दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में भड़की आग हो या बिहार के मुजफ्फरपुर में एक निजी अस्पताल के आईसीयू में लगी आग या फिर नोएडा में अलग-अलग जगहों पर आग लगने के खौफनाक दृश्य, आए-दिन हो रहे ऐसे हादसे महज इत्तेफाक नहीं हो सकते, बल्कि ये इस बात के संकेत हैं कि हमारी महानगरीय […]
By UB India News • Patna, Bihar शनिवार, 6 जून 2026, 12:34 PM • 5 मिनट read
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में भड़की आग हो या बिहार के मुजफ्फरपुर में एक निजी अस्पताल के आईसीयू में लगी आग या फिर नोएडा में अलग-अलग जगहों पर आग लगने के खौफनाक दृश्य, आए-दिन हो रहे ऐसे हादसे महज इत्तेफाक नहीं हो सकते, बल्कि ये इस बात के संकेत हैं कि हमारी महानगरीय व्यवस्था और सुरक्षा ढांचे में कोई ऐसा गहरा और बुनियादी दोष जरूर है, जिसकी हम अनदेखी कर रहे हैं। देश में अग्नि सुरक्षा से जुड़े मानकों की कमी नहीं है।
भवन निर्माण से लेकर अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास मार्ग, फायर अलार्म प्रणाली और नियमित सुरक्षा ऑडिट तक सबकुछ नियम पुस्तिकाओं में दर्ज है। लेकिन समस्या इनके अनुपालन में है। अब दिल्ली के होटल को ही लें, जहां सिर्फ छह कमरों की अनुमति थी, लेकिन उसमें 25-26 कमरे थे। प्रवेश व निकास द्वार एक ही होने की वजह से स्थिति भयावह हो गई। इसी तरह, बिहार के अस्पताल में भी क्षमता से अधिक मरीज भर्ती थे और बुनियादी अग्निशमन उपकरणों की भी कमी देखी गई। इसके अतिरिक्त चरम गर्मी, एयरकंडीशनर और शॉर्ट सर्किट भी आग लगने की आम वजह बन गए हैं।
महानगरों व शहरों में आबादी के बढ़ते घनत्व, अवैध निर्माण, बेसमेंट के अनुचित इस्तेमाल और पार्किंग स्थलों के व्यावसायिक उपयोग जैसी प्रवृत्तियों ने चुनौती को और जटिल बनाया है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली अग्निशमन सेवा के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में ही इस वर्ष अब तक आग लगने से करीब 65 लोग जान गवां चुके हैं। इस स्थिति के लिए सिर्फ भवन मालिकों को दोषी ठहराकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता। स्थानीय निकायों, विकास प्राधिकरणों और अग्निशमन विभागों की भूमिका भी उतनी ही अहम है। अगर प्रभावी ढंग से नियमित निरीक्षण किए जाएं और नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई हो, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
आम नागरिकों में भी अग्नि सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। अधिकांश लोगों को यह तक पता नहीं होता कि किसी भवन में आपातकालीन निकास कहां है या आग लगने की स्थिति में प्राथमिक कदम क्या होने चाहिए। हादसे के बाद राहत और मुआवजे की घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिसमें हादसों की आशंका न्यूनतम हो। पिछले कुछ समय में आग लगने के हादसों में आई तेजी के बाद भी अगर यह विषय औपचारिक चर्चा के बाद ठंडे बस्ते में चला गया, तो यह मान लेना चाहिए कि अगली त्रासदी बस समय की ही बात है।
गलियों में चल रहे होटल-रेस्टोरेंट और कोचिंग सेंटर,
शहर और कस्बों की संकरी गलियों में संचालित हो रहे होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल और कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। अधिकांश संस्थानों में आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं।
कई जगहों पर बेसमेंट में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जबकि आपात स्थिति में लोगों के सुरक्षित निकास की व्यवस्था भी नहीं है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की कार्रवाई केवल नोटिसों तक सीमित नजर आ रही है। सैकड़ो संस्थानों ने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर रखा है लेकिन इनमें से लगभग आधे संस्थानों ने तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद भी एनओसी का नवीनीकरण नहीं करवाया है। नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि के बाद एनओसी का नवीनीकरण कराना अनिवार्य है ताकि सुरक्षा मानकों की दोबारा जांच की जा सके। अधिकारी खुद मान रहे हैं कि संस्थान संचालक बचाव के महंगे यंत्र लगवाने से बच रहे हैं।
मुख्य बाजार में बेसमेंट में चल रही दुकानें, यंत्र तक नहीं
हाल ही में देश मेंकई जगहों पर होटल, कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक भवनों में आग लगने की घटनाओं ने कई सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में संस्थान बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के संचालित हो रहे हैं। कई इमारतों में आपातकालीन निकास द्वार तक नहीं हैं तो कहीं अग्निशमन यंत्र खराब अवस्था में पड़े हैं। संकरी गलियों में स्थित भवनों तक दमकल वाहनों की पहुंच भी मुश्किल हो सकती है जिससे किसी भी हादसे की स्थिति में जानमाल का बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। शहर के मुख्य बाजार में बेसमेंट में दुकानें बनी हैं। यहां पर आग बुझाने के यंत्रों तक की व्यवस्था नहीं है।
ये होने चाहिए अग्नि सुरक्षा के इंतजाम
विशेषज्ञों के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक संस्थानों में आग से बचाव के लिए फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमक यंत्र), फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, फायर हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम, आपातकालीन निकास द्वार, इमरजेंसी लाइटिंग, फायर होज रील और स्पष्ट निर्देश वाले निकासी मार्ग होने चाहिए। साथ ही कर्मचारियों और स्टाफ को समय-समय पर अग्निशमन प्रशिक्षण भी दिया जाना जरूरी है।
संस्थानों की नियमित जांच की जा रही है और नियमों का पालन नहीं करने वालों को नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं। उच्चाधिकारियों से विशेष अभियान के निर्देश मिलने पर व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया जाएगा। लोगों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।