राजा सभी देवी-देवताओं को धालपुर घाटी में रघुनाथजी के सम्मान में यज्ञ करने का न्योता देते हैं। कुल्लू नगर में 100 से अधिक देवी-देवता अपने मुख्य देवता रघुनाथजी का पूजन करते हैं। पूरे नगर में उत्साह के साथ जुलूस निकाला जाता है।

मैसूर में दशहरा पर्व मनाने की शुरुआत 15वीं सदी में विजयनगर साम्राज्य के शासकों ने की थी। सजे-धजे हाथियों का जुलूस देखने विश्व भर से पर्यटक आते हैं। कुल्लू की तरह बस्तर का दशहरा भी बहुत प्रसिद्ध है। यहां इसे राम की रावण पर विजय के रूप में नहीं मनाते। यह मां दंतेेश्वरी को समर्पित पर्व है, जो 75 दिन चलता है। पहला दिन ‘काछिन गादी’ कहलाता है। यह पर्व 15वीं सदी से आरंभ हुआ था।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में यह पर्व पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाता है। राजस्थान में भी शस्त्र पूजन कर विजयोत्सव मनाया जाता है। गुजरात में गरबा और दुर्गा आराधना के साथ यह पर्व जुड़ा हुआ है। महाराष्ट्र में ‘सिलंगण’ के रूप में इसे सामाजिक महोत्सव के रूप में मनाते हैं। बंगाल, असम और ओडिशा में भी इसे दुर्गा पूजा के रूप में मनाते हैं। पंजाब में नए कार्यों को आरंभ करने और फसल कटाई के रूप में भी दशहरे को मनाया जाता है, तमिलनाडु में गोलू और देवी आराधना के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में दशहरे के समय बथुकम्मा नामक फूलों का त्योहार भी मनाते हैं। ऐतिहासिक रूप से, 14वीं शताब्दी के विजयनगर साम्राज्य में इसे महानवमी के रूप में मनाया जाता था। इतालवी यात्री निकोलो दे ने इसका वर्णन करते हुए लिखा है कि यह एक भव्य धार्मिक और सैन्य उत्सव था, जिसमें मां दुर्गा को योद्धा देवी के रूप में पूजा जाता था। केरल में शस्त्रों की पूजा और देवी आराधना तो अन्य प्रांतों की भांति होती ही है, लेकिन वहां दशहरे को विद्या आरंभ से जोड़ा जाता है। लोग अपने शस्त्रों के साथ-साथ पुस्तकों की भी पूजा करते हैं। यहां यह जानना भी रोचक है कि मध्यप्रदेश के उज्जैन के चार ब्राह्मण परिवारों में, मंदसौर के खानपुरा इलाके में, विदिशा जिले के रावन गांव में तथा बैतूल जिले के छतरपुर गांव में इस दिन रावण की पूजा की जाती है। मंदसौर के बारे में कहा जाता है कि यह रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका है तथा यहां दामाद की तरह रावण का सम्मान किया जाता है।

जहां तक चित्रांकन का प्रश्न है, पर्व के रूप में दशहरे को मनाने के चित्रण केवल आधुनिक काल के हैं। मध्यकाल के अंकन रावण वध के हैं। चूंकि राम द्वारा रावण को मारने के उपलक्ष्य में इस पर्व को मनाया जाता है, इसलिए मुगल, राजस्थानी और पहाड़ी शैलियों सहित अन्य शैलियों में रावण के मारे जाने की घटना ही चित्रित की गई है। सबसे पुराने अंकन मुगल शैली के हैं। अकबर के समय में ईस्वी सन 1584 से 1588 के बीच सचित्र रामायण चित्रित हुई। इस रामायण के बाद अब्दुल रहीम खानखाना ने अकबर के ही समय में रामायण का अंकन कराया। बाद के काल में राजस्थानी और पहाड़ी शैलियों में रामायण के प्रसंगों के काफी अंकन हुए। शिल्प परंपरा में भी इस पर्व के मनाने के उत्कीर्णन नहीं हैं।

रावण व्यक्ति नहीं, वृत्ति का प्रतीक है। वृत्ति ही व्यक्तित्व के मूल में होती है। यह आम मान्यता है कि वह अहंकारी था, इसलिए भगवान राम के हाथों मारा गया, पर यदि गहरे सोचें, तो लगेगा कि वह वास्तव में आत्ममुग्ध था। आत्ममुग्धता के गर्भ से अहंकार जन्मता है। आत्ममुग्धता हो तो मनुष्य स्वयं को औरों से श्रेष्ठ समझने लगता है और अपनी निजता के परकोटे में कैद हो जाता है। रावण और राम में यही अंतर है कि रावण आत्ममुग्ध था, जबकि राम लोकमुग्ध थे। दशहरे पर हम दस सिरों वाले रावण का दहन करते हैं। कुछ विद्वान मानते हैं कि ये दस सिर उसके दस अवगुणों के प्रतीक हैं। संदेश यह है कि दुर्गुण भस्म होने चाहिए। लेकिन सच यह भी है कि रावण शिवभक्त भी था। इसलिए हमारे पुरखों ने रावण दहन के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि रावण और उसके शीश पर सज्जित दुर्गुणों का दहन जरूर करो, लेकिन जब विजयी होकर लौटो, तो आस्था के सद्गुण का स्वर्ण लेकर लौटो। इसलिए दशहरे का यह पर्व युगों-युगों से दुर्गुणों को भस्म करने और सद्गुणों को अंगीकार करने के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। यह उसकी सार्थक व्यंजना का महत्वपूर्ण आयाम है।

रावण की तभी मृत्यु हो पाई, जब भगवान राम उसकी नाभि के अमृत को अपने बाण से मुक्त कर सके। जिस दिन रावण का अमृत पर से एकाधिकार समाप्त हुआ, उसी दिन से अमृत लोक की धरोहर हो गया। इसीलिए दशहरा मरणोत्सव है, लेकिन व्यापक अर्थ में यह मरणोत्सव समूची मानवता का अमृतोत्सव है, मनुष्यता की अमरता का सच्चा पर्व।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
कल रक्षाबंधन पर साल का आखिरी चंद्र ग्रहण,………………….
अध्यात्म

कल रक्षाबंधन पर साल का आखिरी चंद्र ग्रहण,………………….

साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लग रहा है। इस दिन रक्षाबंधन भी है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार चंद्रमा को ग्रहण लगना अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान शुभ कार्यों को करने से मना किया जाता है। ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट तक बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन ऐसा उसी ग्रहण […]

UB India News27 अग॰
भोजशाला केस-धार बंद का आह्वान क्यों …………..
खास खबर

भोजशाला केस-धार बंद का आह्वान क्यों …………..

सकल हिंदू समाज ने धार प्रशासन पर भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया है और धार बंद का आह्वान किया है. इसके चलते मंगलवार को शहर में बंद का असर देखा जा रहा है. शहर में अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हैं, जबकि आवश्यक वस्तु एवं मेडिकल प्रतिष्ठान […]

UB India News25 अग॰
सावन की आखिरी सोमवारी पर मधेपुरा के सिहेंश्वर मंदिर में भीड़ बेकाबू, 8 श्रद्धालु घायल………..
अध्यात्म

सावन की आखिरी सोमवारी पर मधेपुरा के सिहेंश्वर मंदिर में भीड़ बेकाबू, 8 श्रद्धालु घायल………..

सावन के अंतिम सोमवार पर मंदिरों में भीड़ है। मधेपुरा के सिहेंश्वर धाम में भीड़ बेकाबू हो गई। भीड़ इतनी बढ़ गई कि अफरा-तफरी हो गई। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी जलाभिषेक के लिए धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कतार टूटने से भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लाइन में लगे कुछ लोग गिर गए। इस दौरान महिला और बुजुर्ग […]

UB India News24 अग॰
पटना हाईकोर्ट का महावीरी झंडा मेला पर सख्त फैसला..
अध्यात्म

पटना हाईकोर्ट का महावीरी झंडा मेला पर सख्त फैसला..

पटना हाईकोर्ट ने धार्मिक जुलूस को लेकर एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो आस्था और कानून-व्यवस्था के बीच की सीमा को साफ करता है. कोर्ट ने कहा कि धर्म मानने और धार्मिक गतिविधियां करने का अधिकार संविधान देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी भी जुलूस या धार्मिक आयोजन को बिना शर्त अनुमति […]

UB India News22 अग॰
तीसरी सोमवारी पर हर-हर महादेव के जयकारों से शिवमय हुआ शहर…….
अध्यात्म

तीसरी सोमवारी पर हर-हर महादेव के जयकारों से शिवमय हुआ शहर…….

आज सावन की तीसरी सोमवारी है। सोमवारी और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग बना है। कहा जाता है कि इस दुर्लभ संयोग में भगवान शिव और माता पार्वती के साथ नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। शिव मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए लंबी कतार लगी है। […]

UB India News17 अग॰
लखीसराय के अशोक धाम शिव मंदिर में हुई भगदड़ में 7 लोगों की मौत , 20 से अधिक लोग घायल
अध्यात्म

लखीसराय के अशोक धाम शिव मंदिर में हुई भगदड़ में 7 लोगों की मौत , 20 से अधिक लोग घायल

बिहार के लखीसराय में सोमवार को भगदड़ मच गई। हादसे में 7 महिलाओं की मौत हो गई। 23 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। 3 की हालत नाजुक बताई जा रही है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। घटना अशोकधाम स्टेशन से मंदिर जाने वाले रास्ते पर हुई। लखीसराय डीएम शैलेंद्र कुमार ने […]

UB India News17 अग॰
स्वतंत्रता दिवस पर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद कार्यालय में देशभक्ति का उत्साह
अध्यात्म

स्वतंत्रता दिवस पर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद कार्यालय में देशभक्ति का उत्साह

बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के मंदिरी स्थित कार्यालय में शनिवार को 79वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। समारोह में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सौहार्द और देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश प्रमुखता से उभरा। कार्यक्रम का शुभारंभ बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणबीर नंदन ने […]

UB India News15 अग॰
साल 2026 का अंतिम सूर्यग्रहण कल , भारत में दिखाई नहीं देगा……………
खास खबर

साल 2026 का अंतिम सूर्यग्रहण कल , भारत में दिखाई नहीं देगा……………

साल 2026 का अंतिम और पूर्ण सूर्यग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है। सूर्यग्रहण वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टि दोनों से ही बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। यह सूर्यग्रहण कर्क राशि में लगने जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो जब भी सूर्यग्रहण लगता है वह हर राशि के जातकों को किसी न किसी […]

UB India News11 अग॰
सावन सोमवारी ;शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी……..
अध्यात्म

सावन सोमवारी ;शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी……..

पटना के बोरिंग कैनाल रोड स्थित पंचमुखी मंदिर समेत विभिन्न शिवालयों में सावन की दूसरी सोमवारी पर सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और मनोकामना मांगी। मुजफ्फरपुर में सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा गरीबनाथ के जलाभिषेक के […]

UB India News10 अग॰