बिहार के मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार की सुबह हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों को ऐसी पीड़ा दे दी है, जिसे वे शायद कभी भूल नहीं पाएंगे. अस्पताल के ICU में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में कई जिंदगियों को अपनी चपेट में ले लिया. आधिकारिक तौर पर […]
By UB India News • Patna, Bihar गुरुवार, 4 जून 2026, 05:40 AM • 5 मिनट read
बिहार के मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार की सुबह हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों को ऐसी पीड़ा दे दी है, जिसे वे शायद कभी भूल नहीं पाएंगे. अस्पताल के ICU में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में कई जिंदगियों को अपनी चपेट में ले लिया. आधिकारिक तौर पर 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, हालांकि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. जबकि कई लोगों द्वारा 10 मरीजों के मरने की खबर बताई जा रही है.
जमीन बेचकर करा रही थी ससुर का इलाज
मनियारी थाना क्षेत्र के बगाही गांव की रहने वाली संगीता कुमारी की आंखों में उस भयावह रात की तस्वीर अब भी ताजा है. संगीता बताती हैं कि उनके ससुर बृजनंदन राय सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद पिछले 4 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. परिवार ने बेहतर इलाज की उम्मीद में उन्हें प्रसाद हॉस्पिटल में भर्ती कराया था. इलाज के लिए जमीन तक बेच दी गई थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि अस्पताल ही उनके लिए मौत का कारण बन जाएगा.
आंख के सामने जल रहे थे ससुर
संगीता कहती हैं कि गुरुवार सुबह करीब 3 बजे वह ICU के बाहर बैठी थीं. अचानक अंदर से अफरा-तफरी मच गई. मरीज और उनके परिजन दरवाजे तथा खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश करने लगे. जब उन्होंने ICU के अंदर झांका तो उनके ससुर आग की लपटों में घिरे हुए थे. “मैं उन्हें बचाने के लिए अंदर दौड़ना चाहती थी, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी. मेरी आंखों के सामने मेरे ससुर जल रहे थे और मैं कुछ नहीं कर पा रही थी. यह कहते हुए संगीता फफक कर रो पड़ती हैं’.
वहीं, प्रत्यक्षदर्शी शशांक कुमार भी उस रात के मंजर को याद कर सिहर उठते हैं. उनके अनुसार, ICU में करीब 30 से अधिक मरीज भर्ती थे. आग लगते ही लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर ही बाहर की ओर दौड़ पड़े. कुछ लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर निकलने का प्रयास किया. शशांक बताते हैं, “हम लोग अपने मरीजों को चादर में लपेटकर किसी तरह बाहर निकाल रहे थे. अगर शुरुआत में जिस बेड पर आग लगी थी, उसे तत्काल अलग कर दिया जाता तो शायद स्थिति इतनी भयावह नहीं होती”.
विशंभरपुर, शिवहर के रहने वाले उदय कुमार (एलआईसी एजेंट) चार-पांच दिन से अस्पताल में भर्ती थे। ब्रेन सर्जरी के बाद उन्हें वार्ड में रखा गया था। पत्नी नीलू देवी, सास बच्ची देवी, बेटा सत्यम, बेटी आकांक्षा और साला नीतीश समेत पूरा परिवार अस्पताल में मौजूद था।
जब आग लगने की शोर सुनकर दौड़े-दौड़े परिजन ऊपर पहुंचे तो उदय कुमार पहले ही आग की चपेट में जल चुके थे। परिवार वाले सदमे में हैं।
डायलिसिस पर थी गीता देवी, जान न बच सकी
कथैया थाना क्षेत्र के दिस्तौलिया गांव की गीता देवी पति ईश्वर ठाकुर के साथ अस्पताल में भर्ती थीं। शुगर और ब्लड प्रेशर से ग्रसित गीता देवी का डायलिसिस चल रहा था। उनके बेटे अनीश ठाकुर ने घटना की जानकारी दी।
कृष्णनंदन सिंह (78 वर्ष), पिता जानकी सिंह, गोरिगमा डीह, मीनापुर। 22 मई से भर्ती थे। डॉ. संजीव के यूनिट में इलाज चल रहा था। फेफड़ों में पानी भरने की शिकायत थी।
वहीं इस हादसे के समय अस्पताल में मौजूद एक युवक जिसने कई मरीजों को बाहर निकाला उसने बताया कि अस्पताल की लिफ्ट पहले ही बंद थी। उसने ताला तोड़कर लोगों को बाहर निकाला। उसने बताया कि अस्पताल के कमरे का गेट तोड़कर उसने हवा आने के लिए रास्ता बनाया।
वहीं इस हादसे में मारे गए मरीजों के परिजनों ने बताया कि उनके परिजन के शव को गायब कर दिया गया है। उनके शव के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने परिजन को 31 मई की रात में भर्ती कराया था।
25 से ज्यादा लोगों की मौत
वहीं अस्पताल में मौजूद एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मैनेजमेंट की गलती के कारण आग लगी है। आईसीयू में हमेशा एसी चलते रहता है और एसी को हमेशा मैनेज करना पड़ता है।

साथ ही उसने ये तक दावा किया कि आईसीयू में लगभग में 25 से ज्यादा मरीज थे और सभी की मौत हो गई। साथ ही उसने दावा किया सभी शव को निकालकर पहले ही गायब कर दिया गया है।
अस्पताल के सारे स्टाफ भाग रहे थे
वहीं एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि सुबह 3 बजे हल्ला होने की आग लग गई आग गई। जिसके बाद वो भागते भागते आईसीयू में पहुंचा। जहां उसने देखा कि अस्पताल के सारे भाग रहे हैं और मरीज खुद से ही बाहर निकल रहे हैं।

अस्पताल का कोई भी स्टाफ उनकी मदद नहीं कर रहा है। आग के धुआं इतना था कि हमलोग अंदर नहीं जा सकते थे।