दक्षिण कोरिया के बुसान में अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मिले. मुलाकात अच्छी रही. चीन पर लगाया गया टैरिफ घटा दिया गया. पहले ये टैरिफ कितना था. ट्रंप ने आने के बाद इसको कितना बढ़ाया. अब ये कितना हो गया है. इसमें एक टैरिफ चीन की नशीली दवा फेंटानिल के […]
By UB India News • Patna, Bihar शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025, 11:35 AM • 6 मिनट read
दक्षिण कोरिया के बुसान में अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मिले. मुलाकात अच्छी रही. चीन पर लगाया गया टैरिफ घटा दिया गया. पहले ये टैरिफ कितना था. ट्रंप ने आने के बाद इसको कितना बढ़ाया. अब ये कितना हो गया है. इसमें एक टैरिफ चीन की नशीली दवा फेंटानिल के रसायनों से संबंधित भी है. तो ये समझेंगे कि चीन अब अगर अमेरिका को वस्तुएं आयात करता है तो उसे अब कितना टैरिफ देना होगा.
मोटे तौर पर ये अमेरिका ने चीन से आयातित वस्तुओं पर लगने वाले टैरिफ दरों में 10% की कटौती करने का फैसला किया. पहले चीन पर कुल अमेरिकी टैरिफ दर लगभग 57% थी, जिसे घटाकर 47% कर दिया गया.
सवाल – एक महीने पहले तक अमेरिका प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप चीन पर 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कर रहे थे. चीजें कैसे बदल गईं?
– एक महीने पहले तक ट्रंप ने चीन को रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर नियंत्रण और रूस से तेल खरीदने की वजह से टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी थी, क्योंकि चीन की इन नीतियों से अमेरिका के हितों को खतरा नजर आ रहा था. 1 नवंबर 2025 से चीन पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा हुई था, जिसका उद्देश्य चीन की रेयर अर्थ मिनरल्स नीति और वैश्विक तेल मार्केट पर रूस की पकड़ को चुनौती देना था.
अचानक स्थितियां बदल गईं जब दक्षिण कोरिया के बुसान में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई. दोनों देशों के नेताओं ने बंद कमरे में दो घंटे तक चर्चा की. चीन ने अमेरिका की मांगें मान लीं – रेयर अर्थ मिनरल्स पर नियंत्रण को ढील दी, सोयाबीन और कृषि उत्पादों की खरीद फिर शुरू की. अन्य अहम व्यापारिक मुद्दों पर रियायत दी गई. इससे ट्रंप ने भी चीन पर टैरिफ को 57% से घटाकर 47% कर दिया.
सवाल – फेंटानिल दवा क्या है.चीन इसका और इसके रसायनों को अमेरिका को भेजता था. इस पर टैरिफ अलग से लगाया गया, अब कम कर दिया गया. उसकी वजह क्या थी?
– फेंटानिल एक शक्तिशाली सिंथेटिक ओपिओइड दवा है जिसका उपयोग मुख्य रूप से तीव्र और गंभीर दर्द के इलाज के लिए किया जाता है. यह मॉर्फिन से करीब 100 गुना और हेरोइन से 30-50 गुना अधिक शक्तिशाली होता है. फेंटानिल को दर्द निवारक और बेहोशी के लिए चिकित्सा क्षेत्र में इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि इसका दुरुपयोग बहुत खतरनाक होता है. इससे मौत भी हो सकती है. ये श्वास प्रणाली को रोक सकता है. अमेरिका ने फेंटानिल से जुड़े रसायनों पर लगाया गया 20% टैरिफ भी घटाकर 10% कर दिया है.
दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में मिले डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग.
सवाल – क्या ये कह सकते हैं कि चीन के रेयर अर्थ मिनरल्स को अमेरिका भेजने पर आमतौर पर रोक लगाने से अमेरिका इस समझौते के लिए मजबूर होना पड़ा?
