भारतीय रुपया बुधवार (3 दिसंबर) को मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 90 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे मुद्रा पर बढ़ते दबाव का संकेत मिला. दिन के कारोबार में रुपये ने 90.13 का निचला स्तर छुआ, जो मंगलवार के रिकॉर्ड 89.94 से 0.3% कमजोर है.
एक निजी बैंक के ट्रेडर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि 88.80 का स्तर, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक हफ्तों से बचा रहा था, टूटने के बाद बाजार का तकनीकी सहारा खत्म हो गया. इसके चलते रुपया लंबे समय से मौजूद दबावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है, जिनमें कमजोर पूंजी प्रवाह, आयातकों की डॉलर मांग और बढ़ती सट्टेबाजी शामिल हैं.
रुपये की कमजोरी में योगदान देने वाले कारकों में व्यापार और पोर्टफोलियो प्रवाह की सुस्ती के साथ-साथ वॉशिंगटन के साथ व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता भी शामिल है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आयात लागत बढ़ने से महंगाई पर असर पड़ सकता है.
भारतीय करेंसी पर लगातार दबाव रहा है, पिछले पांच सेशन में डॉलर-रुपया की जोड़ी 1 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है. पिछले महीने 1.5% से अधिक बढ़ी है और लगातार छठे महीने बढ़त की रफ्तार दिखाई है.
क्यों गिरा रूपया?
बैंकों के हाई लेवल पर अमेरिकी डॉलर की खरीद जारी रखने और विदेशी पूंजी की निकासी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है. रुपये में ये गिरावट कमजोर ट्रेड और पोर्टफोलियो फ्लो के साथ-साथ भारत-US ट्रेड डील को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच आई है. इन वजहों से पूरे सेशन में करेंसी पर लगातार दबाव बना रहा.
रुपये में तेज गिरावट का असर घरेलू इक्विटी मार्केट पर भी पड़ा. रुपए में गिरावट का प्रभाव भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स पर भी नजर आ रहा हैनिफ्टी इंडेक्स 26,000 के निशान से नीचे चला गया है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स भी करीब 200 पॉइंट्स गिर गया क्योंकि कमजोर होती करेंसी ने महंगाई और विदेशी निवेशकों की एक्टिविटी को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
1 जनवरी 2025 को रुपया डॉलर के मुकाबले 85.70 के स्तर पर था. भारत और अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता से निवेशक परेशान हैं. अगर ये डील नहीं हो पाती है तो रुपये में आगे और कमजोरी देखने को मिल सकती है.
आपकी जेब पर क्या होगा असर?
रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट से देश में आयात महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। विदेश में पढ़ाई करना और घूमना भी अब भारतीय छात्रों और पर्यटकों के लिए ज्यादा खर्चीला होगा। इसके साथ ही मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
बाजार को RBI से उम्मीद
आमतौर पर रुपये की गिरावट रोकने के लिए रिजर्व बैंक (RBI) दखल देता है। RBI डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश करता है। हालांकि, शेयर मार्केट के विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार डॉलर की वैश्विक मांग बहुत ज्यादा है। अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में रुपये में और गिरावट देखने को मिल सकती है।








