जनवरी की शुरुआत में झटका! क्या फिर गिरेगा बाजार?

नए साल की शुरुआत से निवेशकों को बड़ी उम्मीदें होती हैं, लेकिन 2026 के पहले ही हफ्ते ने शेयर बाजार को सतर्क कर दिया है। जनवरी के शुरुआती दो कारोबारी दिनों में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी बाजार से 7608 करोड़ रुपये निकाल लिए। इस अचानक हुई बिकवाली ने बाजार में हल्की […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 4 जनवरी 2026, 09:39 AM 2 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
जनवरी की शुरुआत में झटका! क्या फिर गिरेगा बाजार?
Photo: UB India News Archive

नए साल की शुरुआत से निवेशकों को बड़ी उम्मीदें होती हैं, लेकिन 2026 के पहले ही हफ्ते ने शेयर बाजार को सतर्क कर दिया है। जनवरी के शुरुआती दो कारोबारी दिनों में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी बाजार से 7608 करोड़ रुपये निकाल लिए। इस अचानक हुई बिकवाली ने बाजार में हल्की घबराहट पैदा कर दी है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले दिनों में बाजार पर और दबाव देखने को मिलेगा।

आंकड़ों के मुताबिक, यह बिकवाली ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों को लेकर असमंजस, वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर झुकते दिख रहे हैं। इसी वजह से उभरते बाजारों, खासकर भारत से एफपीआई की निकासी देखने को मिल रही है।

2025 में भारी बिकवाली

अगर बीते साल पर नजर डालें तो तस्वीर और भी साफ हो जाती है। साल 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम निकासी की थी। इसकी प्रमुख वजहें रहीं डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी, वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव, अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी को लेकर चिंता और भारतीय शेयरों का महंगा वैल्यूएशन। कई विदेशी फंड्स ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी और जोखिम कम करने के लिए अपनी हिस्सेदारी घटाई।

रुपये पर दबाव बढ़ा

एफपीआई की लगातार बिकवाली का असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रुपये पर भी दबाव बढ़ा। 2025 के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसमें विदेशी निवेशकों की निकासी की अहम भूमिका मानी जा रही है। कमजोर रुपया आयात महंगा करता है और महंगाई पर भी असर डाल सकता है, जिससे नीति निर्धारकों की चिंता बढ़ जाती है।

2026 में उम्मीद कायम

हालांकि, जानकार मानते हैं कि 2026 में तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के घरेलू फंडामेंटल्स अब भी मजबूत हैं।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू
खास खबर

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू

राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का खार्ग द्वीप पूरी तबाह कर दिया गया है. हालांकि अभी ईरान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने हमले की एआई वीडियो भी जारी की है.

UB India News31 अग॰
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