– आप इसको इस तरह देख सकते हैं कि अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाकर चीन पर दबाव बढ़ाया. अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी देकर चीन को और दबाव में लाने की कोशिश की. जवाब में चीन अमेरिका से खरीदी जाने वाली सोयाबीन को खरीदना बंद कर दिया. अमेरिका के वाहन से लेकर इलैक्ट्रॉनिक उद्योगों में अनिवार्य तौर पर इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स को उसको देने पर मजबूत कंट्रोल कर लिया. दुनिया में चीन 99 फीसदी स्तर तक रेयर अर्थ मिनरल्स का ना केवल उत्पादन करता है बल्कि उसकी रिफाइनिंग भी. इससे अमेरिका के महत्वपूर्ण उद्योगों के सामने जबरदस्त संकट खड़ा हो गया.
ट्रंप भी ऐसा लग रहा है कि टैरिफ के बहाने दबाव का खेल खेल रहे थे. अमेरिका को ज्यादा फायदा दिलाने का. उसमें वह कामयाब रहे हैं. अब चीन सोयाबीन खरीदेगा और चीन उसे दुर्लभ पृथ्वी तत्वों या रेयर अर्थ मिनरल्स निर्यात करना शुरू कर देगा. एक तरह से देखें तो ट्रंप जिस तरह का दबाव टैरिफ को लेकर बढ़ाया, वो काम कर गया.
सवाल – ट्रंप के आने से पहले चीन पर अमेरिका टैरिफ रेट क्या था?
– ट्रंप के आने से पहले चीन पर अमेरिकी टैरिफ दर बहुत कम या करीब नगण्य थी. 2018 में ट्रंप प्रशासन ने धारा 301 के तहत चीन से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाना शुरू किया. 6 जुलाई 2018 को पहली बार 818 चीनी उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाया गया, जिनका मूल्य करीब 34 अरब अमेरिकी डॉलर था. बाद में ये टैरिफ बढ़ते चले गए. 2025 तक कई दफे बढ़ोतरी के बाद यह करीब 57% तक पहुंच गया.
सवाल – इसका मतलब ट्रंप के आने के बाद से ही ये टैरिफ वार शुरू हुआ?
– हां, बिल्कुल ऐसा कह सकते हैं. ट्रंप के पहले चीन पर कोई बड़ा टैरिफ युद्ध नहीं था. वह 2018 से शुरू हुआ. तब से टैरिफ दरें तेजी से बढ़ीं. 2025 में हाल की मुलाकात के बाद इसे घटाकर करीब 47% किया गया.
है.
शी-जिनपिंग और ट्रंप.
सवाल – बाइडेन के राष्ट्रपति रहने के दौरान चीन पर टैरिफ कितना था?
– दिसंबर 2024 तक अमेरिका की चीन पर प्रभावी टैरिफ दर लगभग 15.8% थी. ये दर जनवरी 2024 के अंत में करीब 2.3% थी, जो विभिन्न व्यापार तनाव और टैरिफ वृद्धि की वजह से बढ़कर साल के अंत तक 15.8% तक पहुंच गई. इस अवधि में अमेरिका ने चीनी आयातित माल पर कई टैरिफ लगाए थे, जिनमें से कई 25% या उससे अधिक की दर से थे.
सवाल – इसका मतलब ये भी हुआ कि अब दुनिया में दो देशों में सबसे ज्यादा टैरिफ दर लगी हुई है, ये भारत और ब्राजील हैं?
– हां, चीन पर टैरिफ घटाकर 47 फीसदी करने के बाद भारत और ब्राज़ील पर टैरिफ 50% हो गया है. ये दोनों ही अब सबसे अधिक टैरिफ वाले देश हैं.
सवाल – तो क्या भारत और ब्राजील को छोड़कर दुनिया के अन्य मुल्कों के साथ अमेरिका का टैरिफ वार सेटल हो चुका है?
– हां, ऐसा ही लगता है, अमेरिका के साथ टैरिफ वार से संबंधित विवादों का बड़ा हिस्सा हल हो चुका है. भारत और ब्राजील के साथ ही अभी इस पर कोई समझौता होना है. आसियान देशों की बैठक में जब ट्रंप और ब्राजीली प्रेसीडेंट लूला की मुलाकात हुई तो उसमें भी ट्रंप ने ये संकेत दे दिया कि उसका टैरिफ कम कर दिया जाएगा. भारत के साथ भी व्यापार समझौता अंतिम चरण में है. इस समझौते के होते ही टैरिफ में गिरावट हो सकती है. भारत और ब्राजील के मामले में स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि उनके बीच के टैरिफ विवाद सुलझ गए हैं.